विदेशों में बिकेगी यूपी की फल सब्जियां, बनेंगे 10 नए हाउस पैक

नए पैक हाउस उन जिलों में बनाए जाएंगे जहां या उसके आसपास के क्षेत्र में किसी फल या सब्जी का बहुत उत्पाद हो। ऐसे जिलों में पैक हाउस बनाए जाएंगे ताकि कम समय में वह कृषि उत्पाद पैक हाउस पहुंच सकें और जरूरी होने पर एचवीटी (हीट वेव ट्रीटमेंट) के एलावा ग्रेडिंग, पैकिंग आदि की जरूरत भी पूरी कर सकें।ये फल सब्जियां विदेशों में भी बिकेगी।

By: Karishma Lalwani

Updated: 30 Oct 2020, 04:18 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

लखनऊ. प्रदेश में फल सब्जियों के निर्यात को बढ़ाने के लिए प्रदेश सरकार दस जिलों में नए पैक हाउस खोलेगी। ये पैक हाउस प्रदेश के विभिन्न जिलों में बनाए जाएंगे। इसमें एपीडा (एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस फूड एक्सपोर्ट डेवलेपमेंट अथॉरिटी) आर्थिक सहयोग देगी। नए पैक हाउस उन जिलों में बनाए जाएंगे जहां या उसके आसपास के क्षेत्र में किसी फल या सब्जी का बहुत उत्पाद हो। ऐसे जिलों में पैक हाउस बनाए जाएंगे ताकि कम समय में वह कृषि उत्पाद पैक हाउस पहुंच सकें और जरूरी होने पर एचवीटी (हीट वेव ट्रीटमेंट) के एलावा ग्रेडिंग, पैकिंग आदि की जरूरत भी पूरी कर सकें।ये फल सब्जियां विदेशों में भी बिकेगी।

यहां बनेंगे पैक हाउस

प्रयागराज, लखीमपुर खीरी, अमरोहा, बरेली, गोरखपुर, प्रतापगढ़, शाहजहांपुर, अयोध्या, झांस और अलगीगढ़।

ये फल सब्जियां होंगी निर्यात

आम, अमरूद, आंवला, मिर्च, करेला, लौकी, बेर, भिंडी, बैगन, मटर, गोभी, गाजर, खीरा, ग्वारफली, सिंघाड़ा, चुकन्दर, आदि।

मत्स्य पालन के लिए सरकार देरी 40 फीसद अनुदान

प्रधानमंत्री विशेष पैकेज योजना के जरिए अब मत्स्यपालक व मछुआरों की किस्मत चमकेगी। अब निजी तालाब बनाकर आर्थिक लाभ देने लेने का मौका सभी के लिए सरकार की ओर से उपलब्‍ध कराने की तैयारी है। इसके तहत तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन के लिए 40 फीसद तक अनुदान की व्‍यवस्‍था है। मछली पालन से लेकर बाजार में जरूरी सामान पहुंचाने तक जरूरी सामान के लिए सरकार अनुदान देगी। इसके लिए ऑनलाइन आवेदन लिए जा रहे हैं।परियोजना की कुल लागत 8.50 लाख प्रति हेक्टेयर है। इस योजना में तालाब निर्माण पर सात लाख रुपये व प्रथम वर्ष में मत्स्य पालन के लिए 1.50 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर देय है।

पहले आओ पहले पाओ से होगा चयन

जमीन के मालिकाें को मत्स्य पालक विकास अभिकरण के विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन पत्र 21 नवंबर की शाम पांच बजे तक प्राप्त किए जा सकते हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों का चयन 'पहले आओ पहले पाओ' के अनुसार ही किया जाएगा। मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण रविंद्र प्रसाद का कहना है कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत निजी भूमि में तालाब निर्माण कर मत्स्य पालन करने के लिए विभागीय पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन पत्र 21 नवंबर की शाम पांच बजे तक प्राप्त किया जा सकता है। आवेदक के पास कम से कम 0.20 हेक्टेयर अधिकतम दो हेक्टेयर तक विवाद रहित निजी स्वामित्व की भूमि होनी आवश्‍यक है।

खेती के लिए जल की उपलब्धता

लाभार्थियों का चयन पहले आओ पहले पाओ के आधार पर होगा। तालाब के निर्माण से एक तरफ से जलस्तर मेंटेन होगा वहीं दूसरी ओर खेती के लिए जल की उपलब्ता भी होगी। हरियाली का क्षेत्र बढ़ने के साथ ही जल संचय की प्रवृत्ति में इजाफा होगा।

नए तालाब निर्माण पर सात लाख रुपये की लागत

जिला मत्स्य विभाग की जानकारी के अनुसार रियरिंग तालाब के निर्माण पर छह लाख, आर्द्र जलभूमि का विकास पर पांच लाख, नए तालाब का निर्माण पर सात लाख और प्रथम वर्ष में इनपुट पर 1.50 लाख रूपये प्रति हेक्टेयर खर्च होगा। इसी पर 40 से 60 फीसदी ऋण दिया जाएगा। 16 नवंबर तक ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

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Karishma Lalwani
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