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‘दलितों, मुसलमानों और ब्राह्मणों की एनकाउंटर के नाम पर हत्या की गई’, राजेंद्र पाल गौतम बोले- यह सरकार सिर्फ ठाकुरों की

UP Politics: कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 2027 विधानसभा चुनाव की रणनीति, दलित वोटरों को जोड़ने, यूपी सरकार के कामकाज और कांग्रेस के संगठन को मजबूत करने की योजना पर खुलकर बात की।
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लखनऊ

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Harshul Mehra

Sep 03, 2026

rajendra pal gautam up congress incharge dalit voters yogi government

राजेंद्र पाल गौतम (फोटो- पत्रिका)

UP Politics: कांग्रेसने 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले संगठन को मजबूत करने की जिम्मेदारी राजेंद्र पाल गौतमको सौंपी है। उत्तर प्रदेश के नए प्रभारी बनाए गए गौतम को राज्य में कांग्रेस के कमजोर संगठन को दोबारा खड़ा करने और पार्टी को मजबूत विकल्प के तौर पर जनता के सामने पेश करने की चुनौती दी गई है। एक निजी चैनल से बातचीत में राजेंद्र पाल गौतम ने उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की रणनीति, दलित वोटरों तक पहुंच, राज्य सरकार के कामकाज, BSP और समाजवादी पार्टी के साथ संभावित गठबंधन, छात्रों के आंदोलन और कांग्रेस छोड़कर जा रहे वरिष्ठ नेताओं समेत कई मुद्दों पर बात की।

यूपी में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने की चुनौती

उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी मिलने और 2027 के विधानसभा चुनाव नजदीक होने के सवाल पर राजेंद्र पाल गौतम ने इसे चुनौतीपूर्ण काम बताया। उन्होंने कहा कि आसान काम कोई भी कर सकता है और चुनौतीपूर्ण काम को स्वीकार करना जरूरी है। उन्होंने अपने विचार को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के संघर्ष से जोड़ते हुए कहा कि आंबेडकर ने भी चुनौतियां उठाईं और उनका समाधान किया। गौतम के मुताबिक कांग्रेस के कार्यकर्ता उत्तर प्रदेश के हर गांव में मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि गांव-गांव जाने के दौरान उन्हें ऐसे बुजुर्ग लोग भी मिले, जिनकी उम्र 90 साल तक है और जो कांग्रेस से लगाव रखते हैं।

उन्होंने दावा किया कि देश में मौजूदा माहौल के बीच लोग कांग्रेस को एक विकल्प के तौर पर देख रहे हैं। उनके मुताबिक राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा और भारत जोड़ो न्याय यात्रा तथा संविधान और लोकतंत्र बचाने की उनकी मुहिम से लोगों में कांग्रेस के प्रति भरोसा पैदा हुआ है।

'लोग कांग्रेस को विकल्प के तौर पर देख रहे हैं'

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जहां भी वह जा रहे हैं, वहां उन्हें लोगों के बीच कांग्रेस के प्रति भरोसा दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि दूसरे राजनीतिक दलों के कमजोर होने के बाद लोग कांग्रेस को विकल्प के रूप में देख रहे हैं।

उनका आरोप है कि कई राजनीतिक दल BJP में शामिल हो गए या NDA का हिस्सा बन गए, जबकि जो दल इसमें शामिल नहीं हुए, उन पर ED, CBI और इनकम टैक्स के मामलों के जरिए दबाव बनाया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिन नेताओं और दलों ने इसका विरोध किया, उनके चुने हुए सांसदों और विधायकों तथा उनकी पार्टियों को भी तोड़ा गया।

गौतम ने कहा कि ऐसे माहौल में राहुल गांधी मजबूती से खड़े होकर लड़ रहे हैं और लोग उन्हें भरोसेमंद नेता के तौर पर देख रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि वह उत्तर प्रदेश के हर गांव तक पहुंचने में सफल होंगे और कांग्रेस जनता के सामने एक मजबूत विकल्प के रूप में उभरेगी।

दलित वोटरों को वापस कांग्रेस से जोड़ने की रणनीति

कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी के तौर पर राजेंद्र पाल गौतम की नियुक्ति को दलितों तक पार्टी की पहुंच बढ़ाने के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है। इस सवाल पर कि कभी कांग्रेस के साथ रहे और बाद में बीएसपी या बीजेपी की ओर गए दलित वोटरों को पार्टी से दोबारा कैसे जोड़ा जाएगा, गौतम ने कहा कि यह वोट वापस आएगा। उन्होंने कहा कि किसी स्तर पर इन वोटरों के मन में गलत बातें डाली गईं, लेकिन अब वह लोगों को चीजों को स्पष्ट तरीके से समझाने का काम करेंगे।

मनुस्मृति और सामाजिक न्याय का जिक्र

राजेंद्र पाल गौतम ने अपने तर्क में मनुस्मृति का जिक्र करते हुए कहा कि आजादी से पहले समाज मनुस्मृति के अनुसार चलता था। उनके मुताबिक उस व्यवस्था में शूद्रों, अछूतों और महिलाओं को पढ़ाई करने, ज्ञान हासिल करने, ज्ञान पर चर्चा करने, व्यापार करने और संपत्ति हासिल करने का अधिकार नहीं था। उन्होंने कहा कि इसी वजह से समाज हजारों वर्षों तक पिछड़ा रहा। गौतम के मुताबिक ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले और शाहूजी महाराज ने सामाजिक न्याय की जो लड़ाई शुरू की थी, उसे डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर ने आगे बढ़ाकर पूरा किया। उन्होंने कहा कि आंबेडकर ने संविधान के जरिए आगे बढ़ने का रास्ता तैयार किया।

'आंबेडकर की नीतियों को कांग्रेस ने लागू किया'

राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि 6 दिसंबर 1956 को डॉ. बाबासाहेब आंबेडकरके निधन के बाद कांग्रेस ने उनकी नीतियों को लागू किया। उन्होंने कहा कि दलित और आदिवासी बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्तियां दी गईं। उनके मुताबिक कांग्रेस के शासनकाल में SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम लाया गया और जुलाई 1969 में बैंकों का राष्ट्रीयकरण हुआ।

गौतम ने कहा कि इसी दौरान खेती के लिए जमीन के पट्टे, आवासीय प्लॉट और झुग्गियों की जगह पुनर्वास कॉलोनियों में घर दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि पेट्रोल पंप और गैस एजेंसियों में आरक्षण लागू किया गया तथा विकास प्राधिकरणों के जरिए औद्योगिक विकास में औद्योगिक और आवासीय प्लॉट में भी आरक्षण दिया गया। उन्होंने कहा कि सूचना का अधिकार, खाद्य सुरक्षा का अधिकार, वन और भूमि अधिकार तथा मजदूरों के लिए 100 दिन के रोजगार की गारंटी यानी मनरेगा भी कांग्रेस के शासनकाल में आई।

यूपी सरकार पर 'तानाशाही' का आरोप

उत्तर प्रदेश सरकार के करीब साढ़े 9 साल के कार्यकाल को लेकर राजेंद्र पाल गौतम ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को तानाशाही वाली सरकार बताया और कहा कि उसे देश की अदालतों और कानून पर भरोसा नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को हत्यारा बना दिया गया है। गौतम ने कहा कि कानून के मुताबिक अपराध होने पर पुलिस को आरोपी को गिरफ्तार कर जांच करनी चाहिए, चार्जशीट दाखिल करनी चाहिए और इसके बाद अदालत में आरोप तय होने, ट्रायल और सबूतों की प्रक्रिया के बाद दोष साबित होने पर सजा दी जानी चाहिए।

एनकाउंटर और बुलडोजर कार्रवाई पर सवाल

राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि दलितों, मुसलमानों और ब्राह्मणों की पुलिस के हाथों एनकाउंटर के नाम पर हत्या की गई है। उन्होंने गरीबों के घरों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें गिराए जाने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि खास तौर पर मुसलमानों के खिलाफ अभियान चलाया गया है। नेपाल सीमा से लगे इलाकों का जिक्र करते हुए गौतम ने आरोप लगाया कि कई मदरसों और मस्जिदों को गिराया गया, जबकि वहां चर्च और मंदिर भी हैं और उन्हें निशाना नहीं बनाया गया।

पेपर लीक और आरक्षण को लेकर सरकार पर निशाना

गौतम ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पेपर लीक हो रहे हैं और परीक्षाओं में न्याय नहीं मिल रहा है। उन्होंने 68 हजार रिक्तियों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि इनमें OBC और SC के लिए तय करीब 8 हजार पदों को लेकर अन्याय किया गया और उन्हें सामान्य वर्ग को दे दिया गया। उन्होंने इसे पिछड़े वर्गों और दलितों के साथ गंभीर अन्याय बताया।

कांवड़ यात्रा और नमाज को लेकर भी उठाया सवाल

धार्मिक आयोजनों को लेकर भी राजेंद्र पाल गौतम ने सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान पूरी सड़क बंद रहती है, जबकि अगर लोग आधे घंटे के लिए नमाज पढ़ना चाहते हैं तो उनके खिलाफ मामले दर्ज किए जाते हैं और उन्हें डराया जाता है। उन्होंने कहा कि सरकार का अपना कोई धर्म नहीं होता, बल्कि सरकार का धर्म संविधान है। उनके मुताबिक सभी के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और किसी भी धार्मिक आयोजन के लिए सड़क को न तो रोका जाना चाहिए और न ही बंद किया जाना चाहिए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर एक धर्म को खुली छूट दी जाए और दूसरे धर्म को निशाना बनाकर उसके खिलाफ केस दर्ज किए जाएं तो यह गलत है।

दलितों और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर भी हमला

राजेंद्र पाल गौतम ने दावा किया कि दलितों के खिलाफ अपराध के मामलों में उत्तर प्रदेश पूरे देश में नंबर एक है। उन्होंने महिलाओं के साथ बलात्कार और उत्पीड़न के मामलों को लेकर भी उत्तर प्रदेश को देश में नंबर एक बताया। गौतम ने कहा कि उनके मुताबिक उत्तर प्रदेश में गरीबों, महिलाओं, दलितों, पिछड़े वर्गों, आदिवासियों और मुसलमानों के लिए न्याय नहीं है। उन्होंने अंत में उत्तर प्रदेश की सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि यह सरकार सिर्फ ठाकुरों की सरकार है।