सपा प्रवक्ता ने योगी सरकार को घेरा, कहा- 'डर' की वजह से 30 फीसदी बाहरी बच्चे यूपी में नहीं ले रहे एडमीशन

Hariom Dwivedi

Publish: Oct, 13 2018 05:13:27 PM (IST) | Updated: Oct, 13 2018 05:14:56 PM (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India

लखनऊ. एक माता पिता अपनी इकलौती बेटी का दाखिला कराने चंद्रशेखर आज़ाद कृषि विवि कानपुर में कराने तमिलनाडु से आए थे। वे जरूरत का सामान खऱीद कर लौट रहे थे। गेट में घुसने से पहले माता के गले में पड़ी चेन उचच्के खींच ले गए। लगभग डेढ़ लाख की थी। माता-पिता ने तत्काल फैसला लिया, बेटी को यहां नहीं पढ़ाएंगे। वे यूनिवर्सिटी के वीसी और रजिस्ट्रार आदि से मिले। दाखिला निरस्त करा लिया और चले गए। प्रदेश के विवि की क्या प्रतिष्ठा रहेगी? राजधानी लखनऊ में एनेक्सी का इलाका सबसे सुरक्षित माना जाता है। शुक्रवार की शाम सीएम योगी यहां समीक्षा बैठक कर रहे थे। बीच सड़क पर एक व्यक्ति ने नमाज पढऩी शुरू कर दी। उसने कमर में चाकू बांध रखी थी। नमाज के दौरान वह योगी और मोदी के लिए अपशब्दों का प्रयोग करता रहा। तब तक रोड जाम। पुलिस तमाशबीन बनी रही। यह दो उदाहरण हैं उप्र की कानून-व्यवस्था का हाल जानने के लिए। जब योगी जी मुख्यमंत्री बने उन्होंने रोमियो स्क्वॉड बनाए थे, यह महीने भर नहीं चले। योगी जी हों या मोदी जी सबके वादे झूठ में क्यों बदल जाते हैं? तमिलनाडु से आई वह लडक़ी मायूस होकर चली गई। उसके सपने बिखर गए। आखिर प्रदेश की कितनी बदनामी होगी। यह दो घटनाएं छोटी हो सकती हैं। लेकिन प्रदेश की बदनामी कराने में यह अहम भूमिका अदा करेंगी।

आखिर आम आदमी कानून व्यवस्था पर कैसे विश्वास करेगा? आए दिन खबरें आती हैं। शोहदों के डर से लड़कियों ने स्कूल जाना छोड़ दिया। तो क्या रोमियो स्क्वॉड महज शहरी युवाओं को परेशान करने के लिए बना था। सूबे में हर रोज एनकाउंटर हो रहे हैं फिर भी अपराधी बेखौफ हैं। पुलिस थाने से 50 मीटर दूर राजधानी में दो लोगों को गोलियों से भून दिया जाता है। बेखौफ हत्यारे भाग निकलते हैं। न जनता कुछ बोलती है और न ही पुलिस में कोई हरकत होती है। जब भीड़तंत्र अपने पर उतरता है तो कई थानों की पुलिस बुला ली जाती है। फिर मामला शांत। आखिर यह किस बात का संकेत है। हम कैसा समाज बना रहे हैं। किस तरह का राजतंत्र चला रहे हैं।
भाजपा सरकार सूबे से बेरोजगारी खत्म करने के वादे के साथ आयी थी। लेकिन, योगी सरकार में युवा ही सबसे ज्यादा परेशान हैं। उन्हें न तो नौकरियां मिल रही हैं और न ही बेरोजगारी भत्ता। अखिलेश की सपा सरकार में शुरू किए गए बेरोजगारी भत्ते को भी बंद कर दिया गया है। पिछले डेढ़ साल में योगी सरकार ने जितनी नौकरियां निकालीं उनमें से किसी का भी अभी तक रिजल्ट नहीं आया। सभी नौकरियों में जमकर भ्रष्टाचार हुआ। इससे युवा नाराज और निराश हैं।

 

(लेखक समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता हैं)

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