‘तलाक’ होते ही ‘ईद’ की खुशी

चेहरों पर टिमटिमाती खिलखिलाहट चुपके से इशारा करती दिखी कि अब नर्क से आजादी के दिन हैं। जिल्लत बर्दाश्त नहीं करनी होगी।

By: आलोक पाण्डेय

Published: 22 Aug 2017, 05:35 PM IST

लखनऊ. तीन तलाक को सुप्रीमकोर्ट ने खारिज किया तो यूपी की महिलाओं के चेहरे खुशनुमा हो गए। चेहरों पर टिमटिमाती खिलखिलाहट चुपके से इशारा करती दिखी कि अब नर्क से आजादी के दिन हैं। जिल्लत बर्दाश्त नहीं करनी होगी। बराबरी का दर्जा सही मायनों में अब मिलेगा। सुप्रीम फैसले को तहेदिल से कबूल करते हुए मुस्लिम बिरादरी की महिलाओं ने कहाकि सच्चे मायनों में हिंदुस्तान की महिलाओं की ईद तो आज है। मुस्लिम अधिकारों के लिए जंग करने वाली इंकलाबी महिलाओं और घरेलू महिलाओं ने एकस्वर में कहाकि अब औरतों को पैर की जूती और जायदाद जैसा नहीं समझा जाएगा। उम्मीद जताई कि तय मियाद में देश की सरकार तीन तलाक पर सख्त प्रतिबंध तामील करते हुए बेहतरीन कानून बनाएगी।

अब महिलाओं की आवाज रोकने की हिम्मत नहीं

तीन तलाक के खिलाफ सुप्रीमकोर्ट के फैसले के बाद पुराने लखनऊ में जश्न का नजारा दिखा। तीन तलाक से पीडित महिलाओं के साथ-साथ टीनएजर्स ने भी खुशी का एजहार करते हुए कहाकि ङ्क्षजदगी का सबसे बड़ा खौफ कम हुआ है। मुस्लिम महिला लीग की जनरल सेक्रेटरी नाइस हसन ने कहा कि अब एक झटके में जिंदगी जर्रा-जर्रा नहीं होगी। नाइस हसन कहती हैं कि तीन तलाक का मुद्दा 1905 से बहस का विषय रहा है, लेकिन महिलाओं की सुनता कौन था इस देश में। अब वक्त बदल गया है कि महिलाओं की आवाज को दबाना मुमकिन नहीं है। नाइस हसन ने कहाकि अभी चुनौतियाँ और भी हैं। अब मुताह से लड़ाई लडऩी है। गौरतलब है कि मुताह एक तरह से वैश्यावृत्ति है, जिसमें अमीर शेख कुछ समय के लिए शादी करते हैं। हैदराबाद और मुंबई जैसी जगहों पर मुताह बड़ी समस्या है।

पीएम मोदी की फैन हुई मुस्लिम महिलाएं


तीन तलाक से पीडि़त महिलाओं ने इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आज तक किसी भी सरकार ने इस मुद्दे को नहीं उठाया था। मुस्लिम समाज के मौलानाओं ने अनैतिक क़ानून को अनदेखा किया। नरेंद्र मोदी ने तीन तलाक को गैर वाजिब बताया तो एक नई लड़ाई शुरू हुई और मुस्लिम महिलाओं को बराबरी का दर्जा हासिल करने का मौका मिला। ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अम्बर ने फैसले को दुरुस्त बताते हुए कहाकि आज का दिन मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन है। यह नर्क से आजादी और ईद का दिन है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तीन तलाक पर कानून बनाने के साथ ही केंद्र सरकार नए शरिया निकाहनामे को कानूनी जामा पहनाएगी।

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आलोक पाण्डेय
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