Phagotsav 2021 : बिन करताल पखावज बाजै अनहद की झंकार रे...

सुर व धुनों में पिरोई मीराबाई की होरी

By: Ritesh Singh

Updated: 08 Apr 2021, 03:16 PM IST

लखनऊ। मीराबाई ने अपने पद में होली के रुपक द्वारा एक प्रकार की सहज समाधि का का वर्णन किया है। फागुन के दिन चार होली खेल मना रे... में वे कहती हैं कि क्षणभंगुर जीवन में प्रेम ही आधार है। इस प्रेम में बिना करताल व पखावज के अनहद नाद की प्रतीति होती है। छः राग व तीस रागिनियां भी बिना सुर व ताल के रोम रोम से निकलती हैं। लोक संस्कृति शोध संस्थान द्वारा आयोजित फागोत्सव के छठवें दिन मीराबाई रचित होरी को प्रतिभागी कलाकारों ने विभिन्न सुर, राग और धुन में पिरोकर सुनाया। मीरा की होली गायन प्रतियोगिता में लगभग 25 कलाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संगीत विदुषी प्रो. कमला श्रीवास्तव ने की। वरिष्ठ साहित्यकार डा. विद्याविन्दु सिंह, डा. करुणा पांडे, उमा त्रिगुणायत व अन्य वरिष्ठ जनों ने भी अपने विचार रखे।

लोक संस्कृति शोध संस्थान की सचिव सुधा द्विवेदी ने बताया कि फागोत्सव के छठवें दिन कार्यक्रम का शुभारम्भ गणेष जी की होली से हुआ। डा. विद्याविन्दु सिंह ने लोक परम्पराओं में फागुन व चैत्र माह की सरसता का वर्णन करते हुए उछहर बहत बयरिया हो रामा चइत कै रतिया सुनाया। डा. करुणा पांडे, अरुणा उपाध्याय, सरोज खुल्बे ने होरी खेलत सियाराम अवध मा, रेखा अग्रवाल ने एकली खड़ी रे मीराबाई सुनाया।

इसके बाद मीरा की होली गायन प्रतियोगिता में फागुन के दिन चार होली खेल मना रे, बिन करताल पखावज बाजै अनहद की झंकार रे... को राग पीलू, विहाग, खमाज व अन्य लोकधुनों में पिरोकर प्रतिभागियों ने क्रमषः प्रस्तुत किया जिसमें प्रीति श्रीवास्तव, रेखा मिश्रा, सरिता अग्रवाल, रुपाली रंजन श्रीवास्तव, अपर्णा सिंह, कल्पना सक्सेना, प्रो. विनीता सिंह, रीता श्रीवास्तव, सुरभि सिंह, निधि निगम, सुधा, गौरव गुप्ता, सुनीता पांडेय, मंजू श्रीवास्तव, मधु श्रीवास्तव, साधना मिश्रा विन्ध्य,पूनम सिंह नेगी, इन्दु सारस्वत, रीता पांडेय, विभा श्रीवास्तव, रत्ना शुक्ला, गोपाली चन्द्रा, नवनीता जफा, पल्लवी निगम, भारती श्रीवास्तव, चित्रा जायसवाल आदि प्रमुख रहे।

Ritesh Singh
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