सफर का संकट, यहां यूटिलिटी की जरूरत सिमटी

302 किलोमीटर के दायरे में एक भी शौचालय नहीं

By: Dikshant Sharma

Published: 04 Jan 2018, 11:30 AM IST


लखनऊ. 302 किलोमीटर लम्बे लखनऊ - आगरा एक्सप्रेस वे अक्सर सुर्ख़ियों में रहा है। ये वही एक्सप्रेसवे है जिस पर पूर्व में सपा सरकार और फिर वर्त्तमान में भाजपा सरकार ने फाइटर जेट उतार शक्ति प्रदर्शन किया था। लखनऊ से देश की राजधानी दिल्ली तक का सफर भी 10 घंटे से घट कर 5 घंटे का हो गया। लेकिन अगर आप इस एक्सप्रेसवे पर सफर करने की सोच रहे हैं तो गाडी में पेट्रोल फुल करा लें और साथ ही अपनी ज़रुरत का सामान भी रख लें, क्यूंकि एक बार आप इस एक्सप्रेसवे पर चढ़ गए तो आपकी यूटिलिटी से जुड़ा कोई भी सामान यहां नहीं मिलेगा। साथ ही प्रदेश का गौरव कहलाए जाने वाले इस एक्सप्रेसवे पर आपको खुले में शर्मिंदा भी होना पड़ेगा।

302 किलोमीटर के दायरे में एक भी शौचालय नहीं
इतने लम्बे सफर के दौरान शौच करने के लिए आपको शर्मिंदा होना पड़ेगा। दरअसल पूरे रुट एक भी शौचालय नहीं बना है। खुले आसमान के नीचे, खुले में शौच मुक्त भारत का सपना देखते हुए आपको उसे खुद ही तोडना पड़ेगा। पुरुषों के लिए तो एक बार फिर सही पर महिला यात्रियों के लिए समस्या अधिक है।

'हवा' खाकर चलाना होगा काम
अगर आप एक बार एक्सप्रेसवे चढ़ गए तो फिर आपको खाने पीने के लिए घंटों इंतज़ार करना होगा। पूरे रुट पर न ही कोई होटल और न ही कोई ढाबा मिलेगा। पानी की बोतल हो या चिप्स इसकी व्यवस्था आपको खुद घर से चलते वक़्त ही करनी पड़ेगी।

गाडी में छोटी सी खराबी और घंटो इंतज़ार
चलिए बाकी व्यवस्था कर भी लें लेकिन अगर अपकी गाडी ने धोका दिया तो सफर का मज़ा किरकिरा होना निश्चित है। पूरे हाईवे पर न तो पंचर की दुकान है और न ही कोई मैकेनिक। अगर ऐसे में आपकी गाडी खराब हो जाती है तो आपको एक्सप्रेसवे से सटे जिलों में जाकर मैकेनिक तलाशना पड़ेगा। ख़ास बात ये रहेगी कि इस दौरान आपको एक्सप्रेसवे पर कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट भी नहीं दिखेगा जिसका सहारा लिया जा सके। यानी छोटी सी समस्या भी आपको घंटों लेट कर सकती है।

मेडिकल फैसिलिटी भी नहीं
यदि गाडी में सवार किसी यात्री की तबियत अचानक बिगड़ जाती है तो इसके लिए भी आपको एक्सप्रेसवे से उतर कर आस पास के जिले में हॉस्पिटल तलाशना पड़ेगा। किसी प्रकार का सड़क हादसा होने पर इमरजेंसी नंबर पर कॉल करने पर भी एम्बुलेंस इन जिलों से ही आएगी और वहीं वापस लजाएगी।

पुलिस पेट्रोलिंग भी सुस्त
शुरुआती दौर में हर कुछ किलोमीटर पर यूपी 100 की गाड़ियां तैनात दिखती थी लेकिन अब नहीं। कई बार पूरे रास्ते आपको बड़े शहरों को पार करते वक्त एक आद गाडी दिख जाए तो वे भी बहुत होगा। यही कारण है कि एक्सप्रेसवे पर डकैती और तेज रफ़्तार के कारण असिडेंट के मामले संज्ञान में आते हैं।

ऐसी होनी चाहिए सुविधाएं
- जगह जगह हो सुविधा केंद्र
- मेडिकल, रेस्ट्रॉन्ट और टॉयलेट्स की व्यवस्था
- हर निर्धारित स्थान पर पुलिस चेक पोस्ट
- एक्सप्रेसवे के लिए डेडिकेटेड एमर्जेन्सी नंबर / सेवा

Dikshant Sharma
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