राम सर्किट केवल एक-दो मंदिर तक सीमित न रहे

राम सर्किट केवल एक-दो मंदिर तक सीमित न रहे

Prashant Srivastava | Publish: Jan, 14 2018 03:44:37 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

राम सर्किट केवल एक-दो मंदिर तक सीमित न रहे

लखनऊ. अयोध्या का जिक्र आते ही चर्चां राम मंदिर को लेकर होने लगती हैं।राम मंदिर और हनुमान गढ़ी के बारे में पर्यटक ज्यादा जानते हैं लेकिन राम सर्किट में कई ऐसी ऐतिहासिक जगह हैं जिनका प्रचार प्रसार करने की जरूरत है। राम सर्किट में अयोध्या और चित्रकूट अहम हैं। सरकार दोनों जगह पर इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत करने के लिए तमाम आश्वासन तो देती है लेकिन अभी यहां विकास के लिए काफी फोकस की जरूरत है।

अवध यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो.मनोज दीक्षित का कहना है कि राम सर्किट में पर्यटन का काफी स्कोप है लेकिन उस तरह से यहां फोकस नहीं किया गया। पिछली सरकारों ने प्लान करके एग्जीक्यूट नहीं किया। अयोध्या का पोटेंशियल केवल मंदिर नहीं है..राम की पैड़ी...होने वाले कार्यक्रम ..पंच कोसी आदि.और कई सारी चीजें हैं जो अयोध्या को खास बनाती हैं। अयोध्या एज ए सिटी डेवलेप होनी चाहिए।

अयोध्या में ये है खास

अयोध्या फैज़ाबाद जिले में सरयू नदी के तट पर स्थित है। भारत की गौरवशाली आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परम्परा का प्रतिनिधित्व करने वाली अयोध्या प्राचीनकाल से ही धर्म और संस्कृति की परम पावन नगरी के रूप में सम्पूर्ण विश्व में विख्यात रही है। अयोध्या की माहात्म्य व प्रशस्ति वर्णन से इस नगरी के महत्व और लोकप्रियता का स्वयं ही अनुभव हो जाता है।

हनुमान गढ़ी

इस क्षेत्र के सबसे लोकप्रिय मंदिरों में से एक है। किंवदंती यह है कि भगवान हनुमान अयोध्या की रक्षा के लिए यहाँ रहते थे। मुख्य मंदिर में माता अंजनी और उनकी गोद में बैठे बाल हनुमान की एक प्रतिमा है। ऊँचे
स्थान पर स्थित इस मंदिर तक सीढ़ियाँ चढ़कर पहुँचा जा सकता है।

तुलसी उद्यान के बारे में

तुलसी उद्यान गोस्वामी तुलसीदास को समर्पित एक बगीचा है। अयोध्या-फैजाबाद रोड पर स्थित बगीचे को पहले विक्टोरिया पार्क के रूप में जाना जाता था। पार्क के मध्य में रानी विक्टोरिया की एक मूर्ति थी। बाद में 1960 में इसे तुलसी उद्यान का नाम दिया गया और गोस्वामी तुलसीदास जी की एक मूर्ति
स्थापित की गई।

कनक भवन

अयोध्या का कनक भवन बेहद विशाल व भव्य मंदिर है. राम-जानकी की मूर्ति भी श्रद्धालुओं को मोहित करता है।

 

दिगंबर जैन मंदिर

योध्या जैन मतावलंबियों के लिए भी पवित्र तीर्थ है. मान्यता है कि जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का जन्म यहीं हुआ था। राजा दशरथजी का महलराजा दशरथ का महल भी बहुत प्राचीन और भव्य है। इसके परिसर में काफी संख्या में जमा होकर श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते रहते हैं।

श्रीराम जन्मस्थान (श्रीरामलला)श्रीराम के जन्मस्थान पर अभी रामलला की मूर्ति विराजमान है. भक्तगण लंबी-लंबी कतारों में कड़ी सुरक्षा-व्यवस्था से गुजरकर रामलला के दर्शन करते हैं।

 

दन्तधावन कुंड

अयोध्या नगरी के बीचोंबीच हनुमानगढ़ी इलाके में ही एक बड़ा-सा कुंड है, जो दन्तधावन कुंड नाम से जाना जाता है. इसे ही राम दतौन भी कहते हैं. कहा जाता है कि श्रीराम इसी कुंड के जल से सुबह अपने दांतों की सफाई करते थे।


चित्रकूट


माना जाता है कि चित्रकूट में भगवान श्रीराम ने सीता और लक्ष्मण समेत वनवास के 14 साल बिताए थें। यहीँ पर संत अत्रि और सती अनुसुइया ने भी तपस्या की थी।मंदाकिनी नदी के किनारे बसा यह शहर यूपी और एमपी तक फैला हुआ है। यह शहर मंदाकिनी नदी के तट पर बसा हुआ है, जिसे पयस्विनी नदी के नाम से भी जाना जाता है। नदी किनारे घाटों की कतारें और शहर में मंदिरों की अच्छी संख्या है।हनुमान धारा, कामद गिरि, स्फटिक शिला और राम घाट भी दर्शनीय स्थलों में शुमार होते हैं।


चित्रकूट की पहाड़ी के अतिरिक्त इस क्षेत्र के अन्तर्गत कई ग्राम हैं जिनमें सीतापुरी प्रमुख है। पहाड़ी पर बाँके सिद्ध, देवांगना,हनुमानधारा, सीता रसोई और अनुसूया आदि पुण्य स्थान हैं। दक्षिण पश्चिम में गुप्त गोदावरी नामक सरिता एक गहरी गुहा से निस्सृत होती है। सीतापुरीपयोष्णी नदी के तट पर सुन्दर स्थान है और वहीं स्थित है, जहाँ राम-सीता की पर्ण कुटी थी। इसे पुरी भी कहते हैं। पहले इनका नाम 'जयसिंहपुर' था और यहाँ कोलों का निवास था।

पन्ना के राजा अमानसिंह ने जयसिंहपुर को महंत चरणदास को दान में दे दिया था। इन्होंने ही इसका सीतापुरी नाम रखा था। राघवप्रयाग, सीतापुरी का बड़ातीर्थ है। इसके सामने मंदाकिनी नदी का घाट है। चित्रकूट के पास ही कामदगिरि है। इसकी परिक्रमा 3 मील की है। परिक्रमा-पथ को 1725 ई. में छत्रसाल की रानी चाँदकुंवरि ने पक्का करवया था। कामता से 6 मील पश्चिमोत्तर में भरत कूप नामक विशाल कूप है। तुलसी-रामायण के अनुसार इस कूप में भरत ने सब तीर्थों का वह जल डाल दिया था, जो वह श्रीराम के अभिषेक के लिए चित्रकूट लाए थे।

ये हैं ऐतिहासिक जगह

कामदगिरि


भरत मिलाप

स्फटिक शिला


गुप्त गोदावरी


भरत कूप

गणेश बाग

देवड़गना

हनुमान धारा

इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेॆट की जरूरत

अयोध्या -चित्रकूट में सबसे ज्यादा इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलेपमेॆट की जरूरत है। परिवहन व पर्यटकों की सुरक्षा की स्थिति भी मजबूत होनी चाहिए।

 

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