नवरात्र का पहला दिन माता शैलपुत्री को इस मंत्र के जप से करें खुश

( Shardiya Navratri shailputri) कलश शुभ मुहूर्त और माता शैलपुत्री का प्रभावशाली मंत्र

By: Ritesh Singh

Published: 16 Oct 2020, 09:51 PM IST

लखनऊ ,पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि माता रानी के पहले रूप की स्तुति नीचे लिखे मंत्रो के साथ करे। शनिवार को सुबह 6 बजकर 10 मिनट के बाद शुभ मुहूर्त में कलश स्थापित करें।

शुभ मुहूर्त

घट स्थापना मुहूर्त - 6-10 सुबह से 9-4 सुबह
अवधि - 2 घण्टे 56 मिनट्स - राहु काल 9- 4 सुबह से 10-32 सुबह
घटस्थापना अभिजित मुहूर्त - 11-36 सुबह से 12-22 दिन
अवधि - 00 घण्टे - 47 मिनट

नौ दिनों तक अलग-अलग माताओं की विभिन्न पूजा उपचारों से पूजन, अखंड दीप साधना, व्रत उपवास, दुर्गा सप्तशती व नवार्ण मंत्र का जाप करें।

( shailputri) कथा का महत्व

पंडित शक्ति मिश्रा ने कहाकि शैलपुत्री ( पर्वत की बेटी ) वह पर्वत हिमालय की बेटी है और नौ दुर्गा में पहली रूप है । पिछले जन्म में वह राजा दक्ष की पुत्री थी। इस जन्म में उसका नाम सती-भवानी था और भगवान शिव की पत्नी । उन्होंने बतायाकि एक बार दक्षा ने भगवान शिव को आमंत्रित किए बिना एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया था देवी सती वहा पहुँच गयी और तर्क करने लगी। उनके पिता ने उनके पति (भगवान शिव) का अपमान जारी रखा था ,सती भगवान् का अपमान सहन नहीं कर पाती और अपने आप को यज्ञ की आग में भस्म कर दी। दूसरे जन्म वह हिमालय की बेटी पार्वती- हेमावती के रूप में जन्म लेती है और भगवान शिव से विवाह करती है।

( shailputri) मंत्र जप 108

शैलपुत्री : ह्रीं शिवायै नम:

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