सीएम योगी की दी मियाद हुई खत्म, यूपी में छुट्टा जानवरों की समस्या जस की तस, कानपुर में लगी धारा 144

किसानों के साथ-साथ विपक्षी दलों के तेवरों ने सरकार की नींद उड़ा रखी है...

By: Hariom Dwivedi

Published: 10 Jan 2019, 04:57 PM IST

लखनऊ. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेसहारा व आवारा पशुओं को गौ-संरक्षण केंद्रों में 10 जनवरी तक पहुंचाने के निर्देश दिये थे। मुख्यमंत्री द्वारा दी हुई मियाद खत्म हो चुकी है, लेकिन उत्तर प्रदेश में छुट्टा जानवरों की समस्या जस की तस है। अन्ना पशु किसानों और राहगीरों के लिए समस्या बने हुए हैं। अभी भी किसान रात-दिन जागकर खेतों की रखवाली कर रहे हैं, बावजूद फसल बचाना मुश्किल है। गुस्साये किसान अस्पतालों और स्कूलों में मवेशियों को भरकर अपना विरोध जता रहे हैं। गुरुवार को कानपुर देहात में आक्रोशित किसानों ने जगम्मनपुर धीर प्राथमिक विद्यालय में पढ़ने आए बच्चों की छुट्टी करा दी और विद्यालय परिसर में अन्ना पशुओं को कैद कर दिया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेश के बावजूद गौशाला नहीं बन सकी।

मामले में रसूलाबाद तहसीलदार जगरूप सिंह ने किसानों से कहा कि जानवर तुम्हारे हैं, विदेश से नहीं आए हैं और बच्चे भी तुम्हारे हैं। पढ़ाई का नुकसान तुम्हारे बच्चों का हो रहा है। गौशाला के लिए काम चल रहा है, 12 तारीख तक बन जाएगा। कानपुर देहात ही नहीं कई अन्य जिलों में किसानों ने पशुओं को स्कूल और अस्पतालों बंद कर विरोध जताया। चित्रकूट के मऊ विकासखंड में किसान यूनियन की महापंचायत में किसानों ने केंद्र व प्रदेश को कोसते हुए बड़े आंदोलन की चेतावनी दी। हजारों किसानों की मौजूदगी में यूनियन के नेताओं ने सरकार को किसान विरोधी बताते हुए बीजेपी सरकार पर किसानों की अनदेखी का आरोप लगाया।

किसानों के साथ-साथ विपक्षी दलों के तेवरों ने सरकार की नींद उड़ा रखी है। मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय ने सूबे के सभी जिलाधिकारियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग कर उन्हें टास्ट फोर्स बनाने के निर्देश दिये हैं। साथ ही निराश्रित पशुओं के सड़क पर न घूमते दिखाई देने की चेतावनी दी है। मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि यूपी के हर जिले में ग्राम पंचायत स्तर पर ग्राम विकास, राजस्व, पुलिस, पंचायतीराज व पशुधन विभाग के गांव स्तर के कार्मिकों और ग्राम प्रधानों के साथ मिलकर टास्क फोर्स बनाकर अस्थायी गौवंश आश्रय स्थलों को विकसित किया जाये। इन आश्रय स्थलों पर निराश्रित गौवंश के लिए चारे-पानी, छाया की व्यवस्था और बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण की व्यवस्था की जाये।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य सचिव ने जिलाधिकारियों से सख्त लहजे में आवारा पशुओं के मालिकों का पता लगाकर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई और गो-संरक्षण केंद्र से अपने पशु को छुड़ाने के लिए आने वालों से जुर्माना भी वसूलने के निर्देश दिये हैं। उन्होंने कहा कि अब शहर की सड़कों पर निराश्रित जानवर घूमते नजर नहीं आने चाहिये। गौवंश आश्रय स्थलों के अस्थायी निर्माण के लिए नामित कार्यदायी संस्थाएं अगर तय समय में अपना काम पूरा नहीं करती, तो उन्हें ब्लैक लिस्टेड किया जाये।

अन्ना जानवरों के लिए पहली बार धारा 144 लागू
अन्ना जानवरों की समस्या से निपटने के लिए कानपुर जिले में पहली बार धारा 144 लगाई गई है, जो 28 फरवरी तक लागू रहेगी। एडीएम वित्त संजय चौहान ने कहा कि पशुओं को खुला छोड़ा जाना पशु क्रूरता अधिनियम में आता है। छुट्टा पशुओं के कारण किसी भी व्यक्ति मौत होने पर पशु मालिक के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। पुलिस-प्रशासन को भी छुट्टा जानवरों के मालिक के खिलाफ कार्रवाई करने की अनुमति होगी। जिले में धारा 144 लगे रहने तक न तो कोई भी व्यक्ति पशुओं की घटनाओं को लेकर उत्तेजक नारेबाजी या भाषणबाजी नहीं कर सकेगा। जानवरों को खुला छोड़ना और उन्हें स्कूल/अस्पताल या अन्य किसी जगह बंद करना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा।

Hariom Dwivedi
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