योगी सरकार का बड़ा फैसला: मदरसों में पढ़ाई जाएंगी एनसीईआरटी की किताबें

योगी सरकार का बड़ा फैसला: मदरसों में पढ़ाई जाएंगी एनसीईआरटी की किताबें
Madarsa School

Shatrudhan Gupta | Updated: 30 Oct 2017, 08:24:38 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

आधुनिक विषयों के साथ स्कूलों के संग बराबरी कर पाएंगे। आलिया स्तर पर गणित और साइंस अनिवार्य होगी।

लखनऊ. अब प्रदेश के मदरसों में एनसीईआरटी (शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद) की किताबें पढ़ाई जाएंगी। इसकी मंजूरी प्रदेश की योगी सरकार ने दे दी है। साथ ही इस संबंध में मदरसा बोर्ड को निर्देश जारी कर दिए गए हैं। हालांकि, धर्म की शिक्षा में कोई बदलावा नहीं किया जाएगा। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने बताया कि मदरसों में एनसीईआरटी की किताबों से पढ़ाई होगी। उन्होंने कहा कि आधुनिक विषयों के साथ स्कूलों के संग बराबरी कर पाएंगे। आलिया स्तर पर गणित और साइंस अनिवार्य होगी। उन्होंने कहा कि राज्य मदरसा बोर्ड विद्यार्थियों को सीबीएससी स्कूलों में पढ़ाए जा रहे एनसीईआरटी कोर्स के तहत चयनित किताबों को पढ़ाये जाने की तैयारी शुरू कर दी है। शर्मा ने कहा कि सरकार ने मदरसों में जारी धर्म की शिक्षा में कोई बदलाव नहीं किया है, लेकिन मदरसों के छात्रों को आधुनिक शिक्षा भी उपलब्ध हो, उसके लिए सरकार ने यह फैसला लिया है।

कमेटी ने सौंपी रिपोर्ट

डिप्टी सीएम शर्मा ने कहा कि मदरसा स्कूलों में गणित तथा विज्ञान की पढ़ाई को अनिवार्य किए जाने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने बताया कि एनसीईआरटी की जो किताबें मदरसों में लागू की जाएंगी, वो उर्दू में होंगी। इन किताबों में विज्ञान, अंग्रेजी और गणित की किताबों को अभी शामिल किया गया है। बताते चलें कि उत्तर प्रदेश के दो हजार से ज्यादा सरकारी मदरसों में एनसीईआरटी की किताबें पढ़ाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि प्रदेश के मदरसों में उच्चस्तर की पढ़ाई की जाएगी। उन्होंने बताया कि सरकार ने मदरसों में पाठ्यक्रम को सुधारने के लिए एक 40 सदस्यीय समिति बनाई थी। समिति ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार सरकार पढ़ाई के स्तर को सुधारने के लिए स्कूलों में हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान अनिवार्य कर सकती है।

फर्जीवाड़ा रोकने शुरू की गई थी वेबसाइट

मालूम हो कि इससे पहले उत्तर प्रदेश सरकार ने मदरसों के फर्जीवाड़े पर रोकथाम लगाने के लिए मरदसा पोर्टल की शुरुआत की थी। इस पोर्टल में प्रदेश के सभी मदरसों को 15 अक्तूबर तक शिक्षकों और मदरसे से जुड़ी अन्य जानकारियों को अपलोड करना था। डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने बताया कि प्रदेश के करीब 16 हजार मदरसों ने खुद अपनी जानकारी पोर्टल पर उपलब्ध कराई है।

प्रदेश में 19 हजार मदरसे हैं

मालूम हो कि उत्तर प्रदेश में वर्तमान में लगभग 19 हजार मदरसे हैं। प्रदेश सरकार द्वारा मिलने वाली सहायता राशि और शिक्षकों के वेतन का भुगतान अब रजिस्टर्ड मरदसों और उनके शिक्षकों को ही मिल सकेगा। बताते चलें कि प्र्रदेश सरकार ने 2017-18 के लिए राज्य के बजट में अल्पसंख्यक कल्याण के लिए लगभग 1700 करोड़ रुपए आवंटित किए थे। मान्यता प्राप्त मदरसों और प्राथमिक विद्यालयों में आधुनिक शिक्षा देने के लिए सरकार ने 394 करोड़ की राशि मंजूरी दी है। शिक्षा विभाग द्वारा मानकों का पालन नहीं किए जाने के कारण सरकार ने सितंबर में राज्य के 46 मदरसों को अनुदान दिए जाने पर रोक लगा दी थी।

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