पहली बार आराधना को नहीं पहुंचे श्रद्धालु, पुजारियों ने किया तिलक-भाल

-हर मंदिर में मां का दरबार सूना, नहीं लग रहे जयकारे
-पुजारी-पंडों के साथ प्रसाद विक्रेता और दुकानदार निराश
- पहली बार भक्तों के लिए बंद हुआ देवीपाटन मंदिर
- देवी भक्तों के बिना सूना रहा मां ललिता देवी मंदिर
- विंध्याचल मंदिर : श्रृंगार-आरती के बाद कपाट बंद

पत्रिका लाइव
लखनऊ. पूर्वी उत्तर प्रदेश में मां नवदुर्गा की तीन प्रमुख मंदिर हैं। मां ललिता देवी मंदिर, नैमिषारण्य, सीतापुर, देवीपाटन मंदिर, गोंडा और विंध्याचल धाम, मिर्जापुर। मान्यता है कि इन क्षेत्रों में मां पार्वती के अंगों के अवशेष गिरे थे। इसी मान्यता के चलते सदियों से इन मंदिरों में मां के दर्शन के लिए हर रोज लाखों की भीड़ उमड़ती हैं। लेकिन, ज्ञात इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोरोना वायरस के कारण इन मंदिरों में भक्त नहीं दिख रहे। चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां की आराधना के लिए घट स्थापना की जाती है। घट स्थापना के दिन मां के दर्शन के लिए भोर से ही भक्तों की भारी भीड़ जमा हो जाती है। लेकिन, प्रकृति का प्रकोप देखिए। इस बार मां को भक्तों का इंतजार है। पुजारियों ने मंदिरों के कपाट खोले। पूजन-अर्चन की प्रक्रिया शुरू हुई। घट स्थापना के बाद पुजारियों ने ही मां का तिलक भाल किया और जगत जननी से विश्व कल्याण की मंगल कामना की। हर मंदिर में मां का दरबार सूना है। कहीं कोई जयकारे नहीं लग रहे। पुजारी-पंडों के साथ प्रसाद विक्रेता और दुकानदार भी निराश हैं। आइए जानते हैं बिन भक्तों के कैसे हो रही है मां की आराधना।

विंध्याचल मंदिर : श्रृंगार-आरती के बाद कपाट बंद
कोरोना के खौफ में विंध्याचल मंदिर बंद है, भक्त नदारद हैं। पुलिस का कड़ा पहरा है। नवरात्र के पहले दिन मां विंध्यवासनी का श्रृंगार आरती कर मंदिर को बंद कर दिया गया। मंदिर आने-जाने वाले रास्तों को भी पूरी तरह से सील कर दिया गया। पुलिस और विंध्य पंडा समाज की सहमति से सिर्फ सात लोग मंदिर में आरती और श्रृंगार के लिए आ सकते हैं। इससे पहले नवरात्र में विंध्याचल मंदिर में हर रोज देश के विभिन्न भागों से लाखों की संख्या में भक्त उमड़ते थे। पुजारी राजन पंडा ने बताया कि कोरोना वायरस के चलते मंदिर बंद है, लेकिन भक्त घर पर ही कलश-पूजन और मां का पूजन कर सकते हैं।

पहली बार भक्तों के लिए बंद हुआ देवीपाटन मंदिर
भारत-नेपाल सीमा पर स्थित देश की 51 शक्तिपीठों में से एक प्राचीन देवीपाटन शक्तिपीठ मंदिर चैत्र नवरात्र में सूना पड़ा है। पूजा-अर्चना के बाद मंदिर बंद कर दिया गया। ऐसा पहली बार है, जब भक्तों के लिए मंदिर के कपाट बंद हुए हैं। हर वर्ष नवरात्र पर यहां बड़ी संख्या में देश-विदेश से श्रद्धालु आते थे। महंत मिथिलेश नाथ योगी का कहना है कि कोरोना का संक्रमण भीड़भाड़ वाले स्थानों पर तेजी से फैलता है। इसी को ध्यान में रखते हुए शक्ति पीठ को 31 मार्च तक के लिए बंद कर दिया गया है। मंदिर के अंदर पूजा और आरती विधि विधान के साथ होती रहेगी।

देवी भक्तों के बिना सूना मां ललिता देवी मंदिर
88 हजार ऋषियों की तपोभूमि नैमिषारण्य स्थित मां ललिता देवी मंदिर में नवरात्र के पहले दिन मंदिरों के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद रहे। मंदिर में सिर्फ पुजारी ने ही माता ललिता की पूजा-अर्चना की। नवरात्र पर ललिता देवी मंदिर में जहां लाखों श्रद्धालु माता के दर्शन करते थे, वहीं इस बार कोई नहीं पहुंच सका। मंदिर के पुजारी ने ही मां ललिता देवी की पूजा-अर्चना की। देवी भक्तों के बिना मां ललिता देवी का मंदिर सूना रहा।

Hariom Dwivedi
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