scriptMainpuri by election Shivpal yadav roll in dimple yadav election | शिवपाल रूठे तो सपा के हाथ से निकल जाएगी मैनपुरी सीट, आंकड़े दे रहे गवाही | Patrika News

शिवपाल रूठे तो सपा के हाथ से निकल जाएगी मैनपुरी सीट, आंकड़े दे रहे गवाही

locationलखनऊPublished: Nov 14, 2022 07:17:06 am

Submitted by:

Anand Shukla

मैनपुरी सीट समाजवादी पार्टी का गढ़ माना जाता है। शिवपाल यादव इन दिनों सपा से खफा चल रहे हैं। यही डिंपल के लिए मुश्किल हो सकती है। पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव पर नजर डालें, तो इस सीट पर शिवपाल सिंह यादव का एक अहम रोल रहा है।

Shiv pal

समाजवादी पार्टी ने मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में डिंपल यादव को उतारा है। यह सपा की सबसे सुरक्षित सीट मानी जाती है। मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद हो रहे इस चुनाव में डिंपल यादव की स्थिति मजबूत मानी जा रही है।

अखिलेश यादव के चाचा और प्रसपा के अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव ने इस चुनाव को लेकर अपने पत्ते नहीं खोेले हैं। वो अखिलेश यादव से नाराज भी चल रहे हैं। मीडिया ने उनसे डिंपल यादव को लेकर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी प्रसपा है। उनसे सपा के बारे में कुछ ना पूछें।

शिवपाल ने उतारे उम्मीदवार तो बदल सकता है इतिहास
शिवपाल यादव की नाराजगी को देखते हुए ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वो प्रसपा से उम्मीदवार उतार सकते हैं। अगर शिवपाल मैनपुरी उप-चुनाव में उम्मीदवार उतारते हैं, तो समाजवादी पार्टी को अपना गढ़ बचाना मुश्किल हो सकता है। खासतौर से अगर शिवपाल सिंह यादव यहां से चुनाव लड़ते हैं तो डिंपल को चुनाव जीतना मुश्किल हो जाएगा।

शिवपाल क्यों हैं अहम
मैनपुरी लोकसभा में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें भोगांव, किशनी (सुरक्षित), करहल, मैनपुरी और जसवंतनगर है। इस साल हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे पर नजर डालें तो यहां बीजेपी और सपा के बीच ही मुकाबला रहा था। मैनपुरी और भोगांव बीजेपी के खाते में गई थी। करहल और किशनी सीट समाजवादी पार्टी के खाते में गई। जसवंतनगर सीट से शिवपाल सिंह यादव जीते थे। उन्होंने भी सपा के टिकट पर ही चुनाव लड़ा था।

शिवपाल फिलहाल अखिलेश यादव से अलग हैं। शिवपाल अपनी पार्टी प्रसपा के अध्यक्ष हैं। ऐसे में मैनपुरी में बीजेपी और सपा के पास दो- दो विधानसभा सीटें हैं। अब प्रसपा मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में अपना उम्मीदवार उतारती है तो ऐसे में बराबरी का मुकाबला हो जाएगा और बाजी सपा के हाथ से निकल भी सकती है।

1996 से है ये सीट सपा के पास
मैनपुरी के आंकड़े दिलचस्प हैं। ये लंबे समय से सपा का अभेद किला बना हुआ है। साल 1996 में सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव ने इस सीट से चुनाव लड़ा था और जीत दर्ज की थी । तब से लेकर अब तक ये सीट समाजवादी पार्टी के खाते में है। 2014 और 2019 लोकसभा चुनाव में मोदी की लहर थी तब भी सपा ने अपनी ये सीट बचा ली थी। इस सीट पर यादव परिवार का ही दबदबा रहा है। मैनपुरी की सीट से मुलायम के अलावा बलराम सिंह यादव, धर्मेंद्र यादव और तेज प्रताप सिंह यादव एक-एक बार जीते हैं।

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