मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए अपना खून भी न्योछावर

मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए अपना खून भी न्योछावर

By: Ruchi Sharma

Published: 04 Jan 2018, 02:32 PM IST

लखनऊ. धरती पर डॉक्टर को भगवान का दूसरा रूप यूं ही नहीं कहा जाता है। भगवान इंसान को सिर्फ एक बार जन्म देता है लेकिन उस जीवन पर जब भी कभी संकट आता है तो डॉक्टर उसकी मरम्मत करता है। लेकिन लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान और केजीएमयू के डॉक्टरों ने एक ऐसी पहल की है जिसे जानकर आपको भी गर्व होगा। ये डॉक्टर मरीजों का बेहतर उपचार तो करते ही हैं लेकिन मरीज के संकट में होने की दशा में रक्तदान कर जीवनदान देने से भी नहीं चूकते हैं। ये डॉक्टर अब तक इस नेक मिशन से कई मरीजों की जान बचा चुके हैं। डॉक्टरों ने रक्तदान के लिए कारवां बनाना भी शुरू कर दिया है। ये लोग रक्तदान के फायदे भी बता रहे हैं।

 

भगवान से कम नहीं है ये डॉक्टर

लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में कॉर्डियो वैस्कुलर थोरैसिक सर्जरी विभाग के डॉ. धर्मेन्द्र कुमार श्रीवास्तव बीमार मरीजों के लिए भगवान से कम नहीं है। डॉ. धर्मेंद्र अब तक वह 200 से ज्यादा बच्चों के दिल का सुराख ऑपरेशन कर बंद कर चुके हैं। वह 11 से ज्यादा बार ऑपरेशन से पहले मरीज के लिए रक्तदान कर चुके हैं। वह बताते हैं कि जिन तीमारदारों के पास डोनर नहीं होता है उनके लिए रक्तदान करता हूं। वह बताते हैं कि हर तीन महीने पर रक्तदान कर रहा हूं। यह सिलसिला 2011 से चल रहा है। रक्तदान कर मुझे खुशी होती है।

 

12 से ज्यादा मरीजों की रक्तदान कर बचा चुके हैं जान

हमारे समाज में डॉक्टर को भगवान का दर्जा दिया गया है, क्योंकि वही एक ऐसा शख्स है, जो किसी को मौत के मुंह में जाने से बचा सकता है। तिल-तिल मरते किसी इंसान को जिंदगी दे सकता है और खोई हुई उम्मीदों को जीता-जागता उत्साह दे सकता है। जाहिर सी बात है कि धरती पर एक डॉक्टर ही साक्षात ईश्वर का काम करता है और इसके लिए उनके प्रति जितना कृतज्ञ हुआ जाए कम ही होगा। इसी का एक उदाहरण है डॉ. निखिल तोमर अौर डॉ. धर्मेन्द्र कुमार।

केजीएमयू से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप कर रहे गोमतीनगर निवासी डॉ. निखिल तोमर भी रक्तदान कर जीवनदान करने के पुनीत कार्य में वर्षों से लगे है। डॉ. निखिल बताते हैं कि पांच साल के दौरान वे 12 से ज्यादा बार मरीजों के लिए रक्तदान कर चुके हैं। वह बताते हैं कि पहले रक्तदान को लेकर डर लगता था। मेडिकल की पढ़ाई के दौरान मरीजों की पीड़ा देखी। तमाम ऐसे भी मरीज देखे जिनके पास खून देने वाला कोई नहीं था। ऐसे में रक्तदान करने का संकल्प लिया और उसके बाद नियमित रक्तदान का सिलसिला चल पड़ा। उन्होंने कहा कि रक्तदान सभी को करना चाहिए। किसी को जीवन देने से बड़ा पुण्य किसी और कार्य से नहीं मिलता।

Ruchi Sharma
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