बेरोजगारी में बेंगलुरु नम्बर वन, हैदराबाद दूसरे स्थान पर, लखनऊ में गनीमत

बेरोजगारी में बेंगलुरु नम्बर वन, हैदराबाद दूसरे स्थान पर, लखनऊ में गनीमत

Mahendra Pratap | Publish: Mar, 14 2018 02:13:28 PM (IST) | Updated: Mar, 14 2018 02:16:34 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

देशभर में लाखों युवा नौकरी की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं। सरकार की तमाम कोशिशओं के बावजूद देश में कई बेरोजगार बैठे हैं

लखनऊ. देशभर में लाखों युवा नौकरी की तलाश में इधर उधर भटक रहे हैं। केंद्र सरकार की तमाम कोशिशओं के बावजूद देश में कई युवा बेरोजगार बैठे हैं। उन्हें मनचाही नौकरी नहीं मिल रही है। 'यूथ फॉर वर्क' रिपोर्ट के मुताबिक देश में 35 फीसदी युवाओं के पास नौकरी नहीं है। इसमें बेंगलुरू नंबर एक पर, हैदराबाद दूसरे पायदान पर और तीसरे नंबर पर दिल्ली है। लखनऊ के पायदान में कुछ तो गनीमत है। सरकारी नौकरी हाथ नहीं लगी, तो प्राइवेट सेक्टर में लोग हाथ आजमाते हैं। कम से कम 1000 से ज्यादा की संख्या में लोग प्राइवेट सेक्टर में नौकरी के लिए अप्लाई करते हैं लेकिन इसमें से सिलेक्शन मुश्किल से 10 का होता है।

इन कारणों से नहीं रुक रही बेरोजगारी

मार्किट का विस्तार ठीक तरह से न हो पाने के कारण बेरोजगारी की परेशानी खत्म ही नहीं हो रही है। रिपोर्ट के अनुसार 1.80 करोड़ युवा नौकरी की तलाश में इधर उधर भटकते हैं। केंद्र सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद युवाओं के लिए नौकरी नहीं बंट पा रही है। आईटी और मेन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी ठीक तरह से विस्तार नहीं हो पाया है। ये भी एक बड़ी वजह है कि नौकरी की तलाश में बटक रहे लोगों को इस परेशानी से मुक्ति नहीं मिल रही है।

क्या कहना है 'यूथ फॉर वर्क' का

यूथ फॉर वर्क के रचित जैन का कहना है कि कंपनियां सिर्फ स्किल्ड मैनपावर की ही भर्तियां कर रही है। बैलेंस शीट सुधारने के लिए खर्च कम आए, इसके लिए उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। नौकरियां देने से भी परहेज किया जाता है। कम ही भर्ती पर नौकरी दी जा रही है।

इंटरनेशनल लेबर ऑर्गेनाइजेशन के अनुसार साल 2017 से ज्यादा बेरोजगारी के मामले 2018 में देखने को मिले हैं। जहां पिछले साल बेरोजगारों की संख्या 1.77 करोड़ थी, वहीं इस साल बेरोजगारों की संख्या इससे कहीं ज्यादा जा सकती है।

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