जबरन सेवानिवृत्ति के विरोध में योगी सरकार को घेरने की तैयारी, स्क्रीनिंग के नाम पर प्रताड़ित करने का आरोप

राज्य में कर्मचारियों की परेशानी हल न होने पर योगी सरकार का घेराव करने की बड़ी तैयारी।

By: Dhirendra

Published: 18 Aug 2017, 08:15 PM IST

लखनऊ. उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार बनने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी में सभी सरकारी विभागों में स्क्रीनिंग की कार्रवाई को तेज कर दिया। इसमें 50 साल की उम्र पूरी कर चुके कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त करने का दवाब बनाया जा रहा है। इन आरोपों के साथ राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद, उ.प्र योगी सरकार के खिलाफ जल्द बड़ा आन्दोलन कर अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में है। वहीं सरकारी विभागों में काम कर रहे सभी कर्मचारियों के हिस से जुड़े काम न होने से सरकारी कर्मचारियों में रोष है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के मुख्य संयोजक जेएन तिवारी, महामंत्री शशि सिंह सहित अन्य पदाधिकारियों ने बैठक की। इस दौरान जेएन तिवारी ने बताया कि परिषद के पदाधिकारियों ने 8 जून को सीएम से मुलाकात कर कर्मचारियों की समस्याएं उनके सामने रखी थी, इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जल्द सकारात्मक फैसला लेने का आश्वासन दिया। लेकिन इसके विपरित विभिन्न विभागों में कर्मचारियों की स्क्रीनिंग कराए जाने और 50 साल से ऊपर के अक्षम कर्मचारियों को हटाने का फरमान सुना दिया गया। उन्होंने कहा कि पूर्व से चली आ रही समस्याओं पर सरकार का ध्यान नहीं जा रहा है। उन्होंने बताया कि सरकार कर्मचारियों के सातवें वेतन विसंगतियों पर निर्णय नहीं कर रही है। विभिन्न विभागों की भर्तियों पर रोक लगा दी गई है।

संविदा, ठेकेदारी प्रथा पर खड़े किए सवाल

जेएन तिवारी ने कहा कि संविदा और ठेकेंदारी प्रथा में कर्मचारियों के हित में नहीं होती है। ऐसे में संविदा, आउटसोर्सिंग व ठेकेदारी प्रथा बंद होने चाहिए। विकल्प के तौर पर यदि ऐसा किया भी जाए तो दो साल के अंदर उन कर्मचारियों को नियमित किया जाए। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों में लाखों पद खाली पड़े हुए हैं। अगर राज्य सरकार जिम्मेदारी पूर्वक इन पर भर्तियां करा दें तो रोजगार की समस्या भी खत्म हो सकती है।

स्क्रींनिंग की आड़ में हो रहा शोषण

संयुक्त परिषद की महामंत्री शशि सिंह ने कहा कि राज्य सरकार 50 साल आयु पूरी कर चुके कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त करने का दवाब बना रही है। ऐसे में अधिनस्त कार्यालयों में जानबूझकर उन कर्मचारियों को हटाने की साजिश भी हो रही है, जो संगठनों में सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि पीलीभीत व अन्य जिलों में ऐसे मामले देखने को मिल चुके हैं। वहीं शासन के इस निर्णय का इस्तेमाल कर्मचारियों को डराने-धमकाने और उनका उत्पीड़न करने में किया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश केवल बहाना

शशि सिंह ने कहा कि शिक्षा मित्रों के समायोजन में सरकार सुप्रीम कोर्ट के आदेश का बहाना बना शिक्षा मित्रों का शोषण कर रही है। वहीं दैनिक वेतन भोगी कर्मचारियों, संविदाकर्मियों को नियमित नहीं किया जा रहा है। ठेकेदारी और आउट सोर्सिंग प्रथा पर काबू नहीं हो पा रहा है। आलम यह है कि बीटेक, एमटेक जैसी डिग्री धारक भी रोजगार न मिलने पर 3500 रुपये की नौकरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने अब इस सभी मुद्दों पर संज्ञान नहीं लिया तो 11 सितंबर को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद हजारों कर्मचारियों के साथ सचिवालय का घेराव कर प्रदर्शन करेगा।

Dhirendra
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned