परिवार बढ़ाने के लिए.. अब मुंशी, पलटू, काका और जगनिक का सहारा

Alok Pandey

Publish: Oct, 13 2017 01:03:01 (IST)

Lucknow, Uttar Pradesh, India
परिवार बढ़ाने के लिए.. अब मुंशी, पलटू, काका और जगनिक का सहारा

इसी योजना को समूचे देश में लागू करने का इरादा है और प्रबुद्ध वर्ग के सहारे असल मकसद समझाना आसान है।

लखनऊ. अब परिवार बढ़ाने की तैयारी है। कुनबे का दायरा फैलाने के लिए गांवों और कस्बों में कवायद होगी। सहारा लिया जाएगा रमई काका, हरिऔध, मुंशीजी और सुभद्रा कुमारी जैसे साहित्यकारों का। परिवार के नए सदस्यों का जिम्मेदारी होगी प्रीत का पाठ पढ़ाना और दूसरों का गुस्सा कम करना। इस कवायद के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने खाका बना लिया है। दीपावली के बाद परिवार बढ़ाने की योजना का ब्लू प्रिंट तैयार किया जाएगा। नवंबर से योजना पर जोर-शोर से अमल होगा।

विरासत के सहारे बढ़ाएंगे परिवार

आरएसएस ने संगठन विस्तार के लिए अब साहित्यकारों की विरासत को सहारा बनाने का निर्णय लिया है। तय किया गया है कि समाज के प्रबुद्ध वर्ग के बीच पैठ मजबूत करने के लिए अलग-अलग इलाकों में क्षेत्रीय नामचीन साहित्यकारों के जन्मस्थान, कर्मभूमि और निर्वाणस्थल पर संघ का संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दौरान साहित्यकार की अमिट यादों को सहेजे गांव में ‘साहित्यिक यात्रा’ पहुंचेगी। सभा के दौरान साहित्यकार की कृतियों के सहारे राष्ट्रवाद को प्रखर करने की कोशिश होगी। इसके अतिरिक्त भ्रष्टाचार, जातिवाद, सामंतवाद जैसे मुद्दों को उछाला जाएगा। ‘साहित्यिक यात्रा’ का प्रस्ताव बीते दिनों जबलपुर में अखिल भारतीय साहित्य परिषद के राष्ट्रीय अधिवेशन में पारित किया गया है। गौरतलब है कि अखिल भारतीय साहित्य परिषद भी संघ के आनुषांगिक संगठन के तौर पर काम करता है।

नए सदस्य कम करेंगे लोगों का गुस्सा

प्रत्यक्ष तौर पर ‘साहित्यिक यात्रा’ का मकसद संघ के परिवार और विचारधारा को विस्तार देना बताया गया है, लेकिन मकसद दूजा है। संघ के पुख्ता सूत्रों के मुताबिक, नोटबंदी, जीएसटी और महंगाई जैसे कारणों से लोगों में भाजपा के प्रति जबरदस्त गुस्सा है। संघ का मानना है कि जीएसटी के कारण बिलिंग अनिवार्य होने से टैक्स चोरी रुकने पर व्यापारी वर्ग हल्ला मचा रहा है। इस हल्ले को गलत फैसला समझकर सामान्य जनता भी नाराज है। संघ ने गुजरात में कई स्थानों पर जीएसटी के लाभ को समझाने और हल्ला करने वालों के मकसद को विस्तार से समझाकर लोगों के गुस्से को अनुराग में बदल लिया है। इसी योजना को समूचे देश में लागू करने का इरादा है और प्रबुद्ध वर्ग के सहारे सरकार के फैसलों का असल मकसद समझाना आसान है।

नैमिषारण्य से होगा यात्रा का श्रीगणेश

यूपी में यात्रा का खाका तय करने के लिए दीपावली के बाद अक्टूबर के अंतिम सप्ताह में बैठक होगी। अलबत्ता यह पक्का है कि यात्रा की शुुरुआत नैमिषारण्य से होगी। अखिल भारतीय साहित्य परिषद के प्रदेश महामंत्री पवनपुत्र बादल के अनुसार नैमिषारण्य सिर्फ धार्मिक नगरी नहीं, बल्कि सनातन पुरातन पंरपराओं और संस्कृति और शास्त्रों के सृजन की नगरी है, इसलिए यात्रा यहीं से शुरू होगी। उन्होंने बताया कि नैमिषारण्य से शुरु होकर यात्रा उन्नाव, कानपुर, बुंदेलखंड, इलाहाबाद होते हुए पूर्वांचल पहुंचेगी, जहां से अवध क्षेत्र से होते हुए पश्चिम यूपी और अंत में बृज क्षेत्र में पहुंचेगी। इस दौरान क्षेत्रीय टोलियां यात्रा मार्ग के अगल-बगल स्थित साहित्यकारों के गांवों में सम्मान सभा आयोजित करेंगी।

बड़े साहित्यकारों के गांवों में बड़ा आयोजन

तय रूपरेखा के मुताबिक, गोस्वामी तुलसीदास, सूरदास, कबीरदास, संत रैदास के साथ-साथ महावीर प्रसाद द्विवेदी, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला, प्रताप नारायण मिश्र, गया प्रसाद शुक्ल सनेही, महादेवी वर्मा, संत पलटूदास, महाकवि भूषण, महादेवी वर्मा, सुभद्रा कुमारी चौहान, आल्हा लिखने वाले जगनिक, भारतेंदु हरिश्चंद, चंद्रभूषण त्रिवेदी उर्फ रमई काका, अयोध्य सिंह उपाध्याय हरिऔध, कन्हैया लाल मिश्र, रामचंद्र शुक्ल, रघुवीर सहाय, मुंशी प्रेमचंद, विष्णु प्रभाकर, बेचैन शर्मा उग्र, जैनेंद्र, शिवमंगल सिंह सुमन के गांव में बड़े कार्यक्रम होंगे।

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