scriptPollution Poison in every breath condition of UP is serious | प्रदूषणः हर साँस में ज़हर, उत्तर प्रदेश की हालत गंभीर, जान ही नहीं माल का भी होता है नुकसान | Patrika News

प्रदूषणः हर साँस में ज़हर, उत्तर प्रदेश की हालत गंभीर, जान ही नहीं माल का भी होता है नुकसान

“द लैंसेट” की रिपोर्ट मुताबिक भारत के पाँच राज्य जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य खतरनाक स्तर पर पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) वाले वायु प्रदूषण की चपेट में है। आलम ये है कि इन राज्यों में वायु प्रदूषण की भेंट सबसे ज्यादा गर्भ में पल रहे व नवजात बच्चों ही चढ़ रहे हैं।

लखनऊ

Published: November 02, 2021 04:35:28 pm

Air Pollution - Poison in every breath: मौसम जैसे-जैसे सर्द हो रहा है वैसे-वैसे उत्तर प्रदेश की हवा ज़हरीली होती जा रही है। सोमवार को जारी एक्यूआई रिपोर्ट में एक बार फिर प्रदेश के तीन जिले सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की लिस्ट में आ गये हैं। इस वर्ष की शुरुआत में “ग्रीन पीस” की वायु प्रदूषण पर एक वैश्विक रिपोर्ट आयी थी। रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया के 10 सबसे प्रदूषित शहरों में से सात शहर उत्तर प्रदेश के हैं।
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गाजियाबाद जहाँ दुनिया का दूसरा सबसे ज्‍यादा वायु प्रदूषण वाला शहर है वहीं यूपी की राजधानी लखनऊ इस लिस्ट में नौवें स्थान पर है। भारत में वायु प्रदूषण का स्तर क्या है इसका अंदाज़ा इसी बात से लगा लीजिए कि ग्रीन पीस ने अपनी इस रिपोर्ट में दुनिया के तीस सबसे ज्यादा प्रदूषित शहरों के नाम जारी किये हैं। इन तीस शहरों में से 22 शहर सिर्फ भारत के हैं। जिसमें उत्तर प्रदेश के 10 शहर, हरियाणा के 9 और बिहार का एक शहर शामिल है। चीन का “होटन” शहर दुनिया का सबसे प्रदूषित शहर माना गया है। इसके पहले इसी वर्ष जनवरी के महीने में केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश के 123 शहरों की मानीटरिंग की। जिसमें सिर्फ यूपी की राजधानी लखनऊ की हवा ही खतरनाक श्रेणी पायी गयी।
“द लैंसेट” की रिपोर्ट मुताबिक भारत के पाँच राज्य जिनमें उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और राजस्थान जैसे राज्य खतरनाक स्तर पर पीएम (पार्टिकुलेट मैटर) वाले वायु प्रदूषण की चपेट में है। आलम ये है कि इन राज्यों में वायु प्रदूषण की भेंट सबसे ज्यादा गर्भ में पल रहे व नवजात बच्चों ही चढ़ रहे हैं।
आईआईटी दिल्ली, आईआईटी मुंबई और सीड ने पिछले 17 सालों के अध्ययन के आधार पर एक रिपोर्ट तैयार की। इस रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हर साल प्रदूषण से करीब 22,000 लोगों की मौत हो जाती है। इस रिपोर्ट में जो आँकड़े दिये हैं वो बेहद चौंकाने वाले और भयावह हैं। आँकड़ों के मुताबिक वायु प्रदूषण के चलते कानपुर और लखनऊ में हर वर्ष 4 हजार से अधिक लोग अकाल मौत का शिकार होते हैं। वहीं आगरा, मेरठ में ये आँकड़ा दो हजार से ऊपर का है तो वाराणसी और इलाहाबाद में करीब डेढ़ हजार का है। गोरखपुर में करीब एक हजार तो मुजफ्फरनगर में 500 के करीब लोग असमय मौत का शिकार हो गये।
रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान झेलने वाला राज्य उत्तर प्रदेश हो सकता है। अगर सकल घरेलू उत्पाद में प्रतिशत निकालें तो वायु प्रदूषण के चलते उत्तर प्रदेश में जीडीपी का 2.15 प्रतिशत नुकसान होता है।
पिछले कुछ वर्षों में इजाद हुए बेहतर तकनीकि के चलते हमें प्रदूषण के बारे में पहले के मुकाबले ज्यादा सटीक और विश्लेषणात्मक जानकारी मिल रही है। अगर हम इन तकनीकि का उपयोग कर प्रदूषण के स्तर को कम कर सकें तो न सिर्फ हम लोगों की जिन्दगियाँ भी बचा सकेंगे साथ ही बल्कि हम आर्थिक तौर पर भी नुकसान से बच सकते हैं।

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