बाबरी मस्जिद मामला: मुकदमे की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ा

बाबरी मस्जिद मामला: मुकदमे की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ा
बाबरी मस्जिद मामला: मुकदमे की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ा

Karishma Lalwani | Updated: 13 Sep 2019, 03:30:11 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

- बाबरी विध्वंस मामले की सुनवाई करने वाले विशेष न्यायधीश का कार्यकाल बढ़ा

- फैसला सुनाए जाने तक बढ़ाया कार्यकाल

- नौ महीने के भीतर फैसला सुनाए जाने का निर्देश

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार (UP Government) ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) को बताया कि उसने 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस कांड की सुनवाई कर रहे विशेष न्यायधीश के कार्यकाल में विस्तार कर दिया है। उप्र सरकार ने कोर्ट के निर्देश का पालन करते हुए बाबरी मस्जिद विध्वंस (Babri demolition) मामले में सुनवाई कर रहे विशेष न्यायधीश का कार्यकाल बढ़ाया है।

फैसला सुनाने तक बढ़ाया कार्यकाल

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुई वरिष्ठ अधिवक्ता ऐश्वर्या भाटी ने कोर्ट को बताया कि शीर्ष न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए विशेष न्यायधीश के कार्यकाल को तब तक के लिए बढ़ाया गया है, जब तक अयोध्या बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में फैसला नहीं सुना देते। वहीं, इस मामले में नौ महीने के भीतर फैसला सुनाए जाने का निर्देश दिया।

बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के मामले में भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) को आरोपी माना गया है। इनके अलावा मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती समेत 12 लोगों को भी मस्जिद ढहाए जाने का आरोपी माना गया है। सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व भाजपा सांसद विनय कटियार और साध्वी रितंभरा पर भी 19 अप्रैल, 2017 को षडयंत्र रचने के आरोप लगाए थे। जस्टिस आरएफ नरीमन और जस्टिस सूर्य कांत की पीठ ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव द्वारा पेश किए गए हलफनामे और ऑफिस मेमो मामले पर निपटारा करते हुए कहा कि वे संतुष्ट हैं कि आवश्यक कार्रवाई की गई। बता दें कि अगस्त माह में सुप्रीम कोर्ट ने खनऊ में सुनवाई कर रहे विशेष न्यायाधीश का कार्यकाल बढ़ाने के बारे में उत्तर प्रदेश सरकार को दो सप्ताह के अंदर आदेश जारी करने को कहा था।

मामले से संबंधित दो मुकदमे

अयोध्या में छह दिसंबर, 1992 को विवादित ढांचे को विध्वंस किया गया था। इस मामले से संबंधित दो मुकदमे हैं। पहला मुकदमा अज्ञात कारसेवकों के नाम है जबकि दूसरा मुकदमा मामले में आरोपी बताए गए भाजपा नेताओं के खिलाफ है, जिसपर रायबरेली की अदालत में मुकदमा चल रहा था। 19 अप्रैल, 2017 को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस पीसी घोष और जस्टिस आरएफ नरीमन की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा आरोपियों को बरी किए जाने के फैसले पर सीबीआई द्वारा दायर अपील को अनुमति देकर और आडवाणी, जोशी, उमा भारती समेत 12 लोगों के खिलाफ साजिश के आरोपों को बहाल किया था।

दो साल में पूरी हो कार्रवाई

शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत रायबरेली और लखनऊ की अदालत में लंबित पड़े मुकदमों को लखनऊ में ही सुनवाई के आदेश दिए थे। कोर्ट ने ये भी कहा था कि कार्रवाई प्रतिदिन के आधार पर दो साल में पूरी की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने इन नेताओं के खिलाफ आपराधिक साजिश के आरोप खत्म करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 12 फरवरी, 2001 के फैसले को गलत बताया था।

ये भी पढ़ें: कांग्रेस को नए सिरे से खडा करने के लिए प्रियंका ने तैयार किया ये रोडमैप, नए प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा के बाद शुरू होगा ये काम

Show More
खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned