राम मंदिर के मसले पर भाजपा से रूठे साधु-संत, योगी आदित्यनाथ को मिली मनाने की जिम्मेदारी

मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने साधु-संतों को अंग-वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

By: Laxmi Narayan Sharma

Updated: 07 Jun 2018, 02:14 PM IST

लखनऊ. राम मंदिर निर्माण में हो रही देरी पर अपना गुस्सा जाहिर कर भाजपा को चेतावनी दे चुके अयोध्या के साधु-संतों ने गुरुवार को लखनऊ में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की। मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने साधु-संतों को अंग-वस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। भेंट करने के बाद बाहर निकले साधु-संत काफी उत्साहित नजर आये और उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें मंदिर निर्माण के साथ ही अयोध्या की सूरत बदलने का भी आश्वासन दिया है।

 

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कई संतों ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री से उनके सरकारी आवास पर मिलने दिगंबर अखाड़े के महंत सुरेश दास, उदासीन संगत ऋषि आश्रम के महंत भरत दास, राम जन्मभूमि न्यास से जुड़े महंत कमल नयन दास, बड़ा भक्त महल के महंत अवधेश दास, राम बल्लभा कुंज के राजकुमार दास सहित कई अन्य साधु-संत पहुंचे। मुलाकात के दौरान राम मंदिर निर्माण के साथ ही घाघरा का नाम बदलकर सरयू करने की भी मांग रखी गई। संतों ने बताया कि 25 जून को इलाहाबाद में होने वाले धर्म संसद में योगी आदित्यनाथ हिस्सा लेंगे और इस धर्म संसद में राम-मंदिर निर्माण मुख्य मुद्दा होगा।

 

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मंदिर-निर्माण पर हुई चर्चा

सीएम से मुलाकात के बाद साधु-संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री से राम मंदिर निर्माण को लेकर चर्चा हुई। संतों ने कहा कि अब बलिदान देने का नहीं बल्कि लेने का समय आ गया है। संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर चिंतित है। संतों से बातचीत में सीएम ने उम्मीद जताई है कि सुप्रीम कोर्ट से फैसला राम मंदिर के पक्ष में आएगा। साथ ही घाघरा का नाम बदलकर सरयू किये जाने के प्रस्ताव पर भी सीएम ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

साधु-संतों ने खोल रखा है मोर्चा

साधु-संतों की गुरुवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से हुई मुलाकात को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अयोध्या के कई प्रमुख साधु-संतों ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राम मंदिर निर्माण न होने पर भाजपा को अंजाम भुगतने की चेतावनी दी है। योगी आदित्यनाथ खुद संत हैं और माना जा रहा है कि साधु-संतों का करीबी होने कारण उन्हें मनाने की जिम्मेदारी योगी आदित्यनाथ को सौपी गई है। मुलाकात के बाद फिलहाल संतों के तेवर भले ही शांत दिख रहे हों लेकिन अब यह मसला आने वाले दिनों में तूल जरूर पकड़ता दिखेगा।

भाजपा के खिलाफ साधु-संतों में नाराजगी

पिछले कुछ दिनों से अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर प्रमुख साधु-संतों ने भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है। रामलला के मुख्य अर्चक आचार्य सत्येंद्र दास ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने भगवान राम के साथ बड़ी धोखाधड़ी की है। उन्होंने कहा कि यदि भाजपा को 2019 का चुनाव दोबारा जीतना है तो अयोध्या में भव्य राममंदिर का निर्माण शुरू करना होगा। इससे पहले अयोध्या में धर्म संसद का आयोजन कर भाजपा को चुनौती दी गई थी। धर्म सेना के संस्थापक व विवादित ढाँचे के ध्वंस के प्रमुख आरोपी संतोष दुबे ने कहा कि यदि सरकार ने समय रहते निर्णय नहीं लिया तो केन्द्र की मोदी व प्रदेश की योगी सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। उन्होने कहा कि राम लला टाट में और नेता लोग ठाठ में रहे अब यह नहीं चलेगा। कई संगठनों से जुड़े लोगों ने चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि भाजपा ने मंदिर निर्माण काम जल्द शुरू नहीं कराया तो वे खुद मंदिर निर्माण की पहल शुरू करेंगे।

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