यूपी में पारदर्शी व निर्धारित प्रक्रिया के तहत हुई मेडिकल इक्विपमेंट्स की खरीद

- तय कीमतों पर ही खरीदी गईं पीपीई किट, पल्स ऑक्सीमीटर, इंफ़्रा थर्मोमीटर
- यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन की खरीद प्रक्रिया में नहीं हुई कोई गड़बड़ी

By: Neeraj Patel

Published: 12 Sep 2020, 08:48 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में कोरोना आपदा के बीच पल्स आक्सीमीटर, इन्फ्रारेड थर्मोमीटर, मास्क, सैनिटाइजर आदि उपकरणों की खरीद में कथित अनियमितता को लेकर वे प्रतिपक्षी झूठे आंकड़े पेश कर सरकार पर सवाल उठाते हैं, जिन्होंने आपदा के शुरुआती काल में बिहार और उत्तर प्रदेश के लाखों मजदूरों एवं कामगारों को अपने प्रदेशों से बाहर भगाया। सरकार पर भले ही सवाल उठ रहे हों, लेकिन इसके विपरीत वास्तविकता यह है कि सरकार ने केंद्र सरकार और उच्चतम न्यायालय द्वारा सुनिश्चित गाइडलाइंस, तय मानकों और निर्धारित कीमतों पर ही पल्स आ, इन्फ्रारेड थर्मोमीटर, मास्क, सैनिटाइजर आदि चिकित्सकीय उपकरणों/सामग्रियों की खरीद की है। बहुत से सरकारी दस्तावेजों को खंगालने पर परत-दर-परत सच्चाई दिखायी दे जाएगी।

सच यह है कि यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने पारदर्शी एवं विधिक प्रक्रिया के तहत निर्धारित मूल्य पर ही खरीद की है। इतना ही नहीं उच्चतम न्यायालय और केंद्र सरकार ने पीपीई किट आदि के लिए गुणवत्ता के जो मानक तय किए थे, उनका भी पूरा ध्यान रखा गया। आरोप लगाने वालों को मार्केट मैकेनिज्म की इतनी समझ नहीं है कि शुरू में जब इन उत्पादों का उत्पादन सामान्य स्तर पर था और अकस्मात मांग बढ़ी तो इनके बाजार मूल्यों में उछाल आया, लेकिन धीरे-धीरे उत्पादन बढ़ा तो दाम भी गिरते चले गये।

चूंकि आरम्भ में दाम ऊंचे थे और सरकार ने आमजन और कोरोना वाॅरियर्स की जान बचाने को वरीयता दी। इसलिए उस समय के उपलब्ध मूल्यों पर वस्तुओं की ख़रीद की। जैसे मार्च में इन्फ्रारेड थर्मोमीटर 5298.20 रुपये, अप्रैल में 3366 रुपये और मई में 2538 रुपये में ख़रीदा गया। वहीं पल्स आक्सीमीटर मई और जून में क्रमश: 1392.16 और 1164.80 रुपये में क्रय किया गया। जैसे-जैसे उत्पादन बढ़ा और दाम गिरते गये, वैसे-वैसे खरीद मूल्य भी नीचे आता गया। सरकार की खरीद प्रक्रिया पारदर्शी रहे, इसलिए जेम पोर्टल एवं ई-टेण्डरिंग प्रक्रिया से ही पल्स आक्सीमीटर, इन्फ्रारेड थर्मोमीटर, मास्क, सैनिटाइजर आदि उपकरणों की खरीद की गई।

कोरोना के बढ़ते दुष्प्रभाव के बीच पीपीई किट की बढ़ी मांग

यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन के आधिकारिक दस्तावेजों को देखें, तो मई माह में फिंगर टिप पल्स ऑक्सीमीटर की कीमत ₹1392.16 प्रति यूनिट थी। इसकी कीमत जून में ₹1164.80 प्रति यूनिट रही। इसी तरह मार्च में इंफ्रारेड थर्मोमीटर का मूल्य ₹5298.20 था, तो वहीं अप्रैल और मई में यह क्रमशः ₹3366 और ₹2538 प्रति यूनिट खरीदा गया। पीपीई किट की भी यही स्थिति रही। कोरोना के शुरुआती दिनों में जब पहली बार पीपीई किट खरीदी गई गई तो भारत सरकार की एजेंसी एचएलएल लाइफकेयर लिमिटेड को सीधे ऑर्डर दिया गया। पांच लाख पीपीई किट के लिए ₹1087.47 प्रति किट के हिसाब से भुगतान किया गया।

वहीं अप्रैल में पांच लाख पीपीई किट के लिए प्रति किट ₹950 का भुगतान किया गया। दरसअल, कोरोना के बढ़ते दुष्प्रभाव के बीच पीपीई किट की मांग बढ़ी और आपूर्ति प्रदाता कम्पनियों के बीच मूल्य को लेकर प्रतिस्पर्धा में भी इजाफा हुआ। नतीजतन दाम में गिरावट आ गई। इसी तरह 15 मई को एक पीपीई कवरऑल की कीमत सरकार को ₹367 पड़ी, तो 31 जुलाई तक इसका मूल्य ₹275 रहा। कुछ ऐसा ही हाल हैंड सैनिटाइजर और एन-95 मास्क का भी रहा।

ई टेंडरिंग और जैम पोर्टल से हुई खरीद

कोरोना की विभीषिका के बीच जब मेडकिल उपकरणों की कमी से पूरा विश्व जूझ रहा था, इस चुनौती के बीच भी उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी ई-टेंडरिंग नीति और जेम पोर्टल से खरीद नीति का अनुपालन सुनिश्चित किया। कोरोना के शुरुआती दिनों के संकटपूर्ण इक्का-दुक्का अवसरों को छोड़ दें तो यूपी मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन ने हर बार जैम पोर्टल से ही क्रय किया जाना सुनिश्चित किया। सामान्यतः सरकार की खरीद नीति के अनुसार जेम ई-पोर्टल के माध्यम से ही खरीद होनी है, इसलिए यहां उपस्थिति कंपनियों और एजेंसियों द्वारा निर्धारित उत्पाद मूल्यों पर ही खरीद की जाती है या फिर ई-टेण्डर की मानक प्रक्रिया द्वारा।

विपक्ष को नहीं रास आ रही योगी की कोरोना आपदा पर जीत

पीपीई किट सहित तमाम उपकरणों की खरीद को लेकर विपक्ष का हमलावर होना स्वाभाविक बौखलाहट का प्रमाण ही है। जानकारों की मानें तो तमाम सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक समस्याओं के बाद भी उत्तर प्रदेश में कोरोना की स्थिति संयमित और नियंत्रित होना विपक्ष को नहीं भा रहा है। वास्तव में, 23 करोड़ जनता की कोरोना से सुरक्षा, 20 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों की सकुशल घर वापसी, विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार के लाखों अवसर तैयार करना, आर्थिक विकास की योजनाओं से जुड़े फैसलों से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी अलग छवि गढ़ दी है।

कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए डोर-टू-डोर सर्वे, काॅन्टैक्ट ट्रेसिंग तथा मेडिकल टेस्टिंग के कार्य जिस प्रभावशाली ढंग से संचालित किया जा रहा है, वह यूपी जैसे राज्य में होना कल्पनातीत था। सहसा विश्वास नहीं होता कि जिस राज्य में कोरोना के शुरुआती दिनों में महज एक टेस्टिंग लैब हुआ करती थी, आज 234 कोविड टेस्टिंग लैब 24×7 क्रियाशील हैं। एक ओर दिल्ली जैसे साधन संपन्न राज्य में कोरोना की टेस्टिंग बन्द अथवा कम करने की खबरें सुर्खियों में हैं।

वहीं उत्तर प्रदेश में बीते 11 सितंबर को मात्र एक दिन में डेढ़ लाख सैम्पल की जांच की गई। योगी आदित्यनाथ के निर्देशन और निगरानी में यह काम सतत जारी है, दिनों-दिन तेज हो रहा है। लगभग 3 करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में जहां कोरोना मरीजों के लिए बेड की कमी से हाहाकार की स्थिति बन गई और अंततः केंद्रीय गृह मंत्रालय को खुद मोर्चा संभालना पड़ा, वहीं लगभग 23 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में जहां 40 लाख मजदूर और कामगार बाहर से आये वहां कहीं भी, कभी भी बेड की कमी नहीं हुई। यूपी में डेढ़ लाख से अधिक बेड केवल कोरोना के लिए आरक्षित हैं। एक ओर जहां विभिन्न राज्यों से आकेड़े छिपाने की खबरें आ रहीं हैं, वहीं यूपी सरकार हर दिन की वस्तुस्थिति से आमजन को अवगत भी करा रही है।

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