scriptPower crisis may deepen in uttar pradesh | Power Crisis in Up : यूपी में और गहरा सकता है विद्युत संकट, कोयले का भंडार मानक के सापेक्ष 32% ही बचा, घाटे के बाद भी खरीदी जा रही है महंगी बिजली | Patrika News

Power Crisis in Up : यूपी में और गहरा सकता है विद्युत संकट, कोयले का भंडार मानक के सापेक्ष 32% ही बचा, घाटे के बाद भी खरीदी जा रही है महंगी बिजली

Power Crisis in Up : उत्तर प्रदेश में बिजली संकट जारी है। ग्रामीण क्षेत्रों के साथ ही शहरी क्षेत्रों में भी अघोषित कटौती हो रही है। प्रदेश में सार्वजनिक व निजी क्षेत्र की 3615 मेगावाट क्षमता की इकाइयों के बंद होने से संकट और गहरा गया है। बिजली का उत्पादन कम होने के पीछे एक बड़ी वजह कोयले की कमी बताई जा रही है।

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लखनऊ

Updated: April 29, 2022 09:21:26 pm

Power Crisis in Up : यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार प्रदेश के बिजली मउपभोक्ताओं को निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के लिए हरसंभव कोशिश कर रही है। इस समय प्रदेश में में करीब तीन करोड़ से अधिक उपभोक्ता हैं। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं की संख्या 2 करोड़ 70 लाख है। जिनके लिए राज्य सरकार अपनी उत्पादक यूनिटों के साथ अन्य बाहरी बिजली उत्पादकों से भी बिजली खरीदने का काम कर रही है। पावर कारपोरेशन के एक अधिकारी ने बताया कि पावर कारपोरेशन पहले से 90 हजार करोड के घाटे पर है। उसके बाद भी वह प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए महंगी बिजली खरीद रहा है।
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7 रुपये प्रति यूनिट खरीदी जा रही बिजली

अधिकारी के मुताबिक सामान्य दिनों में भी सात रुपए प्रति यूनिट के हिसाब से बिजली खरीदी जाती है। इसके अलावा ललितपुर, रोजा, ऊंचाहार, हरदुआगंज और पारीछा यूनिट से बिजली मिलती है। लेकिन हरदुआगंज और बारा इकाइयां काफी दिनों से बंद चल रही थी, जिन्हें फिर से चालू किया गया है।
16 मिलियन यूनिट बिजली खरीदी गई

पिछले दिनों प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए पावर कारपोरेशन ने इंडिया एनर्जी एक्सचेंज लिमिटेड से 15.85 रुपये प्रति यूनिट की दर से 16 मिलियन यूनिट बिजली खरीदने का काम किया था।
सरकार ने तय किया है शेड्यूल

बता दें कि यूपी की योगी सरकार इस बात की घोषणा कर चुकी है कि सभी को शाम 6 बजे से सुबह 7 बजे तक निर्बाध बिजली आपूर्ति होनी चाहिए। शेड्यूल के मुताबिक गांवों 18 घंटे, तहसील मुख्यालयों को 21.30 घंटे व बुंदेलखंड को 20 घंटे बिजली आपूर्ति का शेड्यूल है। इसके अलावा शहर और उद्योग बिजली कटौती से मुक्त रहेंगे।
बिजली संकट के पीछे कोयला

उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष व राज्य विद्युत सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि बिजली संकट के पीछे कारण कोयले की आपूर्ति न हो पाना है। उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम के पास मानक के सापेक्ष 19 दिसंबर 2021 तक 73 प्रतिशत कोयले का भंडार था, जो 28 दिसंबर को 72 प्रतिशत तक पहुंच गया। 31 जनवरी 2022 पहुंचते-पहुंचते यह भंडार केवल मानक के सापेक्ष 70 प्रतिशत रहा। वहीं राष्ट्रीय स्तर पर मानक के सापेक्ष 31 जनवरी को कोयले का भंडार केवल 41 प्रतिशत था।
लगातार कम हो रहा है कोयले का भंडार

परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि लगातार कम कोयला होने की वजह से 28 फरवरी को उत्तर प्रदेश को में यह कोयले का भंडार केवल 54 प्रतिशत बचा, जो गत 31 मार्च पहुंचते-पहुंचते केवल 35 प्रतिशत हो गया। उन्होंने बताया कि उस दौरान राष्ट्रीय स्तर पर मानक के सापेक्ष कोयले का भंडार केवल 38 प्रतिशत था। लेकिन धीरे-धीरे कोयला उपलब्ध ना हो पाने के कारण 4 अप्रैल को उत्तर प्रदेश में यह कोयले का भंडार मानक के सापेक्ष उपलब्ध केवल 32 प्रतिशत रह गया। उन्होंने बताया कि 17 अप्रैल की बात करें तो तो यह भंडार केवल 24 प्रतिशत तक बचा। वही राष्ट्रीय स्तर पर मानक के सापेक्ष कोयला भंडार 35 प्रतिशत रहा जिस में लगातार गिरावट होती जा रही है।

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