scriptrape case 5 people gangraped girl 13 days crime news rape in india sup | रेप के बाद जिंदगी 1: नौकरी करके बीमार मां की दवाइयां, भाई-बहन की पढ़ाई और वकील की फीस देती हैं रेप पीड़िता | Patrika News

रेप के बाद जिंदगी 1: नौकरी करके बीमार मां की दवाइयां, भाई-बहन की पढ़ाई और वकील की फीस देती हैं रेप पीड़िता

locationलखनऊPublished: Feb 10, 2024 06:59:40 am

Submitted by:

Gausiya Bano

रेप के बाद जिंदगी सीरीज में ये कहानी अ*#*# की है। ये नाम बदला हुआ है। हम उनकी पहचान जाहिर नहीं करना चाहते। लेकिन 13 साल की उम्र में अ*#*# जिन हालातों से गुजर कर आज जिंदा हैं, वो हिम्मत हर किसी में नहीं होती है।

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रेप पीड़िता की मां FIR लिखवाने जब थाने पहुंचीं तो पुलिस ने कहा, 'किसी लड़के के साथ प्यार का चक्कर होगा इसलिए भाग गई होगी।' (प्रतीकात्मक तस्वीर: एडिट सौरभ कुमार)
रेप के बाद जिंदगी सीरीज में ये कहानी अ*#*# की है। ये नाम बदला हुआ है। हम उनकी पहचान जाहिर नहीं करना चाहते। लेकिन 13 साल की उम्र में अ*#*# जिन हालातों से गुजर कर आज जिंदा हैं, वो हिम्मत हर किसी में नहीं होती है। फिलहाल वो एक टीयर 1 सिटी में रहती हैं। एक मॉल में सेल्स एग्जीक्यूटिव की नौकरी करती हैं। तनख्वाह है 12 हजार रुपए। इस पैसे से वो बीमार मां की दवाइयां, कमरे का किराया, भाई-बहन की पढ़ाई और वकील की फीस देती हैं। वकील उन्हीं के रेप का केस लड़ता है। अब अ*#*# की कहानी…

22 नवंबर, 2015 की सुबह 6 बजे…
मैं चाय के लिए दूध लेने गई थी। रास्ते में किसी ने मुंह में रुमाल रखा। फिर मुझे कुछ याद नहीं। होश आया तो एक कमरे में थी। हाथ-पैर बंधे हुए थे और मुंह में कपड़ा बांधा था। मेरे अलावा वहां पर 5 आदमी और मौजूद थे।

13 दिन कैद में रखकर बारी-बारी से किया रेप
पांचों आदमी मेरे लिए अंजान थे। उन लड़कों ने मुझे 13 दिनों तक कैद में रखा। एक-एक करके मेरे साथ रोज गलत काम किया। 14वें दिन मुझसे कहां तुमको तुम्हारे घर छोड़ने चल रहे हैं। कुछ बोलना नहीं। मैंने उनके हाथ-पैर जोड़े। कहा, मुझे सही सलामत घर भेज दो। मैं किसी से कुछ नहीं कहूंगी।
जब घर छोड़ने के लिए बोलेरो में बिठाया तब भी रात भर घुमाते रहे। ठेके पर जाकर दारू पिए। नशे की हालत में गाड़ी के अंदर भी मेरे साथ जबरदस्ती की।

2 गोली मारे और फिर कुंए में फेंक दिए
5 दिसंबर की रात थी। बाहर काफी ठंड थी। आसपास सिर्फ खेत और एक कुआं था। गाड़ी रोक के मुझसे कहा तुम अब चली जाओ। मैं थोड़ा आगे ही बढ़ी थी कि उन लोगों ने मुझे पीछे से गोली मारी। एक गोली मेरे सीने पर लगी और दूसरी पीठ पर।

गोली आज भी मेरी रीढ़ की हड्डी में फंसी हुई है
गोली लगने से मैं बेहोश हो गई। पांचों बदमाशों ने मुझे उठाकर कुएं में फेंक दिया। मेरा सिर फट गया। काफी चोट भी लग गई थी। होश में आने के बाद मैं कुंए से बाहर निकलने की कोशिश की। लेकिन निकल नहीं पाईं। ठंड से मेरा शरीर सुन्न और खून जम रहा था। कुंए के एक साइड टेक लगाकर मैंने खुद को किसी तरह संभाला। सीने पर लगी गोली मुझे दिख रही थी। मैंने हाथ डालकर गोली निकाली और अपने पॉकेट में रख लिया। हिम्मत करके मैंने मदद के लिए आवाज दी। गांव वाले मेरी आवाज सुनकर वहां इकट्ठा हुए। पुलिस बुलाई गई। सबकी मदद से मैं कुंए के बाहर आईं।

पीठ में लगी गोली आज भी रीढ़ की हड्डी में फंसी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि ये गोली निकालने से मुझे कैंसर हो सकता है। गोली की वजह से दाहिने हाथ में हमेशा दर्द होता है। इसकी वजह से मैं इस हाथ का इस्तेमाल ज्यादा नहीं कर पाती हूं।

डॉक्टर को चैलेंज किया कि 9 दिन के अंदर ठीक होकर दिखाऊंगी
दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में मैं 4 दिनों तक बेहोश थी। मेरी हालत देखकर डॉक्टर को उम्मीद नहीं थी कि मैं वापस से चल फिर पाऊंगी। लेकिन मैंने सोच लिया था कि मैं खुद को रिकवर करूंगी। मैं हिम्मत नहीं हारी। ICU में 9 दिन तक भर्ती थी। और 10वें दिन खुद को रिकवर करके अपने घर आ गई थी।

जब मैं बेहोश थी तब डॉक्टर ने झूठ बोलकर इलाज किया। डॉक्टर ने कहा कि सीने की गोली उन्होंने ऑपरेशन करके निकाला है। लेकिन कुएं में मैंने खुद सीने की गोली अपने हाथों से निकाला था। ऑपरेशन के बहाने से उन लोगों ने 2 लाख रुपए जमा करवाए। और दूसरी गोली आज ही रीढ़ की हड्डी में फंसी है जिसको निकालने से मेरी जान को खतरा है।

रेप के बाद पिता ने साथ छोड़ दिया
हादसे के बाद मेरे घरवाले अलग हो गए। कहा, ‘तुम्हारे चक्कर में हम लोग नहीं फंसना चाहते है। मेरे पापा तक ने मेरा साथ नहीं दिया। लेकिन मेरी मां हमेशा मेरे साथ खड़ी रही। वो मेरी परछाई बनकर मेरी हर लड़ाई में साथ खड़ी रही।’

पापा पहले से ही हमें सपोर्ट नहीं करते थे। 6 साल की उम्र से ही मैं पापा और परिवार के लड़ाई- झगड़े दिखती रही हूं। वो बचपन से ही मुझे मारते-पीटते और टार्चर करते थे। वो अपनी दूसरी बीवी के साथ रहते थे। महीने में कभी दो बार आते थे। हर बार मैं पीटती थी। कभी बेल्ट से मारते थे तो कभी मेरे ऊपर गर्म पानी फेंक देते थे। एक बार गुस्से में आकर वो मुझे छत से भी फेंक दिए थे।

कोर्ट में घर वालों ने साथ रखने से मना कर दिया
हादसे के बाद से मैं बहुत डरी हुई थी। उस समय मुझे सबसे ज्यादा अपने परिवार के सपोर्ट और उनके प्यार की जरूरत थी। कोर्ट ने मुझसे पूछा कि तुम्हें कहा रहना है। मैं अपने घर में परिवार के बीच रहना चाहती थी। लेकिन मेरे घरवालों ने मुझे साथ रखने से मना कर दिया। उन्होंने कहा, तुम्हारी वजह से हम लोग फंस जाएंगे।

मेरी सुरक्षा के लिए कोर्ट ने मुझे 3 साल तक NGO में रहने के लिए भेज दिया। वहां पर सिर्फ मेरी मां मुझसे मिलने आती थी। 3 साल तक मैं अकेले NGO में रही। मैंने अपने जख्म खुद ही भरे हैं।

खुदखुशी करने के लिए फंदा तक लगाया
अकेले NGO में रहने से मैं बहुत बार डिप्रेशेन में चली गई। मैं एकदम टूट चुकी थी। मैंने बहुत बार खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की। गुस्से में कभी हाथ काटने की तो कभी फांसी लगाने की भी कोशिश की। मरने के लिए फंदा तक तैयार कर लिया था लेकिन हिम्मत नहीं कर पाई।

अंदर से आवाज आती थी कि अ*#*# गलत कर रही है तू। तेरे आगे पीछे अभी बहुत कुछ है। 2 गोली लगने के बाद भी आज मैं जिंदा हूं तो कुछ तो बात होगी। मेरे सामने मेरी मां और भाई-बहन का चेहरा दिखता था। मैं सोचती थी कि अभी मेरे लिए ये लोग जिंदा है। इनके लिए मुझे जीना है। मेरा रेप का केस भी चल रहा है। मुझे वो भी जीतना है। आरोपियों को जेल में बंद करवाना है।

अब 12 हजार की नौकरी कर रही
घर में पापा नहीं रहते थे जिसकी वजह से पैसों की बहुत दिक्कत होने लगी थी। मेरी मां दूसरों के घरों में बर्तन धुलती थी। इससे गुजारा नहीं हो पाता था। फिर मैंने 9 साल की उम्र में कूढ़ा बिनने का काम शुरू किया। लेकिन अब मैं अपनी मां को कुछ नहीं करने देती हूं। वो हार्ट और सुगर की पेशेंट है। उन्हें सांस लेने में भी दिक्कत होती है। उधार पैसे लेकर मैं मम्मी की दवाइयां ली हूं।

रोज मैं खुद की आत्मा से, समाज से और परिवार से लड़ी हूं। अभी तक लड़ती हूं। तब जाकर मैं आज यहां आपके सामने बैठी हूं। हादसे के वक्त मुझे ये भी होश नहीं था कि मैं ही अ*#*# हूं। लेकिन आज मैं गर्व से कहती हूं कि हां, मैं ही अ*#*# हूं। क्योंकि आज मैंने ये लड़ाई अकेले अपने दम पर लड़ी है।

पुलिस ने प्यार का चक्कर बताकर नहीं लिखा FIR
मुझे अगवा किया गया था। मैं घर नहीं लौटी तो मेरी मां परेशान हो गई। रिपोर्ट दर्ज करवाने के लिए वो पुलिस थाने गई। लेकिन पुलिस का रवैया बहुत खराब था। उन्होंने FIR लिखने से मना कर दिया और कहा प्यार का चक्कर होगा। किसी लड़के के साथ भाग गई होगी।

हॉस्पिटल में भी जब पुलिस मुझसे पूछताछ के लिए आई थी तो उनकी बातों से लगता था कि वो बस मामला दबाना चाहते थे। यहां तक कि मुझे डराते-धमकाते भी थे। कहते थे नाम मत लो। चुप रहो। नहीं तो कुछ भी हो सकता है।

लेकिन मैंने उस वक्त किसी की भी नहीं सुनी। मेरी जुबान सिर्फ सच बोल रही थी और वही लिखा गया। उस समय मुझे और कुछ नहीं समझ आया।

सरकारी वकील हाथ पर हाथ धरे बैठे रहे इसलिए प्राइवेट वकील किया
केस लड़ने के लिए मुझे सरकारी वकील मिला था। लेकिन वो कुछ काम नहीं करता था। मेरे केस में बिल्कुल ध्यान नहीं देता था। ना ही मुझे कुछ बताता था। कोर्ट में मेरी तारीख आ जाती थी और सरकारी वकील आराम से बैठे रहते थे। मैं कोर्ट में कुछ बोलती थी तो मुझे ही चुप करवा देते थे। ऐसे वकीलों को मैं वकील नहीं मानती।

आरोपियों को पकड़ लिया गया था। लेकिन वो लोग पैरोल पर रिहा हो गए थे। डेढ़ साल से वो दरिंदे बाहर घूम रहे। ना तो पुलिस, ना ही प्रशासन उन्हें पकड़ कर वापस लेकर आई। मुझे बताया भी नहीं गया कि इन्हें रिहा किया जा रहा है। मुझे कोई नोटिस तक नहीं दी। वो आरोपी सिर्फ 6 साल तक जेल में रहे। मेरा बचपन, मेरी जिंदगी खराब करने की सजा क्या सिर्फ 6 साल है।

सरकार की मदद से मेरी दवाइयां तक पूरी नहीं हो सकी
सरकार की तरफ से भी मुझे कुछ ज्यादा मदद नहीं मिली। महीनों भाग-दौड़ करने के बाद डेढ़ लाख रुपए मिले थे। लेकिन मेरी चोटें इतनी गहरी थी कि उनको सही करने वाली दवाइयां बहुत मंहगी आती हैं।

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