Exclusive Interview: पहली ही पोस्टिंग में मौत को काफी करीब से देखा - SSP दीपक कुमार

Dhirendra Singh

Publish: Oct, 12 2017 04:10:11 (IST) | Updated: Oct, 12 2017 05:40:47 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
Exclusive Interview: पहली ही पोस्टिंग में मौत को काफी करीब से देखा - SSP दीपक कुमार

एसएसपी दीपक कुमार ने राजधानी की कानून व्यवस्था और जिंदगी से जुड़े सवालों के दिए सीधे जवाब।

धीरेन्द्र सिंह

पांच महीने से लखनऊ की कानून व्यवस्था की जि मेदारी एसएसपी दीपक कुमार बाखूबी निभा रहे है। पुलिस की कार्यप्रणाली और व्यवहार में एसएसपी ने काफी बदलाव किये। इसी बीच राजधानी में सालों बाद एनकाउंटर की भी गूंज सुनाई पड़ी। पत्रिका ने कानून व्यवस्था को लेकर कई सवाल किये, इसके अंश इस प्रकार हैं...


Q - दीपावली के त्योहार के मद्देनज़र सुरक्षा व्यवस्था को लेकर क्या तैयारी है?
A - दीपावली के साथ लगातार कई त्योहार होते हैं। बाजारों में फोर्स तैनात की गई है। ज्वैलरी शॉप पर विशेष सिक्योरिटी है। अवैध पटाखा कारोबार पर लगाम लगाया जा रहा है। वहीं आराजकतत्वों पर भी निगरानी रखी जा रही है।

Q - मोहर्रम में लखनऊ हिंसा प्रभावित नहीं हुआ, कैसे देखते हैं?
A - जिले में मोहर्रम के दौरान एक भी विवादित मामला सामने नहीं आया। पहली बार मोहर्रम जुलूस का लखनऊ में रास्ता बदला। पुलिस ने बखुबी अपनी जिम्मेदारी निभाई।

Q - एनकाउंटर का दौर फिर शुरु हो गया, ऐसा क्यों?
A - एनकाउंटर एक रिस्पॉस है, इसमें मानवाधिकार की नियम पालन होने चाहिए। लखनऊ में एक अपराधी मारा गया। उसने पार्षद का दिनदहाड़े हत्या की थी। जेलर को धमकी दी थी। वह जेलर आगरा से आकर बोला की वह बहुत परेशान था, अब राहत महसूस कर रहा है। हमने 24 घंटें में ह्यूमन राइट कमीशन को पूरी रिपोर्ट दी। परिवार को आरोपी का शव भी सौंपा।

Q - अपराध और अपराधी को खत्म करने के लिए एनकाउंटर जरूरत बन गया है?
A - पुलिस पर आंतरिक सुरक्षा का का दायित्व है। पुलिस शासन की ताकत का प्रतीक है। पुलिसकर्मी पर हमला होता है, तो लोग समझते है कि पुलिस व शासन कमजोर पड़ रहा है। जनता में निराश उत्पन्न होने लगती है। वादा है हमारा हाथ पहले नहीं उठेगा, लेकिन कोई हम पर हमला करेगा तो निश्चित रुप से जवाब देंगे।

Q - लखनऊ पुलिस का नेतृत्व कर अब खुश हैं?
A - देखिए, मैं लखनऊ में जब आया तब पुलिस वीआईपी ड्यूटी कर ही खुश हो जाती थी। लेकिन क्राइम पर काम कम होता था। फिर उन्हें सही तरीके से बिना दबाव के काम करने के लिए मोटिवेट किया। अब रिजल्ट देख सकते हैं, सभी त्योहार शांतिपूर्ण रहें। क्राइम पर काफी काम हुआ है।

Q - पूर्व में इतने सस्पेंशन और लाइन हाजिर नहीं हुए, यह कदम क्यों उठाना पड़ा?
A - पुलिस का काम जनता की सेवा करना है। यदि आम जनता पुलिसकर्मी से संतुष्ट नहीं है, व कोई शिकायत आती है। तब जांच कराता हूं। दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई पुलिसकर्मी के खिलाफ भी की जाती है।

Q - पुलिस राज में विश्वास करते है या जनता राज में?
A - जनता मालिक है और हम लोग जनता के सेवक हैं। पुलिस जनता का अंग है, व उन्हीं के लिए हैं। जनता राज की रक्षा के लिए पुलिस की जरुरत है।

Q - लखनऊ के पॉश इलाकों में क्राइम नहीं रूक रहा, क्यों?
A - लखनऊ के क्राइम ग्राफ में जुलाई महीने से काफी गिरावट आई है। पिछले वर्षों का डाटा और अब में काफी अंतर हैं। बाईक स्टंट, चेन स्नैचिंग, व अन्य मामलों पर भी नकेल कसी गई है।

Q- राजधानी से विदा होने से पहले क्या बड़े बदलाव करना चाहते हैं?
A - लखनऊ में कम्युनिटिंग पुलिसिंग को बढ़ावा देने की जरुरत हैं। कम्युनिटिंग ओरिएंटेड पुलिसिंग मेरा लक्ष्य हैं। प्रत्येक वार्ड से दस-दस लोगों की कमिटी व व्यपार मंडल व अन्य के साथ मीटिंग करेंगे। लोग क्या चाहते हैं जानेंगे। गांव-गांव तक पुलिस पहुंचेगी। दूसरा ट्रैफिक में लोगों के सहयोग से मैनेज करने की योजना है।

Q - पुलिकर्मियों के वीक ऑफ को लेकर आप क्या सोचते हैं?
A - ये पूरा पॉलिशी मैटर है। लेकिन इतना कहूंगा हमारे पुलिसकर्मियों को परिवार को भी समय देना जरूरी है। तभी वह अच्छे मन से काम कर पाएंगे।

Q - लगातार ड्यूटी पर रहने से परिवार में सामंजस्य कैसे बनता है?
A - सभी पुलिसकर्मियों की पत्नियों को धन्यावाद देना चाहिए कि वह बहुत अच्छी होती है। हम उन पर ध्यान नहीं दे पाते हैं। फिर भी वह हमारा पूरा ख्याल रखती है।

Q - एक रिपोर्ट के मुताबिक 37 प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हैं, पुलिस क्या कदम उठाएगी?
A - देखिए, महिलाओं की सुरक्षा सरकार और पुलिस की प्राथमिकता में है। जब कम्युनिटिंग पुलिसिंग करेंगे, तो महिलाएं भी उसमें सामने आएंगी। तो वह अपनी बात पुलिस के सामने भी रख सकेंगे।

Q - लाइफ का कोई किस्सा जब जान पर बन आई हो?
A - मेरी पहली पोस्टिंग एएसपी मोदीनगर में हुई थी। अक्टूबर 2007 में कुख्यात अपराधी विक्रम को पकड़ने के लिए मेरे नेतृत्व में टीम बनी। उस वक्त मौत को काफी करीब से देखा। विक्रम लोगों को तारीख बता कर मारने का दावा करता था। टीम की एक दिन विक्रम से मुठभेड़ हुई। आरोपी हम पर गोलियां चला रहा था। मैं तो गोली से बचा गया, लेकिन एक गोली मेरी टीम के दारोगा राजेश वर्मा को पेट में जा लगी। मैंने खुद राजेश को उठाकर गाड़ी बैठाया और अस्पताल ले गया। बड़ी मुश्किलों से उनकी जान बची।

Q - पहला पुलिस सम्मान कब मिला?
A - जब मैं एएसपी गाजियाबाद था, तब दो डकैत जिनका उतरांचल व यूपी में काफी टेरर था। वो बैंक डकैती की योजना बना रहे थे। मुठभे़ड़ में दोनों मारे गए। इसी मामले में वीरता का पुलिस पदक राष्ट्रपति द्वारा सम्मान स्वरूप मिला।

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