एनबीआरआई ने बनायी एडिबल कटलरी, भोजन के बाद आइसक्रीम कोन की तरह खा जाइए थाली, चम्मच और गिलास

- सूप, दूध या जूस पीने के बाद गिलास भी चबा जाइए

- इनर्जी बूस्टअप करने वाले और इम्यूनिटी बढ़ाने वाले हैं बर्तन

- ऐसी प्लास्टिक जो पानी में घुल जाएगी

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
लखनऊ. राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआइ) ने प्राकृतिक गोंद से तैयार पानी में घुलने वाली बायो प्लास्टिक के बाद अब डिस्पोजेबिल कटलरी बनायी है। आइसक्रीम सॉफ्टी कोन की तरह भोजन के बाद थाली, चम्मच या गिलास को खाया या चबाया जा सकता है। वनस्पति से तैयार यह बर्तन एनर्जी बूस्टअप का भी काम करेगा। साथ ही इम्यूनिटी भी बढ़ाएगा।

कोरोना काल में हर इंसान अपनी इम्यूनिटी को लेकर चिंतित है। साफ-सफाई और स्वच्छता की फिक्र अलग है। ऐसे में एनबीआरआइ के फाइटोकेमेस्ट्री विभाग ने ऐसी कटलरी तैयार की है जिसमें भोजन करने, दूध, पानी या चाय पीने के बाद उसे खाया जा सकता है। इडबिल कटलरी को विकसित करने वाली वैज्ञानिक डॉ.मंजूषा श्रीवास्तव के मुताबिक इन बर्तनों के निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल ऐसा है जिसे हम-आप भोजन के रूप में इस्तेमाल करते हैं। इसीलिए इसे 'एडिबल कटलरी' नाम दिया गया है। इसे प्राकृतिक रूप से शरीर की इम्यूनिटी बढ़ाने वाले तत्वों और मसालों के इस्तेमाल से तैयार किया गया है। यह प्राकृतिक गोंद और अनाज से मिलने वाले ग्लेटिन जैसे कई पदार्थो से निर्मित है। यह बायो प्लास्टिक के आगे का प्रोडॅक्ट है जिसे खाने लायक बनाया गया है।

यहां हो सकता है उपयोग

इडबिल कटलरी का प्रयोग आइसक्रीम इंडस्ट्री और मिठाई पैकिंग में हो सकता है। इडबिल बोतल में छह-सात घंटे पानी स्टोरेज हो सकता है। तेल 20 से 21 दिन तक सुरक्षित रखा जा सकता है। सूप और दूध पीने के बाद इसे खा सकते हैं। चम्मच, बाउल को चबा सकते हैं। यह स्वादिष्ट और पुष्टिकारक है।

सस्ता और मजबूत

यह बर्तन प्लास्टिक के विकल्प बगास (गन्ने की खोई) और एरिका पाम की कटलरी के मुकाबले बेहद सस्ते, टिकाऊ और मजबूत हैं। निर्माण में प्रयुक्त कच्चा माल हर जगह 50-60 रुपए किलो के हिसाब से मिल जाता है। प्रौद्योगिकी इतनी आसान है कि इसे बिना किसी खास मशीनों के भी तैयार कर सकते हैं। एनबीआरआइ इसका जल्द ही पेटेंट करवाएगा ताकि बिक्री के लिए इडबिल कटलरी उपलब्ध हो सके।

बना चुकी हैं पानी में घुलने वाली प्लास्टिक

इसके पहले डॉ. मंजूषा श्रीवास्तव की टीम प्राकृतिक गोंद से तैयार इकोफ्रेंडली बायोप्लास्टिक बना चुकी हैं। इसका पेटेंट जल्द मिलने वाला है। पेड़ के गोंद से बनी यह ऐसी बायोप्लास्टिक है, जो इकोफ्रेंडली है। 20 दिन में कंपोस्ट बन जाती है। मिट्टी में मिलने के बाद उसकी पोषक शक्ति बढ़ाती है। पानी में भी घुलनशील है। शोध टीम में डॉ. मंजूषा के साथ अंकिता मिश्रा, डॉ. शरद श्रीवास्तव, डॉ. अजय कुमार सिंह रावत शामिल थे।

यहां हो सकता है उपयोग

बायोप्लास्टिक पारदर्शी और अपारदर्शी के साथ ही विभिन्न रंगों में भी बन सकती है। इसका प्रयोग पैकेजिंग, लेमिनेशन, खाद्य सामग्री की पैकिंग, मेडिसिन, टेक्सटाइल और पेपर इंडस्ट्री में हो सकता है। फलों की कोटिंग के लिए यह पूर्ण सुरक्षित है। कैरी बैग भी बन सकते हैं। फार्मा इंडस्ट्री में कैप्सूल के कवर के लिए 100 फीसद सुरक्षित है।

coronavirus कोरोना वायरस
नितिन श्रीवास्तव
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