यूपी में अल्पसंख्यक विकास के लिए केंद्र की स्कीम का सिर्फ 10 प्रतिशत खर्च, सांसदों ने जताई नाराजगी

उत्तर प्रदेश में कई जिलों के सांसदों ने योगी सरकार पर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। सांसदों का कहना है कि यूपी सरकार ने अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए दिए गए 16,207 लाख में से सिर्फ 10 फीसदी ही खर्च किया है।

By: Karishma Lalwani

Updated: 20 Sep 2020, 09:31 AM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कई जिलों के सांसदों ने योगी सरकार पर अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया है। सांसदों का कहना है कि यूपी सरकार ने अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्रों के विकास के लिए दिए गए 16,207 लाख में से सिर्फ 10 फीसदी ही खर्च किया है। जबकि यह पैसा केंद्र सरकार की ओर से प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (PMJVK) के तहत यूपी की योगी सरकार को दिया गया था। इन पैसों से राज्य सरकार को अल्पसंख्यक क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर विकास कार्य कराना था। लेकिन इतने कम खर्च में कुछ खास बदलाव नहीं है। एक रिपोर्ट के अनुसार, इससे पहले समाजवादी पार्टी की सरकार में 62 प्रतिशत खर्च किया गया था।यूपी के अमरोहा, मुरादाबाद और कई जिलों के सांसदों ने अखबार से कहा कि 'पैसे का कम इस्तेमाल यूपी सरकार का मुस्लिम समुदाय की तरफ भेदभाव दिखाता है।'

बिना भेदभाव करें फंड का पूरा इस्तेमाल

अल्पसंख्यक क्षेत्रों में कम खर्च पर सांसदों ने चिंता जाहिर की है। अमरोहा के सांसद दानिश अली ने कहा कि मुस्लिम इलाकों में बुनियादी प्राथमिक देखभाल के लिए अस्पताल बनाने तक का फंड नहीं है। अली ने कहा, "जब केंद्र पैसा जारी कर रहा है तो राज्य सरकार क्यों रोक रही है? यूपी सरकार को बिना किसी भेदभाव के फंड का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए।" मुरादाबाद सांसद एसटी हसन ने भी इसे गलत बताया है। उन्होंने कहा कि फंड की कमी मुस्लिमों में नाराजगी बढ़ाएगी। केंद्र और राज्य सरकार को फंड की पूरी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

फंड के इस्तेमाल की नहीं जानकारी

इस मामले पर यूपी सरकार के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें फंड के कम इस्तेमाल के बारे में नहीं पता था। अधिकारियों ने कहा कि वो 'केंद्र की स्कीमों को राज्य में लागू करने वाली संस्थाओं में व्याप्त भ्रष्टाचार' को कम करने की व्यवस्था कर रहे हैं।

कब कितना खर्च

2016-17 में यूपी ने 14,364 लाख में से 39 प्रतिशत खर्च किए। वहीं, 2017-18 में 15,182 लाख में से 40 प्रतिशत खर्च हुए और 2018-19 में 37,653 लाख में से सिर्फ 31 प्रतिशत ही खर्च किए गए।

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