कोरोना संक्रमण रोकने के लिए कड़े निर्देश, अस्थायी जेल में क्वारंटाइन रहेंगे कैदी, अब तक 16144 बंदियों को लगा टीका

उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ रही है। रोजाना एक्टिव केस की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में कैदियों में संक्रमण न फैल जाए, इसके लिए प्रदेश में एक बार फिर अस्थायी जेल बनाई जाएंगी।

By: Karishma Lalwani

Updated: 18 Apr 2021, 12:55 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमण की रफ्तार बढ़ रही है। रोजाना एक्टिव केस की संख्या बढ़ रही है। ऐसे में कैदियों में संक्रमण न फैल जाए, इसके लिए प्रदेश में एक बार फिर अस्थायी जेल बनाई जाएंगी। राज्य के 63 जिलों में 83 अस्थायी जेल बनाई गई थीं। अब एक बार फिर यूपी में अस्थाई जेल बनाई जाएंगी। इनमें कैदियों की जांच की जाएगी। रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद मरीजों को 14 दिन के क्वारंटाइन में रखा जाएगा। जिनकी रिपोर्ट निगेटिव होगी उन्हें स्थाई जेल में शिफ्ट कर दिया जाएगा। योगी सरकार के निर्देश पर डीजी जेल आनन्द कुमार ने सभी जेल अधीक्षकों को जिला प्रशासन की मदद से अस्थाई जेलों को शुरू कराने का निर्देश दिया है। इससे पहले पिछले वर्ष यूपी में अस्थाई जेल बनाई गई थी। स्कूल, कॉलेज, हॉस्टल, चिकित्सालय आदि में अस्थाई जेल का निर्माण किया गया था। लेकिन संक्रमण का खतरा कम होने पर और स्कूल-कॉलेज खुल जाने पर इन अस्थायी जेलों को बंद कर दिया गया था। अब एक बार यूपी में टेम्पररी जेल शुरू की जाएंंगी।

मरीजों को मेडिकल सुविधा का आदेश

योगी सरकार ने अस्‍थायी जेलों को दोबारा बनाने का आदेश दे दिया है। इसके साथ ही यह भी आदेश दिया गया कि बंदियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्‍हें तत्‍काल आइसोलेट कर मेडिकल सुविधा उपलब्‍ध कराई जाए। 11 फरवरी, 2021 की स्थिति के अनुसार मात्र 35 अस्थाई जेल का ही संचालन हो रहा था जिनमें 4319 बंदी निरुद्ध थे। हालांकि, इस बीच जेल अधीक्षकों की ओर से स्थायी जेलों को कोरोना से बचाने के लिए जिला प्रशासन से लगातार अस्थाई जेल की व्यवस्था सुचारू बनाए रखने और पहले से ही संचालित अस्थाई जेल बंद न किए जाने का अनुरोध भी किया जाता रहा।

16144 बंदियों को लगा टीका

सूबे की जेलों में 45 वर्ष से अधिक आयु के 23432 बंदी हैं, जिनमें से अब तक 16144 बंदियों को कोरोना का टीका लगाया गया है। जबकि जेलों में कुल कैदियों की संख्या 1.12 है।

इनसेट

सरकारी अस्पतालों में गहराया ऑक्सीजन का संकट

निजी अस्पतालों की तरह अब सरकारी अस्पतालों में भी ऑक्सीजन का संकट गहराता जा रहा है। अस्पतालों में भर्ती मरीजों में करीब 70 फीसदी कोरोना संक्रमित मरीज हैं। इन मरीजों के इलाज के लिए ऑक्सीजन की डिमांड बढ़ गई है। लेकिन गैस कंपनियां मांग के अनुरूप आपूर्ति नहीं कर रही हैं। जिन अस्पतालों में पहले 15-20 ऑक्सीजन की सप्लाई प्रति तीन दिन के हिसाब से होती थी, वहीं अब हर दिन के हिसाब से ऑक्सीजन की डिमांड 10 गुना बढ़ गई है। उधर, गंभीर मरीजों पर चार घंटे में एक जंबो सिलेंडर की खपत हो रही है। कोविड अस्पतालों में भर्ती होने वाले अति गंभीर मरीजों और वेंटिलेटर पर जाने वाले मरीजों पर चार घंटे में एक जंबो सिलेंडर की खपत हो रही है। ऐसे मरीजों पर रोजाना आठ से नौ सिलेंडर लगता है। जबकि एक जंबो सिलेंडर में करीब 13 लीटर ऑक्सीजन होती है।

16 हजार जंबो सिलेंडर की खपत

फरवरी तक रोजाना 16 हजार जंबो सिलेंडर की खपत होती थी। सरकारी, अर्ध सरकारी, निजी मेडिकल कॉलेज में 15 से 20 हजार सिलेंडर लगते थे। अब कोविड अस्पतालों में ही रोजाना करीब 25 हजार सिलेंडर की खपत है। ऑक्सीजन की डिमांड 10 गुना बढ़ गई है। बलरामपुर अस्पताल में मार्च में रोजाना 80-90 ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति होती थी। मौजूदा समय में कोविड अस्पताल बन जाने बाद यहां ऑक्सीजन की मांग 500 सिलेंडर से अधिक पहुंच गई है। वहीं, गैस कंपनी करीब 300 सिलेंडर ही दे पा रही है। बलरामपुर अस्पताल के कार्यवाहक निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता के मुताबिक, संकट के बीच किसी तरह काम चला रहे हैं।

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