सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अयोध्या में विवादित जमीन की निगरानी करने को नियुक्त होंगे पर्यवेक्षक

अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि की निगरानी के लिए देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट भी बेहद गंभीर है।

By: shatrughan gupta

Published: 11 Sep 2017, 10:46 PM IST

लखनऊ. अयोध्या में विवादित राम जन्मभूमि की निगरानी के लिए देश की शीर्ष अदालत सुप्रीम कोर्ट भी बेहद गंभीर है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दिलीप बाबा साहेब भोसले से अयोध्या की विवादित जमीन की निगरानी के लिए दो न्यायमूर्ति को पर्यवेक्षक (ऑब्जर्वर) नियुक्त करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि वह 10 दिन में दो न्यायमूर्ति को ऑब्जर्वर नियुक्त करें। इनमें जिला जज, अतिरिक्त जज या स्पेशल जज हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने छह जिलों के जजों की सूची इलाहाबाद हाईकोर्ट को वापस भेज दी है।

इस बारे में बाबरी मस्जिद के पैरोकार मोहम्मद हाशिम अंसारी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की मांग को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकरा दिया। कपिल सिब्बल ने मांग की थी कि पहले के ऑब्जर्वर टीएम खान और एसके सिंह को इस पद पर ऑब्जर्वर रहने दिया जाए। कपिल सिब्बल ने कहा है कि यह बीते 14 वर्ष से ऑब्जर्वर हैं। इस कारण यह बेहतर होगा कि उनसे पूछ लिया जाए कि क्या वे ऑब्जर्वर बना रहना चाहते हैं या नहीं। दरअसल, यह सेशन जज थे, जिनमें एक टीएम खान रिटायर हो गए हैं और एसके सिंह हाईकोर्ट के जज बन गए हैं। ऑब्जर्वर हर दो हफ्ते में जगह का निरीक्षण कर, वहां के हालात को परखते हैं।

मालूम हो कि देश की सर्वोच्च अदालत सुप्रीम कोर्ट इस बहुप्रतीक्षित मामले की अंतिम सुनवाई पांच दिसम्बर से करने वाली है। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ 13 अपील शीर्ष अदालत में लंबित पड़े हुए हैं। बताते चलें कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) सहित कई हिंदू संगठनों का दावा है कि हिंदू देवता भगवान राम का जन्म ठीक वहीं हुआ, जहां बाबरी मस्जिद थी। इसी विवाद के चलते छह दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद हजारों कार सेवकों द्वारा ढहा दिया गया था। इसके अलावा यहां जमीन के मालिकाना कब्जे को लेकर भी विवाद चल रहा है। मालूम हो कि सितंबर 2010 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला देते हुए विवादित बाबरी मस्जिद के बीच के गुम्बद को राम जन्म भूमि मानते हुए विवादित डेढ़ हजार वर्ग मीटर की जमीन का तीन पक्षों में बंटवारा कर दिया था।

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