हमारा संवैधानिक संघीय ढांचा ‘अनेकता में एकता’ की है गारंटी- मुख्तार अब्बास नकवी

मुख्तार अब्बास नकवी 'जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाना' विषय पर अपने सम्बोधन में कहा कि संविधान संसद, विधानमंडल की शक्तियां और विशेषाधिकार को अनुच्छेद 105 में स्पष्ट करता है।

लखनऊ. लखनऊ में आयोजित कॉमनवेल्थ पार्लियामेंटरी एसोसिएशन इंडिया रीजन के 7वें सम्मेलन के दूसरे दिन आज शुक्रवार को केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी 'जन प्रतिनिधियों का ध्यान विधायी कार्यों की ओर बढ़ाना' विषय पर अपने सम्बोधन में कहा कि संविधान संसद, विधानमंडल की शक्तियां और विशेषाधिकार को अनुच्छेद 105 में स्पष्ट करता है। वहीं उससे पहले अनुच्छेद 51ए मूल कर्तव्यों की भी जिम्मेदारी देता है।

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि हमारा संवैधानिक संघीय ढांचा ‘अनेकता में एकता’ की गारंटी है। जिस तरह से मौलिक अधिकारों के सम्बन्ध में हम जागरूक रहते हैं, उसी तरह से मूल कर्तव्यों के प्रति भी हमें जिम्मेदारी समझनी होगी। नागरिकों के मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्यों के निर्वहन पर आधारित हैं क्योंकि अधिकार और कर्तव्य दोनों एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते। नागरिकों द्वारा राष्ट्र के प्रति कर्तव्यों को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है।

नकवी ने कहा कहा कि जीवन, स्वतंत्रता, समानता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से संबंधित मौलिक अधिकारों को बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, लेकिन नागरिकों जिनमें चुने प्रतिनिधि शामिल हैं, द्वारा राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को गंभीरता से लेने की जरुरत है। उन्होंने कहा कि कर्तव्यों और जिम्मेदारियों दोनों से पात्रता आती है।

Abhishek Gupta Desk/Reporting
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