सियासी दंगल में परिवार के दरकते रिश्तों को निहारते नेताजी

उत्तर प्रदेश की राजनीति के पर्याय मुलायम सिंह यादव यानी नेताजी लोकसभा चुनाव के परिदृश्य से एक तरह से गायब हैं...

By: Hariom Dwivedi

Updated: 14 Apr 2019, 04:36 PM IST

महेंद्र प्रताप सिंह
लखनऊ. उप्र की राजनीति के पर्याय मुलायम सिंह यादव यानी नेताजी लोकसभा चुनाव के परिदृश्य से एक तरह से गायब हैं। वह मैनपुरी से सपा उम्मीदवार तो हैं लेकिन, नामांकन के बाद वोट मांगने नहीं गए। सूबे में पहले चरण का मतदान 11 अप्रेल को है। मुलायम सपा के स्टार प्रचारक हैं। यह किसी रैली को संबोधित करने भी नहीं गए। चुनावी गहमागहमी में हर दल के नेता गर्मी में पसीना बहा रहे हैं। वहीं, मुलायम लखनऊ में अपनी पत्नी साधना के साथ टीवी पर समय गुजार रहे हैं।

समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव का परिवार देश का सबसे बड़ा सियासी कुनबा है। इस परिवार में प्रधान से लेकर सांसद और मंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक रह चुके हैं। अब तक हर चुनाव में पूरा परिवार सैफई में जुटता था। चुनाव जीतने की रणनीति बनती थी। सभी एक दूसरे की मदद करते थे। लेकिन, पहली बार सैफई में मुलायम के बंगले का आंगन सूना है। नेताजी अपने ही परिवार के दरकते रिश्तों के चक्रव्यूह में फंसे हैं। रिश्तेदार भी असमंजस में हैं। उन्हें नहीं सूझ रहा कि वे किसके प्रचार में जाएं और किसके नहीं। गांव वाले भी न तो अखिलेश को नाराज करना चाहते हैं न ही सपा से अलग हो चुके शिवपाल को। जज्बातों में घिरे मुलायम परिवार की इस कहानी केा देख रहे हैं वह खामोश हैं।

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अखिलेश और शिवपाल की लड़ाई में रिश्तेदार चुनावी बेला में निष्क्रिय हैं। कुछ नजदीकी रिश्तेदार और मैनपुरी के सांसद तेजप्रताप यादव मुलायम का चुनावी मोर्चा संभाले हैं। तेज मुलायम के बड़े भाई रतन सिंह के दिवंगत बेटे रणवीर सिंह के इकलौते बेटे हैं। पहले मुलायम के चुनाव प्रबंधन का काम शिवपाल के जिम्मे था। शिवपाल इस बार फिरोजाबाद में जूझ रहे हैं। जानने वाले जानते हैं कि मुलायम को चिंता अपनी जीत की नहीं, चिंता उन रिश्तों की है जो दरक चुके हैं।

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फिरोजाबाद में तो रिश्ते भी टूटे
मुलायम परिवार की ज्यादातर रिश्तेदारियां मैनपुरी, फिरोजाबाद और इटावा में हैं। फिरोजाबाद में शिवपाल और रामगोपाल के बेटे अक्षय यादव परिवार की गांठ हर मंच से खोल रहे हैं। एक दूसरे के प्रति घात-प्रतिघात जारी है। इस लड़ाई में परिवार भी बंट गया है। मुलायम के भतीजे सपा सांसद धर्मेंद्र की बहन और मैनपुरी की जिला पंचायत अध्यक्ष संध्या यादव फिरोजाबाद के भारौल में ब्याही हैं। परिवार की जंग से बचने के लिए इनके पति अनुजेश भाजपा में जा चुके हैं। धर्मेंद्र की दूसरे जीजा राजीव यादव की मां रामसिया फिरोजाबाद की जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुकी हैं। यहीं के सिरसागंज के विधायक हरिओम यादव के बड़े भाई रामप्रकाश यादव मैनपुरी से सांसद तेज प्रताप यादव के नाना हैं। यह दोनों ही रिश्तेदार अखिलेश और शिवपाल खेमे में बंट गए हैं। हरिओम शिवपाल के साथ हैं। तो अक्षय के साथ धर्मेद्र के कुछ रिश्तेदार हैं। कुछ तो निष्क्रिय हैं। कुछ ने भाजपा का साथ थाम लिया है।

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सियासत के धुरंधर की खामोशी
पिछले तीन दशक से उप्र में राजनीति बिना मुलायम के पूरी नहीं होती थी। सत्ता पक्ष हो या विपक्ष मुलायम राजनीति के पर्याय हुआ करते थे। कहा जाता था मुलायम वक्त को अपने माफिक करने में माहिर थे। लेकिन, सियासत के इस धुरंधर से समय रूठा है। रिश्तों को बनाने और निभाने के लिए मशहूर यह सूरमा अब अपना ही घर बिखरता हुआ देख रहा है। फिर भी जनता को उम्मीद है 'नेताजी' एक बार फिर नेताजी बनकर उभरेंगे।

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