यूपी सरकार से नहीं बची शिक्षा मित्रों को उम्मीद, अब दिल्ली घेरकर केंद्र से हस्तक्षेप की करेंगे अपील

योगी सरकार से संवाद खत्म होने के बाद शिक्षा मित्रों ने दिल्ली जाकर अपने आंदोलन को देशव्यापी आंदोलन बनाने की धमकी दी है।

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Published: 11 Sep 2017, 08:22 PM IST

लखनऊ. योगी सरकार से संवाद खत्म होने के बाद शिक्षा मित्रों ने दिल्ली जाकर अपने आंदोलन को देशव्यापी आंदोलन बनाने की धमकी दी है। योगी सरकार ने शिक्षा मित्रों का मानदेय दस हजार करने का फैसला लिया था लेकिन इससे उन्होंने इंकार कर दिया था। उनका कहना है कि काकोरी से दिल्ली के जंतर मंतर तक सभी शिक्षा मित्र पैदल यात्रा कर आंदोलन करेंगे। दिल्ली के लिए अलग-अलग गुटों में शिक्षा मित्र रवाना भी हो गए हैं।

उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षा मित्र संघ के उपाध्यक्ष श्याम लाल ने बताया कि उन्हें दस हजार का मानदेय मंजूर नहीं है। अब दिल्ली में बड़ा आंदोलन होगा। सरकार ने एक बार भी हमारे बारे में दिल से नहीं सोचा। सरकार की शायद मंशा ही ठीक नहीं है। इसी के विरोध में शिक्षा मित्र जल्द ही बड़ा आंदोलन करेंगे। बेसिक शिक्षा राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने बताया कि शिक्षामित्रों को अभी तक 3500 रुपये मानदेय मिलता था। सरकार ने इसे बढ़ाकर 10 हजार रुपये किया है जो कि शिक्षा मित्रों ने लेने से इंकार कर दिया है।

जंतर मंतर पर 1.50 लाख से ज्यादा शिक्षामित्र धरना देंगे।मोर्चा ने राज्य सरकार से शिक्षामित्रों का मानदेय 24 हजार रुपये महीने करने और शिक्षामित्रों को टीईटी से छूट के लिए नेशनल काउंसिल फॉर टीचर्स एजुकेशन की 10 अगस्त, 2010 की अधिसूचना के पैरा 4 में संशोधन कराकर शिक्षामित्रों को शामिल कराने की मांग की है। क्मोर्चा के नेता जितेंद्र शाही ने बताया कि 11 सितंबर से नई दिल्ली में जंतर मंतर पर अनिश्चितकालीन धरना दिया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकार ने शिक्षामित्रों की मांग पर कार्रवाई नहीं की तो आमरण अनशन शुरू किया जाएगा।

बता दें कि अखिलेश सरकार ने साल 2014 में स्नातक उत्तीर्ण और दूरस्थ शिक्षा विधि से दो वर्षीय बीटीसी प्रशिक्षण पूरा करने वाले शिक्षामित्रों को अध्यापक पात्रता परीक्षा (टीईटी) से छूट देते हुए प्राथमिक शिक्षकों के पदों पर समायोजित करने का फैसला किया था। फिर शिक्षामित्रों को शिक्षकों के पद पर समायोजित के लिए 19 जून, 2014 को शासनादेश जारी किया गया था। प्राथमिक विद्यालयों में तैनात 1.37 लाख शिक्षामित्रों का समायोजन हो चुका था जब हाई कोर्ट ने सरकार के इस फैसले को गलत ठहराते हुए समायोजन को रद्द कर दिया था।इस साल के जुलाई के महीने में सुप्रीम कोर्ट ने भी हाई कोर्ट के फैसले पर मुहर लगाते हुए उनके समायोजन को रद्द करने का निर्णय सुनाया था।

 

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