गठबंधन के दलित मुस्लिम पे्रम के जवाब में भाजपा की जाट और गूजर मोहब्बत

गठबंधन के दलित मुस्लिम पे्रम

 

By: Anil Ankur

Published: 10 Apr 2019, 11:45 AM IST


लखनऊ। बसपा सुप्रीमो मायावती के गठबंधन की रैली में दलित- मुस्लिम प्रेम प्रदर्शन के बाद भाजपा पश्चिम उत्तर प्रदेश में जाट और गूजर मतों को मोहब्बत में फंसाने की कोशिश में लग गई है। जाट और गुर्जर समुदाय पश्चिमी यूपी की दो दर्जन से ज्यादा सीटों पर चुनाव परिणाम को पलटने का माद्दा रखते हैं।

उल्लेखनीय है कि बीते लोकसभा चुनाव में भी दोनों समुदायों ने कम से कम 25 सीटों पर निर्णायक भूमिका निभाई थी, इन सभी पर बीजेपी ने विपक्ष को दूर का रास्ता दिखा दिया था। इस बार सपा बसपा और रालोद गठबंधन में हैं तो जाट और गुर्जर वोटों के बंटने की भी गुंजाइश है। बीजेपी ने पहले दो चरण के लिए जाट-गुर्जर समुदायों से 12 उम्मीदवार उतारकर इन्हें एकजुट करने की कोशिश की है तो वहीं जवाब में गठबंधन ने इन समुदायों से 8 उम्मीदवारों को टिकट दिया है। यह बात तय है कि भाजपा भले ही जाट गूजर प्रेम प्रदर्शित कर रही हो, पर चौधरी अजित सिंह जाटों के एक छत्र नेता रहे हैं। अब बारी सिर्फ सेंधमारी की है।

25 से 30 फीसदी वोट जाट-गुर्जर समुदाय से
खास बात तो यह है कि रिकार्ड बताते हैं कि पश्चिमी यूपी में जाट और गुर्जरों की वोटिंग में 25 से 30 फीसदी तक भागीदारी होती है। ये जाट और गुर्जर परंपरागत रूप से खेती से जुड़े हुए हैं। भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता और जाट नेता राकेश टिकैत कहते हैं कि किसी एक को उनके हितों को अपने दिमाग में रखना होगा और यही चुनावी परिणाम का फैसला करेगा। 2014 में इन दोनों समुदायों ने बीजेपी के पक्ष में जमकर वोट किया था। पर किसान न खुश हैं।

एक और किसान मुद्दा- गन्ना बकाया
किसान नेता राकेश टिकैत की बात माने तो वह कहते हैं कि इस बार स्थिति बदली हुई है। एसपी-बीएसपी और आरएलडी के साथ आने से बीजेपी को बड़ी चुनौती मिलने वाली है। कोई भी गुर्जर और जाट वोटों के बंटने की संभावना से इनकार नहीं कर सकता, जो बीजेपी की उम्मीदों पर सेंध लगा सकता है। गठबंधन ने 10 हजार करोड़ रुपये की गन्ना बकाया राशि पर भी बीजेपी को घेर लिया है। अब किसान इन मुद्दों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर सकते हैं।

कहां कहां है जाट गूजर बेल्ट
अगर हम पश्चिम उत्तर प्रदेश पर नजर डालें तो पता चलता है कि बिजनौर, मुजफ्फरनगर, कैराना, बागपत और मेरठ में जाट फैक्टर निर्णयात्मक फैक्टर साबित होने वाला है जबकि गौतमबुद्ध नगर, गाजियाबाद, सहारनपुर और बुलंदशहर में भी ये दमदारी से अपना पक्ष रखते हैं। रालोद मुखिया अजित सिंह और उनके बेटे जयंत चौधरी ने जाट वोटरों को लुभाने के लिए ही अपनी सीट बदली है। अब देखने की बात होगी कि मतदान के दिन ऊंट किस करवट बैठता है।

 

Anil Ankur Desk/Reporting
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