राम, कृष्ण, गीता, रामायण देश की विरासत, इनके सम्मान के लिए कानून बनाना चाहिए: Allahabad High Court

Allahabad High Court ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के सम्मान के लिए एक कानून लाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि देश के सभी स्कूलों में इसे अनिवार्य विषय बनाकर पढ़या जाना चाहिए। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी एक फेसबुक पोस्ट पर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले एक मामले की सुनवाई करने के दौरान की है।

By: Vivek Srivastava

Updated: 11 Oct 2021, 03:17 PM IST

इलाहाबाद. किसी को भी बोलने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार के नाम पर दूसरों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने का अधिकार नहीं है। भगवान राम और कृष्ण भारतीयों के दिल में रहते हैं। उच्च न्यायालय ने कहा कि भगवान राम, कृष्ण, रामायण, गीता और इसके लेखकों महर्षि वाल्मीकि तथा महर्षि वेदव्यास देश की विरासत का हिस्सा हैं और भारतीय संसद में एक कानून लाकर उन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिए जाने की जरूरत है। न्यायालय ने भारत को राम के बिना अपूर्ण बताया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यह टिप्पणी एक फेसबुक पोस्ट पर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले एक मामले की सुनवाई करने के दौरान की है। हाँलाकि कोर्ट ने आरोपी आकाश जाटव उर्फ सूर्य प्रकाश को दोबारा ऐसे अपराध न करने की चेतावनी देते हुए सशर्त जमानत मंजूर कर ली।

दरअसल हाथरस जिले के आकाश जाटव उर्फ़ सूर्य प्रकाश ने भगवान राम और भगवान कृष्ण के खिलाफ फेसबुक पर एक पोस्ट की थी, जिसमें उसने इन दोनों आराध्यों को लेकर अश्लील बातें लिखी थीं। इसी मामले में आरोपी आकाश जाटव उर्फ़ सूर्य प्रकाश की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शेखर कुमार यादव ने कहा कि संविधान के तहत कुछ प्रतिबंध भी हैं, जिसमें किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस न पहुँचाना भी शामिल है।

जस्टिस शेखर ने कहा, ‘राम इस देश के हर नागरिक के दिल में बसते हैं, वह भारत की आत्मा हैं. इस देश की संस्कृति राम के बिना अधूरी है।’ उन्होंने कहा कि,"भारतीय संविधान, जो दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे उदार संविधान है, एक नागरिक को किसी भी धर्म में विश्वास नहीं करने या नास्तिक रहने की अनुमति देता है, लेकिन यह देखा जाना चाहिए कि वह धर्म, स्वास्थ्य, नैतिकता से संबंधित परंपराओं, कानून और व्यवस्था या अन्य नागरिकों के अधिकार के ख‌िलाफ ना हो।"

राम के सम्मान के लिए बनाया जाए कानून- उच्च न्यायालय

न्यायालय ने यह भी कहा कि भगवान राम और भगवान कृष्ण के सम्मान के लिए एक कानून लाना चाहिए। कोर्ट ने यह भी कहा कि देश के सभी स्कूलों में इसे अनिवार्य विषय बनाकर पढ़या जाना चाहिए।

इतिहासकारों को बताया चापलूस

कोर्ट ने वर्तमान शिक्षा पाठ्यक्रम पर भी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि इतिहासकारों ने चाटुकारिता या चापलूसी और स्वार्थ के कारण भारतीय संस्कृति को बहुत नुकसान पहुंचाया है।

गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का भी सुझाव दे चुका है न्यायालय

आपको बता दें कि कुछ दिनों पहले गोकशी के एक मामले में सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा था कि गाय को भारत का "राष्ट्रीय पशु" घोषित किये जाने वाला कानून बनाया जाना चाहिए और इसकी सुरक्षा को हिन्दुओं के मूलभूत अधिकारों में शामिल किया जाना चाहिए। न्यायालय ने टिप्पणी करते हुए गाय की महत्ता को रेखांकित करते हुए यह बात भी कही थी कि वैज्ञानिक रूप से यह सिद्ध हो चुका है कि गाय एक मात्र ऐसा जाे ऑक्सीजन लेती है और छोड़ती है। गाय के दूध, दही, घी, मूत्र और गोबर से बना पंचगव्य से कई असाध्य रोगों का इलाज होता है।

ताण्डव वेब सीरीज़ मामले का भी दिया हवाला
न्यायालय ने तांडव वेब सीरीज केस के आदेश का हवाला दिया। दरअसल तांडव वेबसीरीज़ मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अमेजन प्राइम वीडियो की कमर्शियल हेड अपर्णा पुरोहित को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने से इनकार किया गया था, कोर्ट ने कहा था कि वेब सीरीज ने दूसरों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

Vivek Srivastava
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