नए साल में नई सौगात की तैयारी, योजनाओं को अमलीजामा पहनने में जुटी योगी सरकार

नए साल को आने में सिर्फ 27 दिन बाकी हैं। नए साल पर योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को तोहफा देने की तैयारियां कर ली है।

लखनऊ. नए साल को आने में सिर्फ 27 दिन बाकी हैं। नए साल पर योगी सरकार ने प्रदेशवासियों को तोहफा देने की तैयारियां कर ली है। सरकार प्रदेश में जहां युवाओं की नौकरी के अवसर बढ़ाने, नए उद्योग लगाने की व्यवस्था कर रही है वहीं प्रदेशवासी साफ हवा में सांस ले इसकी योजना बना ली है, जिसका क्रियान्वयन नए साल के जनवरी माह से शुरू हो जाएगा। मंगलवार को कैबिनेट ने इससे संबंधित फैसलों को मंजूरी दी है। वहीं किन्नरों को समाज में हैसियत देने के लिए राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज करने का अधिकार देने की तैयारियां जोरों पर चल रही है।

डिफेंस कॉरिडोर से मिलेगा रोजगार :-

डिफेंस कॉरिडोर को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार काफी गंभीर है। निवेश व रोजगार की संभावनाओं को देखते हुए डिफेंस इंडस्ट्रियल एयरो स्पेस एंड एम्प्लॉयमेंट पॉलिसी में संसोधन किया गया है। जिसके तहत डिफेंस कॉरिडोर में निवेश करने वाली कम्पनियों को जमीन खरीदने पर 25 और स्टाम्प ड्यूटी पर 100 प्रतिशत सब्सिडी मिलगी। मंगलवार को कैबिनेट ने इसे हरी झंडी दिखाई है। इसके साथ ही सरकार जिस स्थान पर कम्पनियां निवेश करेंगी वहां पर सड़क, पानी और बिजली जैसी सभी आधारभूत सुविधाओं की व्यवस्था भी करेगी। इन सुविधाओं के आधार पर प्रदेश ढेर सारे युवाओं को रोजगार के अवसर मिल सकेंगे।
डिफेंस कॉरिडोर में हथियार, गोला बारुद व सहायक उपकरण निर्माण यूनिट तो लगेंगी ही साथ ही आधुनिकतम तकनीक भी शोध व अनुंसधान के जरिए विकसित की जाएगी। टेस्टिंग रेंज भी बनेगी। रक्षा उत्पादन कंपनियां यहां विकसित हो रहे डिफेंस पार्क के साथ-साथ एयरोस्पेस पार्क में निवेश यूनिट लगाने का मौका होगा। एमएसएमई सेक्टर से जुड़े उद्योगों कामन फैसेलिटी सेंटर के जरिए बढ़ावा दिया जाएगा। इससे ढाई लाख लोगों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर मुहैया होंगे। रूस, दक्षिण कोरिया, अमेरिका व यूके की रक्षा उत्पादन कंपनियों द्वारा यहां निवेश किए जाने की संभावना है।

डिफेंस एक्सपो बेहतरीन मौका

लखनऊ में होने वाले डिफेंस एक्सपो को डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को बढ़ावा मिलने के नजरिए से बेहतरीन मौका माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश में 5 से 9 फरवरी 2020 के बीच में वृंदावन योजना में रक्षा मंत्रालय की अगुआई में डिफेंस एक्सपो का आयोजन किया जा रहा है और इसमें यूपी मेजबान की भूमिका में है। इस एक्सपो के लिए अभी तक 350 कंपनियों ने स्टॉल बुक करवाए हैं। बड़ी कंपनियों के साथ एमओयू के अलावा एमएसएमई सेक्टर के लिए भी कई संभावनाएं यूपी देख रहा है।

साफ हवा के लिए इलेक्ट्रानिक वाहनों को बढ़ावा :-
प्रदेश में प्रदूषण कम हो और लोग साफ हवा में सांस ले इसके लिए सरकार ने जनता में इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए एक बड़ी घोषणा की है। इलेक्ट्रिक वाहन को बढ़ावा देने के लिए योगी सरकार ने इसे खरीदने वाले शुरुआत के एक लाख खरीदारों को वाहन पंजीकरण शुल्क में 100 फीसदी छूट देने की घोषणा की है। पंजीकरण की यह शुल्क दोपहिया वाहनधारकों को 100 फीसदी तो चार पहिया वाहन चालकों को 50 फीसदी छूट देने को कहा गया। प्रदेश में सरकार ने प्रदूषण करने के लिए 13 अगस्त को इलेक्ट्रिक वाहन नीति 2019 जारी की थी।

इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत 2030 तक एक हजार इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। पहले चरण 2020 तक 25 फीसदी, द्वितीय चरण 2022 तक 35 फीसदी और 2030 तक बाकी 40 फीसदी इलेक्ट्रिक बसें चलेंगी। नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, प्रयागराज, मथुरा, कानपुर, मेरठ, आगरा, गोरखपुर और वाराणसी 10 मेट्रो शहरों में इलेक्ट्रिक वाहन चलाए जाएंगे। इलेक्ट्रिक बसों को पायलेट प्रोजेक्ट के तौर सबसे पहले नोएडा में चलाया जाएगा। इन 10 शहरों में 70 फीसदी इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रयोग किया जाएगा।

अक्तूबर से चलेंगे पूर्वांचल एक्सप्रेस वे पर हल्के वाहन :-

प्रदेश सरकार की ‘पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे’ एक अहम योजना है। यह 354 किलोमीटर लम्बी है। इस योजना में उत्तर प्रदेश के 9 जिले लखनऊ, सुल्तानपुर, फैजाबाद, अम्बेडकरनगर, आजमगढ़, बाराबंकी, अमेठी, मऊ और गाज़ीपुर शामिल होंगे। छह लेन का यह प्रवेश नियंत्रित एक्सप्रेसवे तीन साल में तैयार होगा। इसकी लागत लगभग 23,349.37 करोड़ रुपए है। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे देश का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा। पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे जिला लखनऊ के चंदसराय से जिला गाज़ीपुर के हैदरिया को जोड़ेगा।
इसके अतिरिक्त यह 165 किलोमीटर लंबे आगरा-ग्रेटर नोएडा यमुना एक्सप्रेसवे और 302 किमी लंबे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के माध्यम से राष्ट्रीय राजधानी में भी जोड़ देगा। उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे, जिसे इंजीनियरिंग, खरीद और निर्माण (ईपीसी) मोड पर बनाया जा रहा है, आठ लेन तक विस्तार योग्य होगा। मौजूदा आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जुड़ने के बाद पूर्वांचल एक्सप्रेसवे एक विशाल औद्योगिक गलियारा बन जाएगा। यह पूर्वी उत्तर प्रदेश को पश्चिमी सीमा से जोड़ देगा, जिसके परिणामस्वरूप राज्य के समग्र विकास होगा।

यह परियोजना समय से पूरी हो इसके लिए सरकार सख्ती के संग निगाहे रखे हुए है। इसके मुख्य सचिव आरके तिवारी ने मंगलवार को एक समीक्षा बैठक में निर्देश देते हुए कहा कि पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के निर्माण का काम पूरा करके अक्तूबर 2020 में ट्रायल के तौर पर मुख्य कैरिज वे पर हल्के वाहनों का यातायात प्रारम्भ कराया जाए।

नए साल पर बढ़ेगी किन्नरों की सामाजिक हैसियत !

प्रदेश सरकार किन्नरों की सामाजिक हैसियत बढ़ाना चाहती है। किन्नरों का नाम राजस्व अभिलेखों में नाम दर्ज हो इसके लिए तैयारियां जोरों पर चल रही है। सरकार इसके लिए तैयार प्रस्ताव व ड्राफ्ट का अध्ययन कर रही है। अपर मुख्य सचिव राजस्व रेणुका प्रसाद के अनुसार किन्नरों को समान कानूनी अधिकार देने संबंधी प्रस्ताव प्राप्त हुआ है। राजस्व परिषद इसका अध्ययन कर रहा है। अध्ययन के बाद कार्यवाही की जाएगी।

Mahendra Pratap
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