स्वास्थ्य सेवाओं में फिसड्डी है यूपी, केरल अव्वल

नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं के मामलों में उत्तर प्रदेश को सबसे फिसड्डी बताया गया है जबकि केरल को अव्वल माना गया है।

By: Laxmi Narayan

Published: 10 Feb 2018, 01:31 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश और केरल के मुख्यमंत्रियों के बीच पिछले दिनों स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर हुई राजनीतिक जुबानी जंग में खुद को बेहतर बताने के दावों के बीच नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं के मामलों में उत्तर प्रदेश को सबसे फिसड्डी बताया गया है जबकि केरल को अव्वल माना गया है। नीति आयोग के समग्र स्वास्थ्य सूचकांक रिपोर्ट में स्वास्थ्य से जुड़े विभिन्न सेवाओं और मसलों को शामिल किया गया है। रैंकिंग में उत्तर प्रदेश को बिहार, उड़ीसा और राजस्थान से भी नीचे रखा गया है।

यूपी के प्रदर्शन में सुधार

देश के 21 बड़े राज्यों की सूची में सबसे निचले पायदान पर शामिल उत्तर प्रदेश को प्रदर्शन में सुधार करने वाले टॉप तीन राज्यों की सूची में स्थान मिला है। ' स्वस्थ राज्य, प्रगतिशील भारत - राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों पर रिपोर्ट ' के इंडेक्स में बताया गया है कि वर्ष 2014-15 में यूपी का स्कोर 28.14 था जबकि वर्ष 2015-16 में इस स्कोर में सुधार हुआ और स्कोर बढ़कर 33.69 अंक हो गया। रैंकिंग तीन वर्गों में किया गया है - बड़े राज्य, छोटे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश।

इन बिंदुओं पर हुआ मूल्यांकन

दरअसल नीति आयोग ने कई बिंदुओं पर यह रिपोर्ट तैयार की है। इस रिपोर्ट को तैयार करने में नीति आयोग के साथ ही विश्व बैंक, केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों व विशेषज्ञों की मदद ली गई। राज्यों में नवजात मृत्यु दर, टीकाकरण कवरेज, संस्थागत कवरेज जैसे कई बिंदु शामिल किये गए हैं। जिन 21 राज्यों को बड़े राज्यों की सूची में शामिल किया गया उनमें 80 अंकों के साथ केरल सबसे अव्वल है जबकि 33.69 अंकों के साथ उत्तर प्रदेश सबसे निचले पायदान पर है।

यह हैं चुनौतियाँ

उत्तर प्रदेश को अभी स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े पैमाने पर सुधार और नए प्रयोगों की जरूरत है। उत्तर प्रदेश में अभी मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएँ बदहाल स्थिति में है और दूरदराज के क्षेत्रों में डाक्टरों तक की तैनाती नहीं हो पा रही है। दिमागी बुखार से हो रही मौतों की संख्या पर रोक लगा पाने में सरकार नाकाम नहीं है और कोई रोडमैप भी सामने नहीं आ सका है। इन सबके बीच उत्तर प्रदेश सरकार अपनी अलग स्वास्थ्य नीति लाने का दावा कर रही है जिससे उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को पटरी पर लाया जा सके।

Laxmi Narayan
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