'हम पंक्षी एक डाल के' कला प्रदर्शनी का नवनीत सहगल ने किया उद्घाटन

'हम पंक्षी एक डाल के' कला प्रदर्शनी का नवनीत सहगल ने किया उद्घाटन

Karishma Lalwani | Publish: Apr, 17 2019 05:01:57 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

हम पंक्षी एक डाल के चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन लखनऊ में किया गया

लखनऊ. परमेश्वर स्वयं फलक है। स्वयं तूलिका हैं स्वयं चित्रकार है। स्वयं दृश्टा है। विश्व चित्र को चित्रत कर, स्वयं उसे देखकर प्रसन्न होता है। समस्त प्रकृति उसका मनोरम चित्र है। इस भावना से प्रेरित होकर कलाकारों ने ‘‘हम पंक्षी एक डाल के’’चित्रकला प्रदर्शनी का आयोजन में किया गया। प्रदर्शनी 15 अप्रैल- 21 अप्रेल तक रहेगी। प्रदर्शित चित्रों में उनकी अज्ञात सृजनशील सम्भावनाओं के मृदुल स्वरों का गुंजन स्पश्ट सुनाई देता है, जो कमल की पंखुड़ियों पर उषाकालीन आभा में झिलमिलाते ओस कणों की भांति सुन्दर है।

नवनीत सहगल ने किया उद्घाटन

‘‘हम पंक्षी एक डाल के’’चित्रकला प्रदर्शनी का उद्घाटन नवनीत सहगल (प्रमुख सचिव, खादी ग्रामोद्योग, रेषम, हथकरधा एवं वस्त्रोद्योग) ने दीप प्रज्ज्वलित करते हुए किया। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की संस्कृति के स्तर का माप उसकी कला द्वारा होता है। कला संस्कृति का श्रंगार है। उन्होंने कुशल कला समीक्षक के रूप में प्रदशनी के चित्रों का सहृदयतापूर्वक निरीक्षण किया। उन्होंने चित्रों की परिकल्पना के विशय में आनन्द ऋचा व मीनाक्षी से पूछा भी और अपनी सद्भावना एवं प्रोत्साहनरूपी टिप्पणी के स्ट्रोक्स से उनकी कला संवेदना को जीवांत भी किया। कला अपनी सहज, पूर्ण और मुक्त लवलीनता में आनन्द का अनुभव कराती है। कला अपनी सम्पूर्ण दृश्टि के कारण सत् और असत् दोनों को स्वीकार करती है और उनके छोरो को गहराई, ऊचांई व सारे फैलाव में छूती है। कला सौंदर्य की अभिव्यक्ति है। कलाकारों का रचानात्मक आवेग प्रदर्शित चित्रों में प्रस्फुटित का आतुर परिलक्षित होता है।

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