खत्म होगी अजीत सिंह की पार्टी आरएलडी, इस कार्रवाई के बाद खतरे में जयंत चौधरी का सियासी भविष्य, राजनीति ने जुड़ी सबसे बड़ी खबर

-राष्ट्रीय लोक दल के लिए एक बुरी खबर है

By: Ruchi Sharma

Published: 30 Aug 2019, 11:24 AM IST

लखनऊ. राष्ट्रीय लोक दल के लिए एक बुरी खबर है। लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे के बाद चुनाव आयोग ने राष्ट्रीय पार्टी होने के लिए जो तीन शर्तें हैं उस पर टीएमसी (TMC), एनसीपी (NCP) और सीपीआई (CPI) खड़ी नहीं हो सकी। इसके चलते आयोग ने तीनों पार्टियों को नोटिस भेजा था। माना जा रहा है कि ६ राज्यों मे 6 राज्य स्तरीय पार्टियों की मान्यता खतरे में है। इसमें अजीत सिंह (Ajit Singh) की अगुआई वाली राष्ट्रीय लोक दल (Rashtriya Lok Dal/आरएलडी) भी शामिल है।

दरअसल, इन 6 पार्टियों ने राज्य स्तरीय पार्टी होने के लिए आवश्यक 5 शर्तों में से एक शर्त को भी पूरा नहीं किया है। जिसकी वजह से उनकी राज्य स्तरीय पार्टी की मान्यता खतरे में है। उत्तर प्रदेश में आरएलडी का राज्य स्तरीय पार्टी का दर्जा खतरे में है तो वहीं पश्चिम बंगाल में रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी) की मान्यता खतरे में है, जबकि केरल में इस राज्य स्तरीय पार्टी की मान्यता पर कोई खतरा नहीं है।

हालांकि चुनाव आयोग सभी 6 पार्टियों को सुनवाई का आखिरी मौका देगी। इससे पहले चुनाव आयोग के नोटिस के जवाब में सभी पार्टियों ने आयोग से गुहार लगाई थी कि मान्यता खत्म न की जाए।

 

राष्ट्रीय लोक दल का इतिहास

लोकदल का इतिहास शुरू होता 1974 से जब चौधरी चरण सिंह ने भारतीय लोक दल नाम से अपनी पार्टी बनाई थी। तब इसका चुनाव निशान 'हलधर किसान' था। इमरजेंसी के बाद 1977 में इंदिरा गांधी का मुकाबला करने के लिए कई नेताओं ने अपनी-अपनी पार्टियों का विलय कराकर जनता पार्टी बनाई। कई पार्टियों को मिलाकर बनाई गई जनता पार्टी का चुनाव निशान भी हलधर किसान बना। 1977 में कांग्रेस पार्टी को हराकर जनता पार्टी ने केंद्र में सरकार बनाई। मोरारजी देसाई के बाद चौधरी चरण सिंह जनता पार्टी की तरफ से प्रधानमंत्री भी बने। लेकिन 1980 में आपसी मतभेदों के कारण जनता पार्टी टूट गई और चौधरी चरण सिंह भी उससे अलग हो गए। अब उन्होंने जो पार्टी बनाई उसका नाम 'लोकदल' था और चुनाव निशान था 'हल जोतता हुआ किसान'। लोकदल नाम कि ये पार्टी 1987 में चौधरी चरण सिंह के देहांत तक ठीक से चलती रही। एक समय देवी लाल, नीतीश कुमार, बीजू पटनायक, शरद यादव और मुलायम सिंह यादव भी इसी लोक दल के नेता होते थे। 1984 के लोकसभा चुनाव में जब भारतीय जनता पार्टी के सिर्फ दो सांसद थे तब लोकदल के चार सांसद होते थे। लेकिन चौधरी चरण सिंह के देहांत के बाद लोकदल पर कब्जे की लड़ाई छिड़ गई। कुछ दिनों तक हेमवती नंदन बहुगुणा इसके अध्यक्ष रहे। लेकिन बाद में यह लड़ाई चुनाव आयोग पहुंच गई। उस समय भी पार्टी पर दावा करने वालों में खुद चौधरी चरण सिंह के बेटे अजीत सिंह भी शामिल थे। लेकिन भारतीय चुनाव आयोग ने फैसला सुनाया कि अजीत सिंह बेटे होने के नाते चरण सिंह की संपत्ति के वारिस तो हो सकते हैं, मगर पार्टी की विरासत उन्हें नहीं मिल सकती है। तब अजीत सिंह ने राष्ट्रीय लोक दल नाम की अपनी अलग पार्टी बना ली जिसे वह अभी भी चला रहे हैं।

Ruchi Sharma
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