अजब-गजब: ये है एमए, बीएड, टीईटी पास बेरोजगार चाट कॉर्नर

एमए, बीएड और टीईटी पास होकर भी इस शख्स को बेचने पड़ते हैं चाट पकौड़े

By: Mahendra Pratap

Published: 25 Apr 2018, 05:31 PM IST

लखनऊ. इन दिनों सोशल मीडिया पर एक चाट वाले की बहुत चर्चा है। चर्चा इसलिए क्योंकि बेरोजगारी से परेशान इन्होंने बहुत ही अनोखे नाम से अपने चाट कॉर्नर का बिजनेस शुरू किया है। इनके स्टॉल का नाम है 'एमए, बीएड, टीईटी पास बेरोजगार चाट कॉर्नर।' इस शख्स का नाम है निमिष गुप्ता और ये हरदोई के रहने वाले हैं। इनका बिजनेस है तो हरदोई में, लेकिन राजधानी लखनऊ में भी निमिष गुप्ता के चाट कॉर्नर की बहुत चर्चा है।

आर्थिक तंगी से परेशान निमिष ने इस तरह का बिजनेस शुरू किया। उन्होंने लखनऊ में युवाओं को रोजगार ? देने की बात कही थी लेकिन उम्मीदों के बजाय उन्हें सिर्फ लाठियां ही लाठियां मिलीं। ऐसे में हार मानकर चाट पकौड़ा बेचकर निमिष आपने परिवार का पेट पाल रहे हैं। उनकी परेशानी पर लखनऊ के करण खन्ना कहते हैं कि आज के जमाने में अच्छी नौकरी मिल पाना मुश्किल हो गया है। घर चलाने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा। लिहाजा युवा नौकरी कर पैसे कमाने के बजाय चाट पकौड़े का बिजनेस करता है। 4 लाख नौकरी देने का वादा करने वाली सरकार ने युवाओं के सपने पर पानी फेर दिया है।

ये है निमिष का दर्द

निमिष की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन एमए पास है। वे टीचर बनना चाहते हैं लेकिन सरकार की 'पकौड़ा बेचने' वाली जॉब ने इन्हें कहीं का नहीं छोड़ा। इन्होंने पकौड़े चाट बेचना जरूर शुरू कर दिया। अपने चाट स्टॉल का नाम इन्होंने रखा है 'एमए, बीएड, टीईटी पास बेरोजगार चाट कॉर्नर।'

निमिष जितने क्वालिफाइड हैं, उतने ही अपनी आर्थिक तंगी से परेशान भी। इसी के चलते पहले तो इन्होंने कई जगह नौकरी के लिए अप्लाई किया। जब कुछ नहीं हुआ और सरकार ने पकौड़ा बेचने का आईडिया दिया, तब निमिष ने चाट कॉर्नर बिजनेस शुरू किया।

युवाओं की परेशानी समझने में सरकार है नाकामयाब

सरकार की कूटनीति से परेशान निमिष का कहना है कि उन्हें और उनके जैसे युवाओं को रोजगार की बहुत जरूरत है। सरकार चाहे जो भी हो, लेकिन उन्हें इस ओर भी ध्यान देना चाहिए बजाय आश्वासन का झुनझुना पकड़ाने के।

लखनऊ में उठा चुके हैं आवाज

अपनी मांगो को पूरा करने और सरकार तक अपनी बात पहुंचाने के लिए निमिष ने लखनऊ में भी आवाज उठायी थी। लेकिन नवाबों की नगरी में उन्हें उम्मीदों की बजाय लाठियां मिलीं।

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