यूपी सरकार का खजाना भरने की रणनीति, कैबिनेट में लगेगी अंतिम मुहर, स्टांप शुल्क 10 गुना तक बढ़ाने का प्रस्ताव

-यूपी सरकार (UP Government) ने मौजूदा विलेखों पर स्टांप शुल्क में 2 से 10 गुना बढ़ाने का फैसला किया है

By: Karishma Lalwani

Published: 29 Jun 2020, 05:00 PM IST

लखनऊ. यूपी सरकार (UP Government) ने मौजूदा विलेखों पर स्टांप शुल्क में 2 से 10 गुना बढ़ाने का फैसला किया है। स्टांप शुल्क (Stamp duty) में वृद्धि से सरकारी खजाने में 400 करोड़ रुपये सालाना वृद्धि का अनुमान है। इसको लेकर कैबिनेट प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसके अलावा स्टांप देयता से बाहर करीब एक दर्जन नए क्षेत्रों को भी स्टांप शुल्क के दायरे में लाने का प्रस्ताव है। इसके लिए भारतीय स्टांप अधिनियम, 1899 की अनुसूची 1-ख में संशोधन किया जाएगा। इसके अलावा सरकारी खजाना भरने के लिए सरकार ने कई ऐसे क्षेत्रो को भी स्टांप देयता के दायरे में लाने का प्रस्ताव तैयार किया है, जो अभी इससे बाहर हैं।

नए क्षेत्रों पर स्टांप शुल्क लगाने का प्रस्ताव

प्रस्ताव में ज्यादातर नए क्षेत्रों को स्टांप के दायरे में शामिल किया गया है। टीवी, सिनेमा, रेडियो विज्ञापन के अनुबंध पर स्टांप शुल्क नहीं लिया जाता है। लेकिन टीवी, रेडियो, सिनेमा, केबल नेटवर्क या अन्य मीडिया साधनों पर विज्ञापन देने संबंधी अनुबंध पर (समाचार पत्रों को छोड़कर) 50 पैसा प्रति 100 रुपये अधिकतम तीन लाख रुपये स्टांप शुल्क का प्रस्ताव है। गुजरात राज्य में यह व्यवस्था 1 अप्रैल, 2006 से लागू है। इसके अलावा बौद्धिक संपदा अधिकारों के अंतरण पर स्टांप शुल्क लगाने की योजना है। कॉपीराइट, ट्रेडमार्क व पेटेंट के तहत अंतरण के अनुबंधों पर एक रुपये प्रति 10 हजार रुपये तय करने का प्रस्ताव है। इसकी न्यूनतम सीमा 500 रुपये होगी।

कॉरपोरेट सेक्टर में मेमोरेंडम ऑफ एसोसिएशन ऑफ कंपनी के लिए कंपनी अधिनियम की धारा-26 के अधीन आर्टिकल ऑफ एसोसिएशन लगाने पर विलेेेख पर 500 रुपये स्टांप शुल्क लगता है। इसे बढ़ाकर 1000 रुपये करने का प्रस्ताव है। इसी तरह खरीदी-बेची जा रही संपत्ति में पक्षकार के दिखाए गए बड़े मूल्य की संपत्ति पर भी मार्केट वैल्यू से स्टांप शुल्क लेने की योजना है। दान की संपत्ति पर भी पक्षकार के घोषित मूल्य पर स्टांप शुल्क के स्थान पर संपत्ति के मार्केट वैल्यू पर स्टांप शुल्क लेने की योजना है।

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Karishma Lalwani
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