Rishi Panchami 2021 :महिलाएं क्यों रहती हैं ऋषि पंचमी का व्रत,जानिए कारण

(Rishi Panchami 2021)

By: Ritesh Singh

Published: 11 Sep 2021, 08:03 PM IST

लखनऊ , (Rishi Panchami 2021) महिला होना बहुत ही गर्व की बात हैं लेकिन ये बात हर कोई नहीं समझता की किस तरह एक औरत अपने सहनशीलता से घर ,परिवार ,समाज को साथ लेकर चलती हैं। औरत सबकी ख़ुशी के खातिर अपनी हर एक पीड़ा को ख़ुशी ख़ुशी झेलती हैं। (Rishi Panchami 2021) चाहे वो दर्द किसी के भी माध्यम से हो। सभी दुःखों को सहते हुए एक औरत अपनी सभी ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं। आज हम शास्त्रों के अनुसार ऋषि पंचमीके महत्व की बात करेंगे और जानेगे कि आखिर क्यों जरुरी हैं। (Rishi Panchami 2021) ऋषि पंचमी का व्रत महिलाओं के लिए। पंडित शक्ति मिश्रा ने कहाकि रजस्वला यानि माहवारी, मासिक धर्म महिलाओं का ये वो चक्र हैं जो हर महीने होता हैं।(Rishi Panchami 2021) लेकिन शास्त्रों में इन दिनों में कुछ परहेज बताये जाते हैं जिसका पालन आज के समय की महिलाये नहीं करती हैं।


ऋषि पंचमी व्रत की कथा (Rishi Panchami Vrat katha )

(Rishi Panchami 2021) पंडित शक्ति मिश्रा ने बतायाकि भविष्यपुराण में कहा गया है कि प्राचीनकाल में एक उत्तक नाम का ब्राह्मण था जो अपनी पत्नी सुशीला के साथ रहता था। उसके एक पुत्र और पुत्री थी। दोनों ही विवाह के योग्य थे। उत्तक ब्राह्मण ने सुयोग्य वर ढूंढकर अपनी पुत्री का विवाह उसके साथ कर दिया। (Rishi Panchami 2021) लेकिन कुछ ही दिनों के बाद उसके पति की अकाल मृत्यु हो गई। इसके बाद उसकी पुत्री अपने मायके में पिता के पास वापस आ गई।

(Rishi Panchami 2021) कहते हैं कि एक दिन विधवा पुत्री अकेले सो रही थी। तभी उसकी मां ने अचानक देखा कि उसकी पुत्री के शरीर पर स्वत: ही कई प्रकार के कीड़े उत्पन्न हो रहे हैं। अपनी बेटी की ऐसी दशा देखकर उत्तक की पत्नी दुखी हो गई। उसने अपने पति को बुलाया और दिखाया कि देखो हमारी बेटी की यह स्थिति कैसे हो गई है। इसने ऐसा कौन सा पाप किया था जो उसको ऐसा दिन देखना पड़ रहा है।

(Rishi Panchami 2021) उत्तक ब्राह्मण ने ध्यान लगाने के बाद देखा कि पूर्वजन्म में उनकी पुत्री किसी ब्राह्मण की पुत्री थी, लेकिन रजस्वला के दिनों में उसने पूजा के बर्तन छू लिए थे और इस पाप से मुक्ति के लिए ऋषि पंचमी का व्रत भी नहीं किया था। इस वजह से इस जन्म में इसके शरीर पर कीड़े पड़ गए। फिर पिता के कहने पर पुत्री ने पूरे विधि विधान के साथ ऋषि पंचमी का व्रत किया और तब जाकर उसे इस पाप से मुक्ति मिली।


उन्होंने बतायाकि रजस्वला स्त्री पहले दिन चाण्डालिनी, दूसरे दिन ब्रह्मघातिनी तथा तीसरे दिन धोबिन के समान अपवित्र होती है। वह चौथे दिन स्नान करके शुद्ध होती है। (Rishi Panchami 2021) यदि यह शुद्ध मन से अब भी ऋषि पंचमी का व्रत करें तो इसके सारे दुख दूर हो जाएंगे और अगले जन्म में अटल सौभाग्य प्राप्त करेगी।

Ritesh Singh
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