लखनऊ में अपने मौलवी शिक्षक को याद कर भावुक हुए राजनाथ

लखनऊ यूनिवर्सिटी का 60वां दीक्षांत समारोह सम्पन्न, अपने मौलवी शिक्षक को याद कर भावुक हुए राजनाथ

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Published: 09 Dec 2017, 04:17 PM IST

लखनऊ. देश के गृहमंत्री राजनाथ सिंह का कहना है कि इन दिनों राजनीति का स्तर गिर गया है। यह शब्द अपना भाव ही खो चुका है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीति के गलियारों में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मणि शंकर अय्यर द्वारा पीएम मोदी को नीच कहे जाने पर बवाल मचा पड़ा है। राजनाथ का ये बयान भी इसी से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनाथ सिंह शनिवार को लखनऊ यूनिवर्सिटी के 60वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद थे। इस दौरान वह प्राइमरी स्कूल में पढ़ाने वाले अपने मौलवी शिक्षक को याद करके भावुक भी हो गए। उन्होंने कहा कि गुरु का स्थान मां-बाप के बराबर होता है। विशिष्ठ अतिथि के तौर पर डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा और कुलाधिपति व राज्यपाल राम नाईक भी मौजूद रहे।

भावुक हुए राजनाथ

राजनाथ बोले, 'व्यक्ति का जीवन में कद बड़ा होता है तो कर्मों के कारण बड़ा होता है। आग्रह करना चाहता हूं कि गुरुओं का उल्लेख करना चाहता हूं। एक मौलवी साहब पढ़ाते थे, काफी स्ट्रिक्ट थे। जब मैं यूपी का शिक्षा मंत्री बना तो बनारस गया तो देखा कि मौलवी साहब मिलने आए हैं। वह काफी बूढ़े हो चुके थे, वो मेरे लिए फूल लेकर आए थे। जब तक मैं चला नहीं गया वह वहां तब तक रोते रहे। राजनाथ सिंह भी ये बताते हुए भावुक हो गए। फिर उन्होंने बताया कि गोरखपुर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में गया तो देखा कि मेरे गुरू लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी, राम अचल जी नीचे बैठे थे। मैंने ऊपर बुलाया उन्हें। सारा हॉल ताली से गूंज पड़ा। छात्र ऊपर बैठे, गुरू नीचे बैठे यह ठीक नहीं।

राजनाथ को मानद की उपाधि

इस दौरान गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी मानद की उपाधि से नवाजा गया। राजनाथ ने अपने भाषण में कहा कि वह इस उपाधि के लायक नहीं लेकिन कुलाधिपति राम नाईक के आदेश को वह टाल नहीं सकते। राजनाथ सिंह के मुबताबिक, विवेकानन्द पहले ग्लोबल यूथ थे। हमें उन्हें फॉलो करना चाहिए। उन्होंने राम व रावण का उदाहरण दिया। वह बोले, रावण की पूजा नहीं होती, राम की होती है क्योंकि राम का चरित्र बहुत अच्छा ता। वह हमेश ही मर्यादा पुरुषोत्तम रहे। उन्होंने इन्फोसिस और अलकायदा का फर्क भी बताया। उन्होंने कहा कि दोनों जगह के युवक पढ़े लिखे हैं लेकिन संस्कारों का अंतर है।

97 मेधावियों को मिले 192 मेडल

60वें दीक्षांत समारोह में कुल 97 स्टूडेंट को 192 मेडल दिए गए। इसमें 161 मेडल छात्राओं को व 31 मेडल छात्रों को मिले। एमएससी की छात्रा आयुषी कपूर को सबसे ज्यादा 12 मेडल मिले जिसमें 11 गोल्ड मेडल और एक ब्रांज मेडल शामिल हैं। वहीं लॉ स्टूडेंट आशा तिवारी ने 9 मेडल जीते। इस दौरान अरुणिमा मुश्रान को वाइस चांसलर गोल्ड मेडल तो वहीं सक्षम अग्रवाल को चांसलर गोल्ड मेडल से नवाजा गया। वहीं सिल्वर जुबली गोल्डल मेडल डॉ. राजीव कुमार को मिला।

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