यूपी की इन हस्तियों को किया जाएगा पद्मश्री से सम्मानित

यूपी की इन हस्तियों को किया जाएगा पद्मश्री से सम्मानित
Padma Awards

Abhishek Gupta | Publish: Jan, 25 2018 10:48:04 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

यूपी की भी तीन हस्तियों को सम्मानित किया जाएगा।

लखनऊ. गुरुवार को गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्‍या पर पद्मश्री पुरस्‍कारों की घोषणा कर दी गई जिसमें 3 को पद्म विभूषण, 9 को पद्मभूषण और 73 को पद्मश्री से सम्‍मानित किया गया है। इस तरह इस बार 85 हस्‍तियों को पद्म पुरस्‍कारों से सम्‍मानित किया जाएगा। विभिन्‍न क्षेत्रों में बेहतर काम करने और सेवा देने वालों को पद्मश्री पुरस्‍कार से सम्‍मानित किया जाता है। केंद्र सरकार द्वारा जारी की गई सूची में यूपी की भी तीन हस्तियों के नाम शामिल हैं, जिन्हें जल्दी ही सम्मानित किया जाएगा। इनके नाम मोहन स्वरूप, अनवर जलालपुरी और भगीरथ प्रसाद त्रिपाठी हैं। लिटरेचर और एजुकेशन फील्ड में यूपी को दो अवार्ड्स मिले हैं, वहीं आर्ट फील्ड में एक एवार्ड मरणोपरांत अनवर जलालपुरी के नाम किया गया है।

पद्म विभूषण और पद्म भूषण सम्मान से चूका यूपी-

यूपी में पद्म विभूषण और पद्म भूषण इस बार किसी को नहीं मिला है। ऐसा पहली बार हुआ कि यूपी को साइंस और मेडिसिन की फील्ड में अवार्ड नहीं मिला है, जबकि लखनऊ में सीडीआरआई, एनबीआरआई, सीमैप आईटीआरसी जैसी संस्थाएं हैं। यहां रिसर्च की वजह से इस फील्ड में पुरस्कार मिलते रहे हैं।

लखनऊ के अनवर जलालपुरी मुशायरों की जान-

अनवर जलालपुरी लखनऊ के मशहूर उर्दू कवि हैं। उन्होंने भगवत गीता के करीब 700 श्लोकों को संस्कृत से उर्दू में अनुवाद किए थे। मुशायरों की जान माने जाने वाले जलालपुरी ने 'राहरौ से रहनुमा तक', 'उर्दू शायरी में गीतांजलि' तथा भगवद्गीता के उर्दू संस्करण 'उर्दू शायरी में गीता' पुस्तकें लिखीं जिन्हें बेहद सराहा गया था। उन्होंने 'अकबर द ग्रेट' धारावाहिक के संवाद भी लिखे थे। अनवर यूपी मदरसा के पूर्व चेयरमैन भी रह चुके हैं। 2 जनवरी, 2018 को उन्होंने अंतिम सास ली थी। 5 अप्रैल को दिल्ली में भव्य समारोह के दौरान राष्ट्रपति अनवर जलालपुरी के परिवार को सम्मानित करेंगे। अनवर जलालपुरी की पत्नी व बच्चे समारोह में आमंत्रित किये गए हैं। वहीं हेल्प योर एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट अनवर जलालपुरी की उर्दू शायरी में लिखी गीता पर अल्बम तैयार कर रही है।

भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी 'बीपीटी' नाम से हैं मशहूर-

वृंदावन और बनारस में अध्ययन करने के बाद भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ने 1959 में संस्कृत व्याख्याता के रूप में टीकमणि संस्कृत महाविद्यालय, वाराणसी में कार्य किया। जल्दी ही इनके कार्य देखते हुए इन्हें 1970 मे संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में व्याख्याता और फिर निदेशक पद पर चयन हो गया। इस माननीय शैक्षणिक पद पर ये तीन दशक तक रहे। वर्ष 2014-15 के लिए यश भारती सम्मान पाने वाले भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’ अपने चाहने वालों के बीच बीपीटी के नाम से जाने जाते हैं। लगभग 30 वर्ष तक संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को अपनी सेवा देने वाले आचार्य वागीश शास्त्री को 1982 में ही काशी पंडित परिषद की ओर से 'महामहोपाध्याय' की पदवी दी गई थी। उन्होंने 40 से अधिक पुस्तकें लिखीं हैं और 300 से ज्यादा पांडुलिपियों का संपादन किया है। काशी परंपरा के संस्कृत के विद्वान डॉ॰ वागीश शास्त्री को साल 2013 में संस्कृत साहित्य में योगदान के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार से नवाजा गया था।

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