तलाक से तो मिली आजादी मगर कब बंद होगा मुस्लिम समाज में करार निकाह


मर्द बनाम औरतों की जंग में पहली जीत महिलाओं को

By: Santoshi Das

Updated: 22 Aug 2017, 03:43 PM IST

लखनऊ। सर्वोच्च न्यायालय ने तीन तलाक में अहम् फैसला देते हुए तीन तलाक पर रोक लगा दी है. पांच जजों की कमिटी में से तीन ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया तो दो ने तीन तलाक को यथावत जारी रखने की बात कही. मगर पांचों ने एक सुर में केंद्र सरकार को तीन तलाक पर कानून बनाने की अहम् ज़िम्मेदारी सौंप दी है. कोर्ट के इस फैसले के बाद भारत में सबसे ज्यादा जश्न का माहौल लखनऊ में मनाया गया.मुस्लिम महिला लीग की जनरल सेक्रेटरी नाइस हसन ने कहा की तीन तलाक का मुद्दा शायराबानों ने गरमाया था लेकिन यूपी में इसको यूपी की महिलाओं ने एक नेशनल मुद्दा बनाया था.


कोर्ट का फैसला आते ही यूपी में मुस्लिम औरतें एक दुसरे को मिठाई खिलाते हुए दिखाई दी. इस मसले पर नाइस हसन ने कहा कि तीन तलाक का मुद्दा अभी की महिलाओं का नहीं है. यह मसला तो 1905 से गरमा रहा है. मगर इस पर बोलने के लिए महिलाओं में हिम्मत पिछले 10 से 15 साल में आई है.

पीएम मोदी की फैन हुई महिलाएं
तीन तलाक से पीड़ित महिलाओं ने पीएम मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि आज तक किसी भी सरकार ने इस मुद्दे को नहीं उठाया था. मुस्लिम समाज के मौलानाओं ने ही इस अनैतिक क़ानून को अनदेखा किया। भाजपा सरकार के आते ही इस तरफ पीएम मोदी की नज़र गई. इसके बाद पूरे मुस्लिम समाज में तीन तलाक को ख़त्म करने की आवाज उठी इसकी दें भाजपा को जाता है.

नया निकाहनामा लागू हो जल्द
ऑल इण्डिया मुस्लिम महिला पर्सनल लॉ बोर्ड की अध्यक्ष शाइस्ता अंबर ने कहा कि हाल ही में वह पीएम मोदी से दिल्ली में मुलाक़ात करके लौटीं हैं. उनको उम्मीद थी सर्वोच्च न्यायायल द्वारा जो भी फैसला आएगा वह महिलाओं के पक्ष में होगा। आज का दिन हम मुस्लिम महिलाओं के लिए ऐतिहासिक दिन है. इस फैसले के बाद महिलाओं की जंग मिल गया है. इस कड़ी में अब नए शरई निकाहनामे को भी लागू कराने की मांग हमने पीएम मोदी से की है. नए निकाहनामे के तहत ऐसा कानून है जिसमें महिलाओं के साथ निकाह में धोखाधङी करना आसान नहीं होगा।

आधार से जुड़ेगा निकाहनामा
शाइस्ता अंबर ने कहा नए निकाहनामे में आधार का अहम् योगदान रखा गया है. इस नए निकाहनामे में महिलाओं और पुरुषों दोनों के आधार को लिंक कराया जाएगा। इतना ही नहीं इसमें ऐसे सख्त कानून बने हैं जिसमें ना तो कोई महिला किसी पुरुष को धोखा दे सकती है ना ही पुरुष।

अब हलाला और मुताह से लड़ाई बाकी
नाइस हसन ने बताया किया कि अभी तलाक तलाक तलाक से आज़ादी मिली है लेकिन चुनौतियाँ अभी और भी हैं. हलाला के साथ ही मुताह से लड़ाई लड़नी है.मुताह एक तरह से वैश्यावृत्ति है जिसमें अमीर शेख कुछ समय के लिए सेक्स करने के लिए पैसे देते हैं. इसके लिए वह निकाह तो करते हैं मगर बाद में तलाक दे देते हैं. हैदराबाद और मुंबई जैसी जगहों पर मुताह बड़ी समस्या है. इसकी वजह से कई छोटी बच्चियों की जिंदगी तबाह हो रही है. आने वाले समय में इसको लेकर लड़ाई लड़नी है. हम मुस्लिम समाज में निकाह के लिए कोई आयु सीमा तय नहीं है इस वजह से छोटी लड़कियां मुताह में फँसाई जा रही है. मां-बाप पैसों के लालच में अपनी बेटियों को शेख के हाथों बेच देते हैं.

जीपीओ में मनाया जश्न
हज़रतगंज के जीपीओ में तीन तालक से मिली आज़ादी को लेकर जश्न का माहौल दिखा। यहां मुस्लिम महिलाएं इकट्ठा हुई और उन्होंने एक दूसरे को मिठाई खिलाकर इस जीत का

 

Show More
Santoshi Das
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned