यूपी-बिहार में ठिठक जाएगा भाजपा का विजयी रथ

यूपी-बिहार में ठिठक जाएगा भाजपा का विजयी रथ

Alok Pandey | Publish: Mar, 14 2018 05:19:53 PM (IST) Lucknow, Uttar Pradesh, India

तीनों सीटों पर संयुक्त विपक्ष की ताकत ने भाजपा को दिन में तारे दिखा दिए हैं। अब संयुक्त विपक्ष बनाम भाजपा के संभावित समीकरणों को पंख लगना तय है

लखनऊ. उपचुनावों के नतीजों से भाजपा परेशान है। पार्टी के दिग्गजों ने अपने फोन स्विच ऑफ कर दिये हैं। जाहिर है कि यूपी-बिहार में भले ही तीन लोकसभा सीटों के लिए उपचुनाव हुए हैं, लेकिन तीनों सीटों पर संयुक्त विपक्ष की ताकत ने भाजपा को दिन में तारे दिखा दिए हैं। अब अगले वर्ष 2019 में आम चुनावों में संयुक्त विपक्ष बनाम भाजपा के संभावित समीकरणों को पंख लगना तय है। ऐसा होता है तो यूपी-बिहार में भाजपा पिछला करिश्मा दोहराना तो दूर, आधी सीटों पर कामयाबी भी शायद ही हासिल पर पाएगी। इसके साथ ही उपचुनाव के नतीजों ने सपा-बसपा के कार्यकर्ताओं की जुगलबंदी को मजबूत किया है, दोनों दलों के कार्यकर्ता उत्साह से लबरेज होंगे, जबकि भाजपा ब्रिगेड निराशा में डूबी दिखती है। भाजपा को नए सिरे से रणनीति बनानी होगी, जिद्दी फैसलों से तौबा करनी होगी। साथ ही जातीय गोलबंदी के मद्देनजर नए साथी भी तलाश करने पड़ेंगे।

2019 में मोदी मैजिक नहीं, जातीय समीकरण हावी होंगे

वर्ष 2014 के मुकाबले 2019 में आम चुनाव के मुद्दे नोटबंदी और जीएसटी के साथ-साथ जातीय गोलबंदी भी होगी। पिछले चुनावों में भाजपा में यूपी में मोदी की आंधी में 80 सीटों में 72 पर परचम लहराया था, जबकि बिहार में ४० सीटों में 31 एनडीए के खाते में आई थीं। इसके बाद वर्ष 2015 में बिहार विधानसभा चुनावों में जदयू और लालू यादव की पार्टी राजद के गठबंधन ने भाजपा को बुरी तरह नकार दिया था। विधानसभा चुनावों में एनडीए को कुल 243 सीटों में सिर्फ 58 पर जीत मिली थी, जबकि महागठबंधन के हिस्से में 178 सीट आई थीं। उसी दौर से देश की सियासत में भाजपा के खिलाफ संयुक्त विपक्ष की बात होती रही है। लालू यादव ने यूपी विधानसभा चुनावों के दौरान सपा और बसपा को एकजुट करने का प्रयास किया था, लेकिन कामयाब नहीं हुए। नतीजा भाजपा की प्रचंड जीत के रूप में सामने आया था। फिलहाल पिछले चुनावों से सबक लेकर उपचुनाव में सपा मुखिया अखिलेश ने बसपा प्रमुख की तरह सियासी साझेदारी का हाथ बढ़ाया, जोकि कामयाब रहा। ऐसे में अब विभिन्न राज्यों में भाजपा विरोधी दल एकजुट होंगे। ऐसा होने पर यूपी और बिहार में भाजपा का रथ ठिठना तय है।

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