मुस्लिम महिलाएं बोली-हमें आज मिली आजादी

सर्वोच्च न्यायालय के फैसले से खुश हैं मुस्लिम महिलाएं, कहीं-संसद ऐसा कानून बनाए की तलाक देने वालों को सबक मिल जाए।

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Published: 22 Aug 2017, 09:20 PM IST

गोण्डा. सर्वोच्च न्यायालय द्वारा तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिए जाने के बाद मुस्लिम महिलाएं काफी खुश हैं। फैसला आने के बाद शहर के विभिन्न मोहल्लों में महिलाओं ने सड़क पर निकल कर एक-दूसरे को गले लगाकर मिठाई खिलाया। फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कोर्ट के आदेश के क्रम में संसद जल्द कड़ा से कड़ा कानून बनाए ताकि तलाक देने वालों को सौ बार सोचना पड़े।
मुख्यालय के राधाकुण्ड निवासिनी समाज सेविका सोनी सिंह ने कहा कि कोर्ट का फैसला आते ही तमाम मुस्लिम महिला बहने आकर मिलीं और कोर्ट के फैसले का स्वागत किया। वे इतना गदगद थीं कि एक दूसरे को गले लगाकर मिठाइयां खिलाईं। समाज सेविका ने कहा कि वह भी महिला हैं, हम भी महिला, उनके दर्द हम बखूबी से समझती थीं। फैसला स्वागत योग्य है।

राधाकुण्ड की निवासिनी रूबी खान ने कहा कि हमारा देश तो 1947 में आजाद हुआ था फिर भी इस आजाद भारत में मुस्लिम महिलाओं को आजादी नहीं मिली थी। हम लोगों के आजादी का दिन आज है। हम लोग फैसले का स्वागत करते हुए जश्न को आजादी मना रहें है। हमारी मांग है कि संसद कोर्ट द्वारा तय समय सीमा के अन्दर कानून बनाकर पारित कर दे। कहा कि मुल्ला मौलवियो की धर्म के नाम पर चल रही दुकान बन्द हो जाएगी। एलबीएसपीजी कालेज की छात्रा शबनम ने कहा कि कोर्ट के फैसले का हम स्वागत करते हैं। मुस्लिम महिलाओं को अब कोर्ट ने आजाादी दिलाई। तलाक होने से गरीब मुस्लिम महिलाओं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। अब संसद ऐसा कानून बनाए की तीन तलाक की बात ये धर्मगुरु भूल जाएं और हमेशा के धर्म के नाम पर चलने वाली दुकान बन्द हो जाए।

पटेल नगर निवासी निशा ने कहा कि तलाक रूपी अत्याचार को हमारी बहनें बर्दास्त कर रही थीं। इस बात का डर उन्हें हमेशा सताये रखता था कि उन्हें कब तलाक देकर बेगाना कर दिया जाए। इस बात की कोई गारन्टी नहीं है, लेकिन न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाकर हम लोगों को एक बार फिर से आजादी दिला दी है।

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