Shri Krishna Janmasthan Case: श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर 57 पेज के दावे में क्या हैं खास बातें

  • मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान आैर ईदगाह फिर सुर्खियों में।
  • श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर कोर्ट में दाखिल की गई है याचिका।
  • याचिका पर 30 सितम्बर को कोर्ट करेगा सुनवाई।

मथुरा. यूपी के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान और ईदगाह मस्जिद का विवाद सुर्खियों में है। दावा किया जा रहा है कि मंदिर की जमीन पर मस्जिद बनी हुई है, इसको लेकर कोर्ट में याचिका दाखिल की गई है। इस संबंध में श्रीकृष्ण जन्मस्थान को लेकर 57 पेज का दावा दायर किया गया है। इस दावे में रंजना अग्निहोत्री के साथ ही कुछ अन्य भक्त वादी हैं। इसमें श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान, ईदगाह ट्रस्ट और सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है। इस याचिका पर सुनवाई 30 सितंबर को की जाएगी। दावे में कुछ खास बिन्दू शामिल किये गए हैं। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता विष्णु जैन का कहना है कि यदि याचिका स्वीकार होती है तो सभी प्रतिवादी पक्षों को अपना पक्ष रखने के लिये समन जारी किया जाएगा। उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के अयोध्या फैसले के पैरा 117 में संकल्प अमर रहने के उल्लेख को इस दावे में बतौर नजीर शामिल किया गया है।


57 पेज के दावे की खास बातें

तत्कालीन केन्द्र सरकार की ओर से 1991 में 'प्लेसेज ऑफ वर्शिप एक्ट’ लागू किया था। इस अधिनियम की धारा 3 के तहत किसी पूजा के स्थान या उसके एक खंड को अलग धार्मिक सम्प्रदाय की पूजा के स्थल में बदलने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। याचिका कर्ता के अधिवक्ता विष्णु जैन के मुताबिक उस समय श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघ ने एक केस दायर किया था कि दूसरे पक्ष के लोग हमारी संपत्ति में घुस रहे हैं। यानि वहां मस्जिद जैसा कुछ नहीं रहा होगा।

 

1968 में श्रीकृष्ण जन्मभूमि सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह के बीच समझौता हुआ। हालांकि जमीन का स्वामित्व श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के पास था। 1992 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में संघ के कार्यों को लेकर एक केस दायर किया गया था। इस केस के बारे में फैसला देते हुए उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कहा है कि ट्रस्ट और संघ अलग हैं। यानि इस फैसले के आलोक में भी 'श्रीकृष्ण विराजमान’ का भूमि के मालिकाना हक का केस और मजबूत होता है।

 

हिंदू अधिनियम के मुताबिक किसी धर्मस्थल के निर्माण या उससे संबंधित कोई संकल्प कानूनी रूप से मान्य होता है। कोर्ट में भी इसकी लीगल वैल्यू है। इसे इस तरह समझा जा सकता है कि राजा पटनीमल ने कृष्ण जन्मभूमि के लिये संपत्ति खरीदी और मंदिर निर्माण का संकल्प लिया था। यानि 13.37 एकड़ भगवान की जमीन थी। बाद में 13500 रुपये में यह जमीन मदन मोहन मालवीय आदि ने खरीद ली। यानि संकल्प पूरी 13.37 एकड़ जमीन का हुआ उसे खंडित नहीं कर सकते।

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रफतउद्दीन फरीद
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