अठावले बोले-गरीब सवर्णों को मिले 25 फीसदी आरक्षण

अठावले बोले-गरीब सवर्णों को मिले 25 फीसदी आरक्षण

Ashish Kumar Pandey | Publish: Sep, 07 2018 04:46:09 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

यूपी में भाजपा से गठबंधन कर चुनाव लडऩे की जताई इच्छा, बोले-बसपा के कई नेता हैं मेरे संपर्क में।

 

लखनऊ. केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले शुक्रवार को राजधानी में थे। उन्होंने आर्थिक तौर पर कमजोर सवर्णों को 25 प्रतिशत आरक्षण देने की राय जाहिर की है। उन्होंने कहा कि इसके लिए आरक्षण के दायरे को 50 से बढ़ाकर 75 प्रतिशत करना होगा। इसके लिए सभी दलों को सरकार का साथ देना चाहिए। रिपब्लिकन पार्टी आफ इण्डिया (आरपीआई) के अध्यक्ष अठावले ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की तीन-चार सीटों पर चुनाव लडऩे की इच्छा जताते हुए कहा कि वह इस सिलसिले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से बात करेंगे। उन्होंने दावा किया कि बसपा के कई मजबूत नेता उनके सम्पर्क में हैं और आरपीआई के साथ आने से बीजेपी को लोकसभा चुनाव में और भी लाभ मिलेगा। दावा किया कि बीजेपी आगामी लोकसभा चुनाव में 300 सीटें जीत सकती है।
राजधानी में पत्रकारों से वार्ता के दौरान केंद्रीय राज्यमंत्री रादास अठावले ने एक सवाल के जवाब में कहा कि उनका मानना है कि गरीब सवर्णों को 25 प्रतिशत आरक्षण का बिल पारित हो जाए तो सभी का भला हो जाएगा। उन्होंने कहा कि सवर्ण सोचते हैं कि एससी-एसटी लोगों को आरक्षण मिलता है, मगर उन्हें नहीं दिया जाता। सरकार अगर आरक्षण के दायरे को 75 प्रतिशत तक बढ़ाये तो मुझे लगता है कि सभी को आरक्षण का लाभ मिल जाएगा। इसके लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को साथ देना चाहिए। अठावले ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान पदोन्नति में आरक्षण देने पर भी विचार कर सकती है।
केन्द्रीय मंत्री अठावले ने एससी/एसटी कानून में सुप्रीम कोर्ट के आदेश को पलटने के केंद्र सरकार के फैसले का जिक्र करते हुए दोहराया कि अब कानून में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। वह सभी पक्षों को बुलाकर बात करेंगे और उन्हें विश्वास दिलाएंगे कि इस कानून का दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सवर्णों को कानून में परिवर्तन की मांग करने के बजाय दलितों के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार के कदम के खिलाफ गुरुवार को भाजपा शासित राज्यों में हुआ 'भारत बंद', दरअसल विपक्षी दलों की हरकत थी और सरकार को बदनाम करने के लिये उन्होंने ऐसा किया।

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