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ब्रेन स्ट्रोक का सबसे आसान इलाज, एक्सपर्ट ने बताए 3 तरीके

एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के रूप में जाना जाता है। एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक वाले रोगियों में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के कार्यात्मक परिणामों के प्रभाव पर किए गए अध्ययनों में से एक से पता चला है कि स्ट्रोक के ऐसे मरीजों में जिनमें बहुत कम समय में बड़े थक्के बने हैं,(Mechanical Thrombectomy) केवल मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के द्वारा ही 59.4% मरीजों में अनुकूल परिणाम देखे गए हैं।

लखनऊ

Published: November 02, 2021 08:25:00 pm

लखनऊ ,1 करोड़ 60 लाख मामलों के साथ, स्ट्रोक विश्वभर में मृत्यु का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है। और बड़े थक्के बनने के मामले 38 प्रतिशत तक एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बनते हैं। स्ट्रोक एक सामान्य शब्दावली है जो मस्तिष्क को पहुंची क्षति के कारण अचानक हुई तंत्रिका संबंधी गड़बड़ियों को इंगित करती है। यह इस बात का संकेत है कि मस्तिष्क की ओर रक्त की आपूर्ति नहीं हो रही है, इसका कारण धमनियों का रिसाव या रुकावट हो सकता है। मस्तिष्क की प्रमुख धमनियों में से एक में रुकावट के कारण मस्तिष्क के बड़े हिस्से में रक्त का प्रवाह कम हो जाता है।
ब्रेन स्ट्रोक का सबसे आसान इलाज, एक्सपर्ट ने बताए 3 तरीके
ब्रेन स्ट्रोक का सबसे आसान इलाज, एक्सपर्ट ने बताए 3 तरीके
इसे एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के रूप में जाना जाता है। एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक वाले रोगियों में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के कार्यात्मक परिणामों के प्रभाव पर किए गए अध्ययनों में से एक से पता चला है कि स्ट्रोक के ऐसे मरीजों में जिनमें बहुत कम समय में बड़े थक्के बने हैं, केवल मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के द्वारा ही 59.4% मरीजों में अनुकूल परिणाम देखे गए हैं।
लखनऊ स्थित मेदांता अस्पताल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ रोहित अग्रवाल ने कहा एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के एक तिहाई से अधिक मरीजों में लार्ज वेसल ऑक्ल्युज़न्स होते हैं, जिसके कारण उपचार के बाद भी बेहतर परिणाम प्राप्त नहीं होते थे। जिसका प्रभाव मरीजों, उनके परिवारों और पूरे समाज पर पड़ता था। लेकिन इंटरवेंशंस प्रक्रियाओं ने स्थिति बदल दी है। हालांकि, एक्यूट स्ट्रोक के मामलों में मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी से बहुत बेहतर परिणाम मिलते हैं और इसकी सफलता दर भी अच्छी है। यह एक प्रकार की मिनिमली इवेसिव प्रक्रिया है, जिसमें मरीज की धमनियों से थक्का निकालने के लिए विशेष उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। यह एक सरल प्रक्रिया जिसमें कलाई या उरूमूल क्षेत्र में छोटा चीरा लगाकर धमनी तक पहुंचा जाता है।

डॉ. अग्रवाल ने आगे बताते हुए कहा मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी (एमटी) की सफलता दर लगातार बढ़ती जा रही है। 2015 में यह बड़े थक्के के कारण होने वाले एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के उपचार (6 घंटे के भीतर) के लिए एक मानक विकल्प बन गया। और 2018 में एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के लक्षणों के उभरने के बाद इस तकनीक से उपचार का समय विस्तारित होकर 24 घंटे हो गया।
जहां तक मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी के परिणाम का संबंध है, यह शरीर के अग्रभाग में बनने वाले बड़े थक्कों के कारण होने वाले एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक में सर्वोत्तम कार्यात्मक परिणाम प्रदान करता है। एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक के लिए मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी उपकरणों पर नेशनल इंस्टीट्यूट फॉर हेल्थ एंड केयर एक्सीलेंस (एनआईसीई) द्वारा किए गए अध्ययनों में से एक में पाया गया है कि मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी में उपयोग किए जाने वाले नवीन उपकरण उन लोगों में रक्त के प्रवाह को बहाल करते हैं जिनका दवाईयों से उपचार करना संभव नहीं है। यह उन मरीजों के लिए भी इस्तेमाल की जाती है। दवाईयों से जिनका उपचार प्रभावी ढंग से नहीं हो पाता है। यह थेरेपी उन मरीजों के लिए कारगर है जिनके मस्तिष्क की एक या अधिक बड़ी धमनियों में रुकावट एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बन जाती है।
डॉ. अग्रवाल अपनी बात जारी रखते हुए कहते हैं। मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी में काफी कम समय लगता है। एक प्रशिक्षित चिकित्सक इसे लगभग एक घंटे में कर देता है। यह उन मरीजों के लिए बहुत अच्छी है, जिन्हें गंभीर एक्यूट इस्केमिक स्ट्रोक आया हो। इसमें खर्च भी कम आता है, अस्पताल में भी अधिक दिन नहीं रूकना होता है और पुनर्वास भी तुलनात्मक रूप से आसान होता है। मैकेनिकल थ्रोम्बेक्टोमी की व्यवहार्यता और सुरक्षा के बढ़ते प्रमाणों को देखते हुए। बच्चों में बड़े थक्कों के कारण होने वाले इस्केमिक स्ट्रोक के लिए इसका इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। इससे बेहतर परिणाम मिलें। इसके लिए जरूरी है कि लक्षणों की पहचान के तुरंत बाद इसे किया जाना चाहिए।

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