जनता ने ली शपथ, चीं-चीं करके आने वाली गौरैया को हम सब मिलकर बचाएंगे

वितरित किये मिट्टी के बर्तन, काकून, बर्ड हाउस उपहार में दिया, शपथ दिलाई कि घरों, छतों ,बालकनी ,बगीचे में गौरैया के लिए दाना और पानी रखेंगे

 

By: Ritesh Singh

Updated: 19 Mar 2021, 08:26 PM IST

लखनऊ। गौरैया दिवस के उपलक्ष में शुक्रवार सुबह चैतन्य वेलफेयर फाउंडेशन द्वारा लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क के बाहर सुबह सात बजे से गौरैया संरक्षण जागरूकता अभियान चलाया । संस्था द्वारा पार्क में आने-जाने वाले और आसपास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को विलुप्त होती हुई नन्ही मुन्ही चिड़िया (गौरैया) को बचाने के विभिन्न तरीकों के बारे में जानकारी दी गई। उन्हें मिट्टी के बर्तन, काकून और बर्ड हाउस उपहार स्वरूप देकर शपथ दिलाई गई कि वे प्रतिदिन अपने घरों, छतों ,बालकनी ,बगीचे आदि में गौरैया के लिए दाना और पानी रखेंगे। संस्था द्वारा पिछले पांच वर्षों से गौरैया संरक्षण अभियान के प्रयास किए जा रहे हैं।

संस्था की अध्यक्षा ओम सिंह ने कहा 'पर्यावरण असंतुलन, वातावरण का अत्यधिक तापमान, सीमेंट के बने हुए पक्के मकान, अल्ट्रावायलेट किरणों, मोबाइल टावरों, प्रदूषण , कीटनाशक दवाएं आदि अनेक वजहों से अब गौरैया विलुप्त होने के कगार पर है, अगर हम समस्त मानव जाति को पर्यावरण संतुलन स्थापित करना है तो हमें गौरैया को बचाने के इन सभी उपायों को अपनाना ही होगा। गौरैया को एक तो भोजन नहीं मिल पाता और यदि मिलता भी है तो उसमें इतने कीटनाशक दवाइयां पड़ी होती हैं जिनको खाकर गौरैया मर जाती हैं। गौरैया के चहचहाने की आवाज से हमें मानसिक शांति और सुकून मिलता है।

गौरैया के रखवालों के बीच लखनऊ में 'बर्ड टॉवर' बनाने की उठी मांग

जागरूकता अभियान में लखनऊ विश्वविद्यालय की प्रोफेसर डॉ अमिता कनौजिया उपस्थित रहीं, उन्होंने विस्तार से वहां उपस्थित सभी लोगों को गौरैया संरक्षण की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यदि हम खेतों में कीटनाशक दवाइयों का प्रयोग बहुत कम करें, छतों पर उनके लिए दाना और पानी रखें, ध्वनि प्रदूषण और वायु प्रदूषण कम कर दें तो काफी हद तक गौरैया की प्रजाति को बचाया जा सकता है। अधिकतर यह कनेर ,नींबू ,अमरूद ,अनार, चांदनी ,मेहंदी के पेड़ में अपना घोंसला बनाना पसंद करती हैं। ऐसे कीट पतंगे जो मानव जाति को नुकसान पहुंचाते हैं, उन्हें गौरैया खाकर हमें लाभ देती हैं। डॉ अमिता कनौजिया प्रयासरत हैं कि उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक बर्ड टावर बनाया जाए, जहां पर बड़ी संख्या में उनके दाना पानी की व्यवस्था हो और चिड़ियों की चहचहाहट से मानव जाति को अनेक प्रकार के लाभ मिले।

समाजसेवी कृष्णानंद राय ने गौरैया पर बहुत सुंदर गीत की प्रस्तुति देकर लोगों को जागरूक किया। वर्ड लवर मुकेश सिंह पिछले तीन सालों से प्रतिदिन जनेश्वर मिश्र पार्क में पंछियों के लिए दाना और पानी की व्यवस्था करते हैं। समाजसेवी संकल्प शर्मा ने कहा कि आज मेरी आयु लगभग 63 वर्ष की हो गई है। मुझे बचपन के वो दिन याद आते हैं जब कच्चे मकान हुआ करते थे। घर के आंगन में कोई न कोई पेड़ अवश्य हुआ करता था। अगर घर में नहीं होता था तो घर के बाहर तो होता ही था। भोर से ही पक्षियों की चहचहाट हमको उठने को मजबूर कर देती थी और जब हम आंख खोलकर देखते थे तो चिड़िया, कैव्वा, गौरैया, गिलहरी और नाना पक्षियों को जब हम देखते थे तो मन प्रसन्नता से भर जाता था। इन पक्षियों को दाना पानी देने की प्रथा थी और उसमें सभी छोटे बड़े का सहयोग रहता था। जो आज कहीं लुप्त हो गया है। आज के समय में यह प्रयास सराहनीय है और जो इस कार्य को आगे बढ़ाने में लगे हैं सच में वो देवदूत से कम नहीं।

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