UP Governor Anandiben Patel : नदी में कूद गई थी यूपी की नई राज्यपाल, इस पूरी घटना ने बदल दी थी कहानी, बड़े-बड़े कामों से बनी पीएम मोदी की खास

UP Governor Anandiben Patel : नदी में कूद गई थी यूपी की नई राज्यपाल, इस पूरी घटना ने बदल दी थी कहानी, बड़े-बड़े कामों से बनी पीएम मोदी की खास

Ruchi Sharma | Publish: Jul, 20 2019 02:06:02 PM (IST) | Updated: Jul, 20 2019 02:45:00 PM (IST) Lucknow, Lucknow, Uttar Pradesh, India

-उत्तर प्रदेश की नए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल (Anandiben Patel)
-22 जुलाई 2014 को राम नाईक (Ram Naik) उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बने थे

लखनऊ. उत्तर प्रदेश की नए राज्यपाल आनंदी बेन पटेल (Anandiben Patel) को बनाया गया है। राम नाईक की विदाई हो गई है। 22 जुलाई 2014 को राम नाईक (Ram Naik) उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बने थे। 22 जुलाई 2019 को उनका कार्यकाल समाप्त हो रहा था। गुजरात की पूर्व मुख्यमंत्री और मध्य प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को सूबे का राज्यपाल घोषित किया गया है। इससे पहले वह मध्य प्रदेश की राज्यपाल थीं। इसके अलावा जगदीश धनकर को पश्चिम बंगाल, लालजी टंडन को मध्य प्रदेश, रमेश बैस को त्रिपुरा और आएन रवि को नागालैंड का नया राज्यपाल बनाया गया है।

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गुजरात की मुख्यमंत्री रह चुकीं anandiben patel वर्ष 1988 में राजनीति में आई थीं। राजनीति में आने से पहले वह अध्यापक थीं। कुशल अध्यापन के लिए आनंदी बेन पटेल राज्यपाल और राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित भी हो चुकी हैं। 1987 में उन्हें ‘वीरता पुरस्कार’ से भी नवाजा जा चुका है। यह पुरस्कार उन्हें नर्मदा नदी में डूबती हुई एक लड़की को बचाने के लिए मिला था। नौकरी करते हुए वे महिलाओं के उत्थान के लिए संचालित महिला विकास गृह में शामिल हो गईं, जहां उन्होंने 50 से अधिक विधवाओं के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की शुरुआत की। आइए जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें...

इस घटना ने बदल दी Anandiben Patel का जीवन

राजनीति में आने से पहले आनंदी बेन अहमदाबाद के मोहिनीबा कन्या विद्यालय में प्रधानाचार्य थीं। राजनीति में उनका का प्रवेश 1987 में स्कूल पिकनिक के दौरान एक दुर्घटना की वजह से हुआ। हुआ यूं कि स्कूल पिकनिक के दौरान दो छात्राएं नर्मदा नदी में गिर गईं। उन्हें डूबता देख आनंदीबेन भी उफनती नदी में कूद पड़ीं और दोनों को ज़िंदा बाहर निकाल लाईं। इसके लिए आनंदीबेन को राज्य सरकार ने वीरता पुरस्कार से नवाज़ा। इस घटना के बाद आनंदीबेन के पति मफतभाई पटेल, जो उन दिनों गुजरात भाजपा के कद्दावर नेताओ में से एक थे, के दोस्त नरेंद्र मोदी और शंकरसिंह वाघेला ने उन्हें भाजपा से जुड़ने और महिलाओं को पार्टी के साथ जोड़ने के लिए कहा। बस उसी साल आनंदीबेन, गुजरात प्रदेश महिला मोर्चा अध्यक्ष बनकर, भाजपा में शामिल हो गईं। पार्टी में उन दिनों कोई मजबूत महिला नेता नहीं थी इसलिए कुछ ही दिनों में भाजपा में आनंदीबेन एक निडर नेता के तौर पर उभरीं।

1994 में गुजरात की सांसद बनी

राजनीति में आने के सात वर्ष बाद ही 1994 में Anandiben Patel गुजरात से राज्यसभा की सांसद बनीं। उसके बाद 1998 के विधानसभा चुनाव में वह बतौर विधायक गुजरात के मांडल इलाक़े से चुनी गईं और केशुभाई पटेल की सरकार में उन्हें शिक्षा मंत्री बनाया गया। लेकिन वह हमेशा से ही मोदी के नज़दीक रहीं। 1995 में शंकरसिंह वाघेला का विद्रोह हो या 2001 में केशुभाई को पद से हटाने की बात हो, आनंदीबेन हमेशा मोदी के साथ खड़ी रहीं।

मोदी सरकार में आए उसके बाद कुछ दिनों तक शिक्षा मंत्री रही आनंदीबेन को शहरी विकास और राजस्व मंत्री बनाया गया। वह राज्य सरकार की कई और समितियों की भी अध्यक्ष थीं।

मोदी की वाहवाही के पीछे आनंदीबेन ही रही

यह बात कम ही लोग जानते हैं कि टाटा नैनो को ज़मीन देने की बात हो या नर्मदा नहर के लिए किसानों से ज़मीन लेने का काम, इन सबके पीछे आनंदीबेन का हाथ था। गुजरात राज्य की कई और नीतियां, जिनके लिए मोदी ने वाहवाही लूटी है, उनके पीछे आनंदीबेन ही हैं। फिर चाहे वह ई-ज़मीन कार्यक्रम हो, जमीन के स्वामित्व डाटा और जमीन के रिकॉर्ड को कंप्यूटरीकृत करके जमीन के सौदों में होने वाली धांधली को रोकने की बात हो, या फिर गुजरात के 52 प्रतिशत किसानों के अंगूठे के निशानों और तस्वीरों का कंप्यूटरीकरण कर देने की बात हो।

 

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