UP Budget 2020: आज के बजट में किसानों के लिए खुलेगा सबसे बड़ा पिटारा, सीएम योगी देंगे ये सौगात

योगी आदित्यनाथ सरकार के चौथे बजट (UP Budget 2020) में मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना के लिए अतिरिक्त धनराशि हो सकती है मंजूर..

लखनऊ. मोदी सरकार का बजट आने के बाद अब सभी का ध्यान उत्तर प्रदेश के बजट पर है। ऐसी संभावना जताई जा रही है कि योगी आदित्यनाथ सरकार का यह चौथा बजट पहली बार 5 लाख करोड़ रुपए का आंकड़ा पार कर जाएगा। बजट से प्रदेश का किसान वर्ग भी खास उम्मीद लगाए बैठा है। ऐसे में मुख्यमंत्री योगी का सारा जोर किसानों के लिए चालू योजनाओं को धन उपलब्ध कराने पर हो सकता है। इस बार बजट का बड़ा आकर्षण मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना भी होगी। योगी सरकार के वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में भी किसान केंद्र में थे। तब सरकार ने किसानों की ऋणमाफी पर फोकस कर उन्हें बड़ी सौगात दी थी। ऐसे में अब किसान परिवारों की सामाजिक सुरक्षा की सबसे बड़ी योजना के लिए दिए जाने वाले बजट पर सभी की निगाहें रहेंगी।

किसानों को बड़ी सौगात

दरअसल यूपी सरकार ने हालही में राज्य के किसानों के लिए बड़ी सामाजिक सुरक्षा योजना शुरू की है। इस योजना का नाम मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना कल्याण योजना रखा। इस योजना में करीब 10 करोड़ किसानों को दुर्घटना में मृत्यु या घायल होने पर 5 लाख रुपए का मुआवजा या मदद मिलने का प्रावधान किया गया है। जानकारों का मानना है कि किसानों व बटाईदारों की इस सबसे बड़ी योजना के लिए सरकार बजट में बड़ी राशि आवंटित कर सकती है। जिससे प्रदेश के ज्यादा से ज्यादा किसानों को इस योजना का लाभ दिया जा सके। इस योजना के दायरे में प्रदेश के करीब 2 करोड़ 38 लाख 22 हजार किसान हैं।

नई योजना में खास

पहले मुख्यमंत्री कृषक दुर्घटना बीमा योजना का लाभ सिर्फ खातेदार किसान और सह-खातेदार को ही मिलता था। लेकिन अब नई व्यवस्था में किसान और उसकी पत्नी, पुत्र-पुत्री, पौत्र व पौत्री के साथ ही बटाईदार भी इसका पात्र होगा। 18 से 70 वर्ष तक की उम्र के किसान इस योजाना के पात्र होंगे। 14 सितंबर 2019 से यह योजना प्रभावी की गई है।

इतने दिनों में आवेदन

योजना में शर्त रखी गई है कि दुर्घटना में किसान की मृत्यु या दिव्यांगता होने पर सभी प्रपत्र 45 दिन के अंदर तहसील कार्यालय में आवेदन सहित जमा करना होगा। इसमें एक महीने तक के विलंब को क्षमा करने का अधिकार जिलाधिकारी को होगा, लेकिन 75 दिन के बाद आवेदन पर विचार ही नहीं किया जाएगा।

जिलाधिकारी चलाएंगे योजना

पिछले वित्तीय वर्ष में बीमा कंपनियों के पास बीमा राशि 675 करोड़ रुपए पहुंची, जबकि खर्च मात्र 200 करोड़ रुपये ही हुए। इस तरह बीमा कंपनियां 475 करोड़ रुपए का लाभ कमा गईं। लेकिन अब इस योजना से बीमा कंपनियों का दखल खत्म कर दिया गया है। राज्य सरकार से वित्त पोषित यह योजना जिलाधिकारियों के माध्यम से चलाई जाएगी।

नितिन श्रीवास्तव
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